History of India
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वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन और सुभाष चंद्र बोस द्वारा गठित 'आज़ाद हिंद फौज' (INA) के अंतर्संबंधों तथा ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान जब देश के शीर्ष कांग्रेस नेतृत्व को गिरफ्तार कर लिया गया था, तब भूमिगत प्रतिरोध (Underground Resistance) का संचालन करने वाले समाजवादी नेताओं (जैसे राम मनोहर लोहिया, अच्युत पटवर्धन और जयप्रकाश नारायण) ने रेडियो प्रसारण के माध्यम से आजाद हिंद फौज के संघर्ष को भारतीय जनता के लिए प्रेरणास्रोत के रूप में प्रस्तुत किया था।
- 2. सिंगापुर के पतन के उपरांत जापानी सेना द्वारा पकड़े गए भारतीय युद्धबंदियों (POWs) से मार्च 1942 में टोक्यो सम्मेलन के दौरान मोहन सिंह ने 'इंडियन नेशनल आर्मी' (INA) के गठन का औपचारिक प्रस्ताव रखा था, जिसे जापान की शाही सेना और रास बिहारी बोस का पूर्ण समर्थन प्राप्त हुआ।
- 3. सुभाष चंद्र बोस वर्ष 1943 में जर्मनी से जर्मन यू-बोट (यू-180) और जापानी पनडुब्बी की सहायता से अत्यंत खतरनाक समुद्री यात्रा करते हुए दक्षिण-पूर्व एशिया पहुँचे, जहाँ सिंगापुर में रास बिहारी बोस ने औपचारिक रूप से 'आजाद हिंद सरकार' (अर्जी हुकूमते आज़ाद हिंद) की सर्वोच्च बागडोर उन्हें सौंप दी।
- 4. आजाद हिंद फौज की 'रानी झांसी रेजिमेंट' का नेतृत्व कैप्टन लक्ष्मी सहगल (लक्ष्मी स्वामीनाथन) ने किया था, जो भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के इतिहास में किसी महिला सैन्य इकाई की पहली और एकमात्र कमांडर थीं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: भारत छोड़ो आंदोलन (1942) के दौरान जब गांधी जी और अन्य शीर्ष नेता गिरफ्तार हो चुके थे, तब राम मनोहर लोहिया, अरुणा आसफ अली, अच्युत पटवर्धन और जयप्रकाश नारायण जैसे समाजवादी नेताओं ने भूमिगत कांग्रेस रेडियो और पर्चों के माध्यम से देशवासियों का मनोबल बढ़ाया और आज़ाद हिंद फौज के संघर्ष का हवाला देकर सशस्त्र प्रतिरोध की अलख जगाई। कथन 2 असत्य है: टोक्यो सम्मेलन (मार्च 1942) में INA के गठन का प्रस्ताव रास बिहारी बोस द्वारा लिया गया था, जबकि बैंकॉक सम्मेलन (जून 1942) में इसे औपचारिक रूप दिया गया था, और मोहन सिंह इसके सैन्य कमांडर बनाए गए थे; किंतु कैप्टन मोहन सिंह का जापानियों के साथ मतभेद होने के कारण उन्हें दिसंबर 1942 में पद से हटा दिया गया था। कथन 3 सही है: सुभाष चंद्र बोस जनवरी 1943 में जर्मनी से एक खतरनाक पनडुब्बी यात्रा के बाद मई 1943 में जापान अधिकृत दक्षिण-पूर्व एशिया पहुँचे थे, जहाँ जुलाई 1943 में सिंगापुर में रास बिहारी बोस ने संगठन की कमान उन्हें सौंपी थी। कथन 4 सही है: आज़ाद हिंद फौज के भीतर महिलाओं की एक विशेष रेजिमेंट बनाई गई थी जिसका नाम 'रानी झांसी रेजिमेंट' था और इसकी कमान डॉक्टर लक्ष्मी सहगल (तब लक्ष्मी स्वामीनाथन) के हाथों में थी। इस ऐतिहासिक और सैन्य पृष्ठभूमि के बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ पढ़ सकते हैं।
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सत्रहवीं शताब्दी में छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा स्थापित स्वराज्य की…
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छठी शताब्दी ईसा पूर्व के 'सोलह महाजनपद' और मगध साम्राज्य…
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मुगलकालीन प्रशासनिक संस्थाओं, भू-राजस्व प्रणालियों तथा मनसबदारी व्यवस्था के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अकबर द्वारा प्रशासनिक सुधारों के तहत लागू की गई 'मनसबदारी व्यवस्था' आंशिक रूप से मंगोलों की दशमलव सैन्य प्रणाली पर आधारित थी, जिसमें प्रत्येक मनसबदार को 'जात' और 'सवार' पद प्रदान किए जाते थे, जहाँ 'जात' उसके व्यक्तिगत वेतन और पद की प्रतिष्ठा का द्योतक था तथा 'सवार' उसके द्वारा रखे जाने वाले घोड़ों और घुड़सवार सैनिकों की संख्या को निर्धारित करता था।
2. शाहजहां के शासनकाल में मनसबदारी व्यवस्था के अंतर्गत 'दुअस्पा-सिंहअस्पा' (Do-aspa Sih-aspa) प्रणाली को पहली बार जोड़ा गया था, जिसके माध्यम से मनसबदारों को अपने मूल सवार पद से दोगुने घोड़े पालने की अनुमति दी गई थी और इसके लिए उन्हें कोई अतिरिक्त वेतन नहीं मिलता था।
3. मुगल साम्राज्य की भू-राजस्व प्रणाली के अंतर्गत टोडरमल द्वारा विकसित 'दहसाला बंदोबस्त' (जपती प्रणाली) के तहत पिछले दस वर्षों की औसत पैदावार और उस पर प्रचलित औसत अनाजों के बाजार मूल्यों का आकलन कर मालगुजारी का स्थाई निर्धारण किया गया था, जिसमें 'पोलज' (वर्षभर उपजाऊ रहने वाली भूमि) और 'परती' सबसे प्रमुख श्रेणियाँ थीं।
4. जहांगीर के शासनकाल में मुगल चित्रकला अपने स्वर्णकाल पर पहुँची, किंतु इसी काल में नूरजहा ने अपने प्रभाव का विस्तार करते हुए 'जुरा pietra' (पित्रा ज्यूरा - पच्चीकारी) शैली को वास्तुकला में पहली बार पूरी तरह संगमरमर की इमारतों पर प्रयोग करने की अनूठी परंपरा शुरू की, जिसका उत्कृष्ट उदाहरण एत्माद-उद्-दौला का मकबरा है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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19वीं शताब्दी के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजा राममोहन राय द्वारा स्थापित 'ब्रह्म समाज' ने मूर्तिपूजा, बहुदेववाद, अवतारवाद और पुरोहिती कर्मकांडों का पुरजोर खंडन किया तथा उपनिषदों के अद्वैत वेदांत पर आधारित एकेश्वरवाद की प्रतिष्ठा की।
2. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा 1875 में स्थापित 'आर्य समाज' ने 'वेदों की ओर लौटो' का नारा दिया और वेदों को अपौरुषेय एवं अचूक मानते हुए मूर्तिपूजा, बाल विवाह और बहुविवाह प्रथा का समर्थन किया।
3. केशव चंद्र सेन के ब्रह्म समाज से अलग होने के पश्चात देवेंद्रनाथ टैगोर ने 'आदि ब्रह्म समाज' की स्थापना की, जबकि केशव चंद्र सेन ने 'भारतीय ब्रह्म समाज' का गठन किया, जिसके अंतर्गत उन्होंने बाल विवाह के विरुद्ध कानून बनवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, किंतु अपनी ही नाबालिग पुत्री का विवाह कूचबिहार के राजा से कर स्वयं अपने आदर्शों का उल्लंघन किया।
4. प्रार्थना समाज की स्थापना मुंबई में आत्माराम पांडुरंग द्वारा महादेव गोविंद रानाडे और आर. जी. भंडाकर के सहयोग से की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य अंतरजातीय विवाह, विधवा पुनर्विवाह और महिला शिक्षा को बढ़ावा देना था।
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छत्रपति शिवाजी महाराज के केंद्रीय प्रशासन और सैन्य संगठन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. शिवाजी की केंद्रीय मंत्रिपरिषद 'अष्टप्रधान' में 'अमात्य' (या मजुमदार) राज्य के आय-व्यय का हिसाब रखने वाला सर्वोच्च वित्त मंत्री था, जबकि 'वाणियानवीस' (या मंत्री) राजा के दैनिक कार्यों और दरबार की गतिविधियों का रिकॉर्ड रखता था।
2. शिवाजी ने मराठा सेना में वंशानुगत जागीरदारी प्रथा और 'सरंजामी व्यवस्था' को बढ़ावा देते हुए सैनिकों को भूमि अनुदान देने की नीति को अनिवार्य किया, जिससे वे केंद्र के प्रति अधिक वफादार बन सकें।
3. मराठा घुड़सवार सेना दो मुख्य श्रेणियों में विभाजित थी — 'बर्गीर', जिन्हें राज्य द्वारा घोड़े और शस्त्र प्रदान किए जाते थे, तथा 'सिलहदार', जो अपने स्वयं के घोड़े और हथियार लेकर युद्ध में भाग लेते थे।
4. शिवाजी की नौसेना (Navy) का प्रमुख केंद्र कोलाबा और सिंधुदुर्ग जैसे तटीय दुर्ग थे, और उनके मुख्य नौसैनिक बेड़े के आधिपत्य और पश्चिमी तट पर पुर्तगालियों तथा अंग्रेजों की गतिविधियों पर अंकुश लगाने का कार्य मयंक आंगरे जैसे सक्षम अदम्य सरदारों द्वारा किया जाता था।
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सविनय अवज्ञा आंदोलन के विभिन्न चरणों, गांधी-इरविन समझौते तथा गोलमेज सम्मेलनों के ऐतिहासिक घटनाक्रम के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1930 में प्रारंभ हुए सविनय अवज्ञा आंदोलन के प्रथम चरण के दौरान उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत में खान अब्दुल गफ्फार खान द्वारा गठित 'खुदाई खिदमतगार' (लाल कुर्ती आंदोलन) ने अहिंसक प्रतिरोध का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया था।
2. मार्च 1931 में संपन्न गांधी-इरविन समझौते के अंतर्गत वायसराय लॉर्ड इरविन ने हिंसा के गंभीर मामलों (जैसे भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की फांसी) से जुड़े राजनीतिक बंदियों को रिहा करने पर सहमति दे दी थी।
3. वर्ष 1931 में लंदन में आयोजित द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में महात्मा गांधी ने कांग्रेस के एकमात्र आधिकारिक प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया, किंतु सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व और दलितों के पृथक निर्वाचक मंडल के विवाद के कारण यह सम्मेलन बिना किसी ठोस परिणाम के समाप्त हो गया।
4. वर्ष 1932 में डॉ. बी. आर. अंबेडकर द्वारा लंदन में आयोजित तृतीय गोलमेज सम्मेलन में भाग लिया गया था, जिसके पश्चात ब्रिटिश प्रधानमंत्री रैम्जे मैकडोनाल्ड ने 'कम्युनल अवार्ड' की घोषणा की, जिसके विरोध में गांधी जी ने यरवदा जेल में आमरण अनशन किया था।
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मुगल काल में "खुलासत-उत-तवारीख" के लेखक कौन हैं?
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महाभारत का फारसी अनुवाद "रज़्मनामा" किसके निर्देशन में किया गया था?
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