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मानव रक्त परिसंचरण तंत्र और प्लाज्मा प्रोटीन की जैव-रासायनिक भूमिका के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. रक्त प्लाज्मा में उपस्थित 'एल्ब्यूमिन' (Albumin) सबसे प्रचुर मात्रा में पाया जाने वाला प्लाज्मा प्रोटीन है, जिसका मुख्य कार्य रुधिर वाहिकाओं के भीतर कोलॉइड ऑस्मोटिक दाब (Colloid osmotic pressure या Oncotic pressure) को बनाए रखना है, ताकि ऊतकों में तरल पदार्थ के अत्यधिक संचय (Edema) को रोका जा सके।
- 2. 'ग्लोबुलिन' (Globulins) प्रोटीन के अंतर्गत आने वाले गामा-ग्लोबुलिन (Gamma globulins) मुख्य रूप से यकृत द्वारा संश्लेषित होते हैं और शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए 'एंटीबॉडी' (Immunoglobulins) के रूप में कार्य करते हैं।
- 3. रुधिर स्कंदन (Blood coagulation) में सहायक 'फाइब्रिनोजेन' (Fibrinogen) एक घुलनशील प्लाज्मा प्रोटीन है, जिसे थ्रॉम्बिन एंजाइम द्वारा अघुलनशील 'फाइब्रिन' में परिवर्तित किया जाता है।
- 4. रुधिर सीरम (Blood Serum) और प्लाज्मा में मुख्य अंतर यह है कि सीरम में फाइब्रिनोजेन और अन्य स्कंदन कारक अनुपस्थित होते हैं क्योंकि वे रक्त के थक्का बनने की प्रक्रिया के दौरान उपभोग कर लिए जाते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि एल्ब्यूमिन यकृत द्वारा निर्मित सबसे प्रमुख प्लाज्मा प्रोटीन है जो ऑन्कोटिक दाब को नियंत्रित करता है। कथन 2 गलत है क्योंकि सभी ग्लोबुलिन यकृत में संश्लेषित नहीं होते; विशेष रूप से 'गामा-ग्लोबुलिन' (एंटीबॉडीज) का संश्लेषण यकृत द्वारा नहीं, बल्कि प्लाज्मा कोशिकाओं (B-लम्फोसाइट्स) द्वारा किया जाता है। कथन 3 और 4 भी पूर्णतः सत्य हैं क्योंकि फाइब्रिनोजेन स्कंदन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और थक्का बनने के बाद शेष तरल को सीरम कहा जाता है जिसमें स्कंदन कारक नहीं होते। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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जीन विनिमय (Crossing over) और आनुवंशिक पुनर्संयोजन (Genetic recombination) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जीन विनिमय की प्रक्रिया समजात गुणसूत्रों (Homologous chromosomes) के गैर-सह-भ्रातृ अर्धगुणसूत्रों (Non-sister chromatids) के बीच अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis) की पैकाइटीन अवस्था में होती है।
2. आनुवंशिक मानचित्र (Genetic map) तैयार करते समय, दो सहलग्न जीनों के बीच पुनर्संयोजन आवृत्ति (Recombination frequency) उनके बीच की भौतिक दूरी के व्युत्क्रमानुपाती होती है।
3. सेक्स-लिंक्ड (Sex-linked) लक्षणों की वंशागति में, 'क्रिस-क्रॉस वंशागति' (Criss-cross inheritance) वह पैटर्न है जिसमें एक लक्षण पिता से उसकी पुत्री में और माता से उसके पुत्र में संचरित होता है।
4. बहुप्रभाविता (Pleiotropy) वह स्थिति है जिसमें एक अकेला जीन एक से अधिक भिन्न-भिन्न फेनोटाइपिक लक्षणों को नियंत्रित या प्रभावित करता है, जैसे कि मनुष्यों में सिकल सेल एनीमिया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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विलयन के अणुसंख्यक गुणधर्मों (Colligative properties) और रासायनिक अभिक्रियाओं में उत्प्रेरण (Catalysis) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी विलायक में अवाष्पशील विलेय मिलाने पर उसके वाष्प दाब में आपेक्षिक अवनमन (Relative lowering of vapour pressure) विलेय के मोल प्रभाज के बराबर होता है, और यह राउल्ट के नियम से प्राप्त होता है जो विलेय की प्रकृति पर निर्भर करता है।
2. समांगी उत्प्रेरण (Homogeneous catalysis) में उत्प्रेरक और अभिकारक एक ही भौतिक अवस्था (सामान्यतः द्रव या गैस) में होते हैं, जबकि विषमांगी उत्प्रेरण (Heterogeneous catalysis) में उत्प्रेरक ठोस अवस्था में होता है और अभिकारक गैस या द्रव अवस्था में होते हैं, जहाँ 'अधिघोषणा' या अधिशोषक की सतह पर अणुओं का अधिशोषणी सक्रियण मुख्य भूमिका निभाता है।
3. एन्जाइम उत्प्रेरण (Enzyme catalysis) अत्यधिक विशिष्ट और उच्च दक्षता वाले होते हैं, और इनकी कार्यप्रणाली 'ताला-कुंजी मॉडल' (Lock and Key model) या 'प्रेरित फिट मॉडल' (Induced fit model) द्वारा समझाई जाती है, जो तापमान और pH के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होते हैं।
4. वांट-हॉफ गुणांक ($i$) का मान उन विलेय पदार्थों के लिए 1 से कम होता है जो जलीय विलयन में पूरी तरह से वियोजित (Dissociate) हो जाते हैं, जैसे कि सोडियम क्लोराइड या पोटेशियम सल्फेट।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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अनुदैर्ध्य तरंगों (Longitudinal waves) और अनुप्रस्थ तरंगों (Transverse waves) की भौतिक प्रकृति तथा माध्यम में उनके संचरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अनुदैर्ध्य तरंगों में माध्यम के कणों का कंपन तरंग संचरण की दिशा के समानांतर होता है, जिसके कारण माध्यम में संपीड़न (Compressions) और विरलन (Rarefactions) क्षेत्रों का निर्माण होता है, और यह तरंगें ठोस, द्रव तथा गैस तीनों माध्यमों में संचरित हो सकती हैं।
2. अनुप्रस्थ तरंगों में माध्यम के कण तरंग संचरण की दिशा के लंबवत कंपन करते हैं, जिससे श्रृंग (Crests) और गर्त (Troughs) बनते हैं, और यह तरंगें केवल ठोस तथा द्रवों की सतह पर ही उत्पन्न की जा सकती हैं क्योंकि गैसों में इनके संचरण के लिए आवश्यक अपरूपण प्रत्यास्थता (Shear elasticity) का अभाव होता है।
3. किसी गैस में ध्वनि तरंगों की चाल लाप्लास के संशोधन के अनुसार केवल गैस के दाब और घनत्व पर निर्भर करती है, जिसके अंतर्गत न्यूटन के इस isothermal (समतापीय) परिकल्पना को संशोधित किया गया कि ध्वनि का संचरण एक रुद्धोष्म (Adiabatic) प्रक्रिया है।
4. डॉप्लर प्रभाव (Doppler effect) के अनुसार, यदि ध्वनि स्रोत और श्रोता के बीच की दूरी कम हो रही है, तो श्रोता द्वारा सुनी गई ध्वनि की आभासी आवृत्ति वास्तविक आवृत्ति से कम प्रतीत होती है, चाहे गति स्रोत की हो या श्रोता की।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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यूकेरियोटिक कोशिकाओं में पाए जाने वाले कोशिका अंगों (Cell organelles) और उनके कार्यों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. माइटोकॉन्ड्रिया की आंतरिक झिल्ली पर 'क्रिस्टी' (Cristae) नामक उंगली जैसी संरचनाएँ होती हैं, जिन पर 'ऑक्सिसोम' (Oxysomes या $F_0-F_1$ कण) स्थित होते हैं, जो एटीपी ($ATP$) संश्लेषण के लिए ऑक्सीडेटिव फॉस्फोरिलीकरण को उत्प्रेरित करते हैं।
2. खुरदरे अंतःप्रद्रव्यी जालिका (Rough Endoplasmic Reticulum) की सतह पर राइबोसोम जुड़े होते हैं, जो मुख्य रूप से लिपिड संश्लेषण और स्टेरॉयड हॉर्मोन्स के उपापचय में प्रमुख भूमिका निभाते हैं।
3. गॉल्जीकाय (Golgi apparatus) में 'सिस' (Cis) सिस्टर्नी जो केंद्रक की ओर होती है, परिपक्वकारी (Maturing) या 'ट्रांस' (Trans) सिस्टर्नी से भिन्न होती है, और यह ग्लाइकोसिलेशन (Glycosylation) के माध्यम से प्रोटीन और लिपिड के रूपांतरण का मुख्य केंद्र है।
4. लाइसोसोम (Lysosomes) एकल झिल्ली से घिरे ऐसे थैलेनुमा अंगक हैं जिनमें अम्लीय हाइड्रोलैस (Hydrolytic enzymes) प्रचुर मात्रा में होते हैं, जो pH लगभग 5 पर सबसे अधिक सक्रिय होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के तंत्र और पादप हार्मोन्स की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और इनमें मुख्य पादप शरीर गेमेटोफाइट (युग्मकोद्भिद्) होता है जो बीजाणुद्भिद (स्पोरोफाइट) पर पोषण के लिए आंशिक रूप से निर्भर रहता है।
2. C3 पौधों की तुलना में C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर नगण्य होती है, जिसका मुख्य कारण यह है कि उनमें रुबिको (RuBisCO) एंजाइम बंडल शीथ कोशिकाओं में उच्च सांद्रता में पाया जाता है जहाँ कार्बन डाइऑक्साइड का सांद्रण मैलिक अम्ल के डीकार्बोक्सिलेशन द्वारा बढ़ जाता है।
3. ऑक्सिन (जैसे IAA) त्रेपोट्रॉपिज्म और फोटोट्रॉपिज्म की क्रियाओं को नियंत्रित करता है, जहाँ प्रकाश के विपरीत दिशा में ऑक्सिन का पार्श्व वितरण अधिक हो जाने के कारण त्रेपोट्रॉपिक वक्रता उत्पन्न होती है, जिसे डार्विन और उनके पुत्र द्वारा कैनरी ग्रास के कोलियोप्टाइल पर किए गए प्रयोगों से समझा गया था।
4. जिबरेलिन (Gibberellin) आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में internode (पर्वान्तर) के दीर्घीकरण को प्रेरित करके उनकी लंबाई बढ़ाते हैं, और ये बीज अंकुरण के दौरान एल्यूरोन परत पर प्रभाव डालकर अल्फा-एमाइलेज जैसे हाइड्रोलिटिक एंजाइमों के संश्लेषण को उत्प्रेरित करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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कोशिका का ऊर्जा गृह किसे कहा जाता है?
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