BaalVikas
Menu
History of India
Asked 4 hours ago · Viewed 0 times

19वीं शताब्दी के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. राजा राममोहन राय द्वारा स्थापित 'ब्रह्म समाज' ने मूर्तिपूजा, बहुदेववाद, अवतारवाद और पुरोहिती कर्मकांडों का पुरजोर खंडन किया तथा उपनिषदों के अद्वैत वेदांत पर आधारित एकेश्वरवाद की प्रतिष्ठा की।
  2. 2. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा 1875 में स्थापित 'आर्य समाज' ने 'वेदों की ओर लौटो' का नारा दिया और वेदों को अपौरुषेय एवं अचूक मानते हुए मूर्तिपूजा, बाल विवाह और बहुविवाह प्रथा का समर्थन किया।
  3. 3. केशव चंद्र सेन के ब्रह्म समाज से अलग होने के पश्चात देवेंद्रनाथ टैगोर ने 'आदि ब्रह्म समाज' की स्थापना की, जबकि केशव चंद्र सेन ने 'भारतीय ब्रह्म समाज' का गठन किया, जिसके अंतर्गत उन्होंने बाल विवाह के विरुद्ध कानून बनवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, किंतु अपनी ही नाबालिग पुत्री का विवाह कूचबिहार के राजा से कर स्वयं अपने आदर्शों का उल्लंघन किया।
  4. 4. प्रार्थना समाज की स्थापना मुंबई में आत्माराम पांडुरंग द्वारा महादेव गोविंद रानाडे और आर. जी. भंडाकर के सहयोग से की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य अंतरजातीय विवाह, विधवा पुनर्विवाह और महिला शिक्षा को बढ़ावा देना था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

उपर्युक्त कथनों में से कथन 1, 3 और 4 सही हैं, जबकि कथन 2 असत्य है। स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा स्थापित 'आर्य समाज' ने मूर्तिपूजा, बहुविवाह, बाल विवाह, जाति व्यवस्था और छुआछूत का कड़ा विरोध किया था, न कि इनका समर्थन। आर्य समाज ने वेदों की अचूकता में विश्वास करते हुए तार्किक और समाज-सुधारवादी दृष्टिकोण अपनाया था। ब्रह्म समाज और अन्य सुधार आंदोलनों के विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Share:
अगला प्रश्न → 19वीं शताब्दी के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों और उनके वैचारिक तथा संस्थागत… ← पिछला प्रश्न मुगलकालीन प्रशासनिक संस्थाओं, भू-राजस्व प्रणालियों तथा…

Related Questions

→ 1857 के महान विद्रोह के स्वरूप और उसके मूल्यांकन से संबंधित विभिन्न इतिहासकारों के कथनों के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: 1. "यह तथाकथित प्रथम राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम न तो प्रथम, न ही राष्ट्रीय और न ही स्वतंत्रता संग्राम था।" — आर. सी. मजूमदार 2. "यह सुनियोजित राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम था और इसे ब्रिटिश साम्राज्य के विरुद्ध एक संगठित युद्ध कहा जा सकता है।" — वी. डी. सावरकर 3. "यह केवल एक सिपाही विद्रोह था, जो ब्रिटिश शासन के विरुद्ध नस्लीय अहंकार और कुशासन का परिणाम मात्र था।" — सर जॉन सीले 4. "यह धर्म का युद्ध था, जो बर्बरता और सभ्यता के बीच संघर्ष के रूप में लड़ा गया था।" — टी. आर. होम्स उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से सही सुमेलित हैं? → 1857 के महान विद्रोह की असफलता और उसके नेतृत्व की कमियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इस विद्रोह का नेतृत्व करने वाले अधिकांश देशी शासक, जैसे सिंधिया, होलकर और हैदराबाद के निजाम, अंग्रेजों के प्रति वफादार रहे या अपने सीमित क्षेत्रीय हितों से प्रेरित होकर ब्रिटिश शासन के विरुद्ध अखिल भारतीय मोर्चे का गठन करने में असमर्थ रहे। 2. नाना साहब, बेगम हजरत महल और रानी लक्ष्मीबाई जैसे प्रमुख नेताओं के मध्य किसी भी प्रकार के केंद्रीय उच्च कमान (Central Command), एकीकृत सैन्य रणनीति और दूरदर्शी राजनीतिक योजना का पूर्ण अभाव था। 3. विद्रोहियों के पास आधुनिक संचार साधनों, रेलमार्गों और टेलीग्राफ प्रणाली का नियंत्रण होने के बावजूद प्रशिक्षित सैन्य नेतृत्वकर्ताओं के अभाव के कारण वे अंग्रेजों की सामरिक चालों का मुकाबला करने में विफल रहे। 4. देश का अधिकांश शिक्षित मध्यम वर्ग, आधुनिक बुद्धिजीवी और बड़े व्यापारी वर्ग ने ब्रिटिश शासन द्वारा लाए गए आधुनिकीकरण, कानून के शासन और शांति बहाली के समर्थन में इस विद्रोह से दूरी बनाए रखी या इसका विरोध किया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → सत्रहवीं शताब्दी में छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा स्थापित स्वराज्य की प्रशासनिक, राजस्व और सैन्य नीतियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. शिवाजी ने अपनी प्रशासनिक व्यवस्था में जागीरदारी प्रथा (सरंजामी व्यवस्था) को हतोत्साहित किया और राज्य के सैनिकों तथा अधिकारियों को भूमि अनुदान देने के स्थान पर नकद वेतन देने की परंपरा को प्राथमिकता दी। 2. शिवाजी के राजस्व प्रशासन में भूमि की माप और पैमाइश का कार्य अन्नोजी दत्तो द्वारा करवाया गया था, जिसमें उपज का लगभग 40% भाग राज्य के भू-राजस्व के रूप में निर्धारित किया गया था। 3. 'चौथ' और 'सरदेशमुखी' मराठा साम्राज्य की बाह्य आय के प्रमुख साधन थे, जहाँ 'चौथ' पड़ोसी मुगल क्षेत्रों से उनकी सुरक्षा की गारंटी के एवज में वसूला जाने वाला 25% कर था, जबकि 'सरदेशमुखी' मराठों द्वारा अपने पैतृक अधिकारों के दावे के रूप में लिया जाने वाला 10% अतिरिक्त कर था। 4. शिवाजी की गुप्तचर विभाग का प्रमुख 'बर्गीर' कहलाता था, जो राज्य में आने वाले सभी विदेशी व्यापारियों और मुगलों की गतिविधियों की जासूसी कर के सीधे छत्रपति को रिपोर्ट प्रस्तुत करता था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन और सुभाष चंद्र बोस द्वारा गठित 'आज़ाद हिंद फौज' (INA) के अंतर्संबंधों तथा ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान जब देश के शीर्ष कांग्रेस नेतृत्व को गिरफ्तार कर लिया गया था, तब भूमिगत प्रतिरोध (Underground Resistance) का संचालन करने वाले समाजवादी नेताओं (जैसे राम मनोहर लोहिया, अच्युत पटवर्धन और जयप्रकाश नारायण) ने रेडियो प्रसारण के माध्यम से आजाद हिंद फौज के संघर्ष को भारतीय जनता के लिए प्रेरणास्रोत के रूप में प्रस्तुत किया था। 2. सिंगापुर के पतन के उपरांत जापानी सेना द्वारा पकड़े गए भारतीय युद्धबंदियों (POWs) से मार्च 1942 में टोक्यो सम्मेलन के दौरान मोहन सिंह ने 'इंडियन नेशनल आर्मी' (INA) के गठन का औपचारिक प्रस्ताव रखा था, जिसे जापान की शाही सेना और रास बिहारी बोस का पूर्ण समर्थन प्राप्त हुआ। 3. सुभाष चंद्र बोस वर्ष 1943 में जर्मनी से जर्मन यू-बोट (यू-180) और जापानी पनडुब्बी की सहायता से अत्यंत खतरनाक समुद्री यात्रा करते हुए दक्षिण-पूर्व एशिया पहुँचे, जहाँ सिंगापुर में रास बिहारी बोस ने औपचारिक रूप से 'आजाद हिंद सरकार' (अर्जी हुकूमते आज़ाद हिंद) की सर्वोच्च बागडोर उन्हें सौंप दी। 4. आजाद हिंद फौज की 'रानी झांसी रेजिमेंट' का नेतृत्व कैप्टन लक्ष्मी सहगल (लक्ष्मी स्वामीनाथन) ने किया था, जो भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के इतिहास में किसी महिला सैन्य इकाई की पहली और एकमात्र कमांडर थीं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → मुगल काल में "खुलासत-उत-तवारीख" के लेखक कौन हैं? → महाभारत का फारसी अनुवाद "रज़्मनामा" किसके निर्देशन में किया गया था?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.