History of India
Asked 3 hours ago · Viewed 0 times
वैदिक सभ्यता और वैदिक साहित्य के राजनीतिक तथा सामाजिक विकास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. ऋग्वैदिक काल में 'सभा' और 'समिति' नामक संस्थाओं का विशेष महत्व था, जहाँ 'सभा' मुख्य रूप से कुलीन या वरिष्ठ नागरिकों की संस्था थी, जबकि 'समिति' एक सामान्य लोक सभा थी जिसमें संपूर्ण कबीले के लोग (स्त्रियों सहित) भाग लेते थे।
- 2. उत्तर वैदिक काल में कबीलाई समाजों का क्षेत्रियाकरण हुआ और बड़े जनपदों का उदय हुआ, जिसके परिणामस्वरूप राजा की शक्ति में वृद्धि हुई और 'सभा' व 'समिति' जैसी लोकतांत्रिक संस्थाओं का प्रभाव कम होने लगा, तथा अथर्ववेद में इन्हें प्रजापति की दो पुत्रियाँ कहा गया है।
- 3. वैदिक काल में परिवार व्यवस्था पितृसत्तात्मक थी, किंतु महिलाओं को उपनयन संस्कार का अधिकार था और वे वेदों की ऋचाओं की रचना भी करती थीं (जैसे अपाला, घोषा और विश्ववारा), तथा इस काल में बाल विवाह और पर्दा प्रथा जैसी कुप्रथाएँ समाज में पूरी तरह प्रचलित थीं।
- 4. वैदिक साहित्य के अंतर्गत 'वेदांगों' की कुल संख्या छह है — शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरुक्त, छंद और ज्योतिष — जिन्हें वेदों के अर्थ को समझने और उनके सही उच्चारण व अनुष्ठान के लिए सहायक अंगों के रूप में विकसित किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
वैदिक काल में राजनीतिक और सामाजिक व्यवस्था अत्यंत संगठित थी। ऋग्वैदिक काल में 'सभा' और 'समिति' राजा की निरंकुशता पर अंकुश लगाने वाली प्रमुख संस्थाएँ थीं। समिति में सामान्य जनता भाग लेती थी और प्रारंभिक दौर में इसमें महिलाओं की भागीदारी भी होती थी। उत्तर वैदिक काल आते-आते राजा का पद वंशागत हो गया और सभा व समिति का प्रभाव घटने लगा। अथर्ववेद में सभा और समिति को प्रजापति की दो पुत्रियाँ कहा गया है। वैदिक समाज पितृसत्तात्मक था और महिलाओं को उपनयन संस्कार तथा वेदों की शिक्षा का अधिकार प्राप्त था; अपाला, घोषा, लोपामुद्रा जैसी विदुषी महिलाओं ने ऋग्वेद की ऋचाओं की रचना भी की थी। किंतु इस काल में बाल विवाह, पर्दा प्रथा या सती प्रथा जैसी कुप्रथाएँ समाज में प्रचलित नहीं थीं; महिलाओं को सभा में भाग लेने की स्वतंत्रता थी और उनका विवाह सामान्यतः वयस्क अवस्था में होता था। अतः कथन 3 गलत है। वैदिक साहित्य के अंतर्गत छह वेदांग (शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरुक्त, छंद और ज्योतिष) शामिल हैं। इस संदर्भ में विस्तृत जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
अगला प्रश्न →
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना (1885) से लेकर सूरत विभाजन (1907) तक के…
← पिछला प्रश्न
मुगलकालीन प्रशासनिक व्यवस्था और विशेषकर अकबर से लेकर…
Related Questions
→
1857 के महान विद्रोह के दौरान लखनऊ और अवध क्षेत्र में बेगम हजरत महल और मौलवी अहमदुल्लाह शाह की भूमिका तथा उनके संघर्ष के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बेगम हजरत महल ने अपने अल्पवयस्क पुत्र बिरjis कादिर को अवध का नवाब घोषित कर लखनऊ में विद्रोह की कमान संभाली और ब्रिटिश सेना के विरुद्ध सशस्त्र प्रतिरोध का नेतृत्व किया।
2. मौलवी अहमदुल्लाह शाह, जिन्हें 'डंके शाह' के नाम से भी जाना जाता था, ने फैजाबाद और अवध क्षेत्र में अंग्रेजों के विरुद्ध जिहाद का आह्वान किया और अपनी उत्कृष्ट सैन्य रणनीतियों से ब्रिटिश सेनापतियों के लिए गंभीर चुनौती उत्पन्न की।
3. लखनऊ की घेराबंदी के दौरान ब्रिटिश सेना का नेतृत्व करने वाले जनरल नील और हेनरी लॉरेंस विद्रोहियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए मारे गए थे, तथा अंततः मार्च 1858 में सर कॉलिन कैंपबेल ने गोरखा रेजीमेंट की सहायता से लखनऊ पर पुनः अंग्रेजों का अधिकार स्थापित किया।
4. बेगम हजरत महल ने अंग्रेजों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया और उन्हें पेंशन पर लंदन भेज दिया गया, जबकि मौलवी अहमदुल्लाह शाह को अंग्रेजों ने लखनऊ में ही सार्वजनिक रूप से फांसी दे दी थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
वर्ष 1905 के बंगाल विभाजन और उसके विरोध में उपजे स्वदेशी आंदोलन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बंगाल विभाजन के निर्णय की आधिकारिक घोषणा 20 जुलाई 1905 को लॉर्ड कर्जन द्वारा की गई थी, जिसके विरोध में 7 अगस्त 1905 को कलकत्ता के प्रसिद्ध टाउन हॉल में आयोजित ऐतिहासिक बैठक में 'स्वदेशी आंदोलन' की औपचारिक घोषणा की गई और 'बहिष्कार प्रस्ताव' पारित किया गया।
2. 16 अक्टूबर 1905 को जिस दिन बंगाल विभाजन प्रभावी हुआ, उस दिन पूरे बंगाल में 'शोक दिवस' के रूप में मनाया गया, लोगों ने उपवास रखा, बंगाली कवि रवींद्रनाथ ठाकुर के आह्वान पर 'अमार सोनार बांग्ला' गीत गाया गया और एक-दूसरे की कलाई पर राखी बांधकर एकता का संदेश दिया गया।
3. स्वदेशी आंदोलन के दौरान आर्थिक बहिष्कार के साथ-साथ रचनात्मक कार्यों (Constructive Programmes) पर भी जोर दिया गया, जिसके तहत आचार्य प्रफुल्ल चंद्र राय ने 'बंगाल केमिकल एंड फार्मास्युटिकल वक्र्स' जैसी स्वदेशी उद्योगों की स्थापना की और राष्ट्रीय शिक्षा के प्रसार के लिए 'नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशन' का गठन किया गया।
4. इस आंदोलन का विस्तार केवल बंगाल तक ही सीमित रहा, क्योंकि बंबई, मद्रास और पंजाब के राष्ट्रवादी नेताओं (जैसे बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय और चिदंबरम पिल्लै) ने ब्रिटिश दमन के भय से स्वदेशी और बहिष्कार के प्रस्तावों को अपने-अपने प्रांतों में लागू करने से स्पष्ट मना कर दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
सत्रहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी (EIC) के भारत में विस्तार और प्रशासनिक तथा व्यापारिक सुदृढ़ीकरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1668 में ब्रिटिश सम्राट चार्ल्स द्वितीय ने पुर्तगाली राजकुमारी से विवाह में दहेज के रूप में प्राप्त बॉम्बे (मुंबई) द्वीप को मात्र 10 पाउंड वार्षिक किराए पर ईस्ट इंडिया कंपनी को सौंप दिया था, जिसे बाद में गेराल्ड औग्यार ने एक मजबूत व्यापारिक और किलेबंद शहर के रूप में विकसित किया।
2. जॉब चारनाक ने 1690 में हुगली के स्थान पर सुताती (Sutanuti), कलकता (Kalikata) और गोविंदपुर (Govindpur) नामक तीन गाँवों को मिलाकर कलकत्ता शहर की नींव रखी, और यहीं पर 'फोर्ट विलियम' की स्थापना की गई जिसका प्रथम अध्यक्ष चार्ल्स आयर को बनाया गया था।
3. वर्ष 1717 में मुगल सम्राट फर्रुख्शियर द्वारा ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को एक शाही फरमान जारी किया गया था, जिसे इतिहासकार ऑर्म (Orme) ने 'कंपनी का मैग्ना कार्टा' कहा, जिसके तहत कंपनी को बंगाल, हैदराबाद और गुजरात में बिना चुंगी (ड्यूप्री) कर चुकाए स्वतंत्र व्यापार करने का पूर्ण अधिकार मिल गया।
4. ब्रिटिश कंपनी द्वारा बंगाल में व्यापारिक विशेषाधिकारों के दुरुपयोग को रोकने के लिए 'दस्तक' (Dastak) नामक निःशुल्क व्यापारिक परमिट जारी किए जाते थे, जिनका दुरुपयोग कंपनी के अधिकारियों द्वारा अपने निजी व्यापार के लिए भी किया जाने लगा जिससे स्थानीय नवाबों के साथ उनके संबंध अत्यधिक तनावपूर्ण हो गए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
1857 के महान विद्रोह के दौरान फैजाबाद, बरेली और इलाहाबाद में विद्रोह के नेतृत्वकर्ताओं और उनके दमनकर्ता ब्रिटिश अधिकारियों के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. फैजाबाद — मौलवी अहमदुल्लाह शाह (नेतृत्व) एवं जनरल कैंपबेल (दमनकर्ता)
2. बरेली — खान बहादुर खान (नेतृत्व) एवं सर कॉलिन कैंपबेल व विंसेंट आयर (दमनकर्ता)
3. इलाहाबाद — मौलवी लियाकत अली (नेतृत्व) एवं कर्नल नील (दमनकर्ता)
4. बरेली में विद्रोह के दमन के पश्चात खान बहादुर खान को पकड़कर फांसी दे दी गई थी, जबकि मौलवी अहमदुल्लाह शाह को अंग्रेजों ने धोखे से पकड़कर मार डाला था।
उपर्युक्त युग्मों और कथनों में से कौन-से सही हैं?
→
मुगल काल में "खुलासत-उत-तवारीख" के लेखक कौन हैं?
→
महाभारत का फारसी अनुवाद "रज़्मनामा" किसके निर्देशन में किया गया था?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.