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जीन विनिमय (Crossing over) और आनुवंशिक पुनर्संयोजन (Genetic recombination) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. जीन विनिमय की प्रक्रिया समजात गुणसूत्रों (Homologous chromosomes) के गैर-सह-भ्रातृ अर्धगुणसूत्रों (Non-sister chromatids) के बीच अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis) की पैकाइटीन अवस्था में होती है।
- 2. आनुवंशिक मानचित्र (Genetic map) तैयार करते समय, दो सहलग्न जीनों के बीच पुनर्संयोजन आवृत्ति (Recombination frequency) उनके बीच की भौतिक दूरी के व्युत्क्रमानुपाती होती है।
- 3. सेक्स-लिंक्ड (Sex-linked) लक्षणों की वंशागति में, 'क्रिस-क्रॉस वंशागति' (Criss-cross inheritance) वह पैटर्न है जिसमें एक लक्षण पिता से उसकी पुत्री में और माता से उसके पुत्र में संचरित होता है।
- 4. बहुप्रभाविता (Pleiotropy) वह स्थिति है जिसमें एक अकेला जीन एक से अधिक भिन्न-भिन्न फेनोटाइपिक लक्षणों को नियंत्रित या प्रभावित करता है, जैसे कि मनुष्यों में सिकल सेल एनीमिया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि जीन विनिमय अर्धसूत्री विभाजन-I की पैकाइटीन (Pachytene) अवस्था के दौरान समजात गुणसूत्रों के नॉन-सिस्टर क्रोमैटिड्स के बीच खंडों के आदान-प्रदान से होता है। कथन 2 गलत है क्योंकि पुनर्संयोजन आवृत्ति दो जीनों के बीच की दूरी के **समानुपाती** (Directly proportional) होती है, न कि व्युत्क्रमानुपाती; अर्थात जितनी अधिक दूरी होगी, पुनर्संयोजन की संभावना उतनी ही अधिक होगी। कथन 3 सही है, 'क्रिस-क्रॉस वंशागति' के अंतर्गत एक्स-सलिंक्ड लक्षण पिता से अपनी पुत्रियों (कैैरियर के रूप में) और माता से अपने पुत्रों में स्थानांतरित होते हैं। कथन 4 सही है, बहुप्रभाविता (Pleiotropy) में एक ही जीन कई लक्षणों को प्रभावित करता है। आनुवंशिकी के विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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जीन उत्परिवर्तन (Gene Mutation) और आनुवंशिक कूट (Genetic Code) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बिंदु उत्परिवर्तन (Point mutation) के अंतर्गत 'मिससेंस उत्परिवर्तन' (Missense mutation) वह स्थिति है जिसमें न्यूक्लियोटाइड के प्रतिस्थापन के कारण कूट एक ऐसे एमीनो अम्ल के लिए कोडित हो जाता है जो भिन्न होता है, जबकि 'नॉनसेंस उत्परिवर्तन' (Nonsense mutation) के परिणामस्वरूप एक समय से पहले 'स्टॉप कोडॉन' (Stop codon) का निर्माण हो जाता है।
2. आनुवंशिक कूट 'अपह्रसित' (Degenerate) होता है, जिसका अर्थ है कि एक से अधिक कोडॉन एक ही एमीनो अम्ल के लिए कोडित कर सकते हैं, किंतु यह 'अस्पष्ट' (Ambiguous) भी होता है क्योंकि एक ही कोडॉन एक से अधिक भिन्न एमीनो अम्ल के लिए निर्दिष्ट हो सकता है।
3. फ्रेमशिफ्ट उत्परिवर्तन (Frameshift mutation) तब होता है जब डीएनए अनुक्रम में एक या दो न्यूक्लियोटाइडों का विलोपन (Deletion) या प्रवेशन (Insertion) होता है, जिससे विलोपन या प्रवेशन बिंदु के आगे का पूरा पठन फ्रेम (Reading frame) बदल जाता है।
4. सिकल सेल एनीमिया (Sickle cell anemia) हीमोग्लोबिन की बीटा-ग्लोबिन श्रृंखला के छठे पोजीशन पर ग्लूटामाइन के वैलीन द्वारा प्रतिस्थापन के कारण होता है, जो 'प्वाइंट म्यूटेशन' (बिंदु उत्परिवर्तन) का एक क्लासिक उदाहरण है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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जीन नियमन (Gene regulation) और ओपेरान मॉडल (Operon model) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जैकब और मोनोड (Jacob and Monod) द्वारा प्रतिपादित 'लैस ओपेरान' (Lac operon) एक ऋणात्मक रूप से विनियमित प्रतिपीडीय (Inducible) प्रणाली का उदाहरण है, जिसमें लैक्टोज की अनुपस्थिति में दमनकारी प्रोटीन (Repressor protein) ऑपरेटर जीन से जुड़कर संरचनात्मक जीनों के अनुलेखन को रोकता है।
2. लैस ओपेरान में 'अल्लैक्टोज' (Allolactose) एक प्रेरक (Inducer) के रूप में कार्य करता है जो दमनकारी प्रोटीन से बंधकर उसके आकार को बदल देता है, जिससे वह ऑपरेटर जीन से अलग हो जाता है और अनुलेखन प्रक्रिया शुरू हो जाती है।
3. 'ट्रिप ओपेरान' (Trp operon) एक दमनकारी (Repressible) प्रणाली का उदाहरण है, जिसमें ट्रिप्टोफैन की उच्च सांद्रता सह-दमनकारी (Co-repressor) के रूप में कार्य करती है और दमनकारी प्रोटीन को सक्रिय करके ऑपरेटर से जोड़ती है, जिससे अनुलेखन रुक जाता है।
4. यूकेरियोटिक कोशिकाओं में जीन अभिव्यक्ति का नियमन केवल अनुलेखन स्तर (Transcription level) पर ही होता है, और इसमें क्रोमैटिन पुनर्रूपण (Chromatin remodeling) या हिस्टोन एसिटिलीकरण की कोई भूमिका नहीं होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मानव रक्त परिसंचरण तंत्र और प्लाज्मा प्रोटीन की जैव-रासायनिक भूमिका के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. रक्त प्लाज्मा में उपस्थित 'एल्ब्यूमिन' (Albumin) सबसे प्रचुर मात्रा में पाया जाने वाला प्लाज्मा प्रोटीन है, जिसका मुख्य कार्य रुधिर वाहिकाओं के भीतर कोलॉइड ऑस्मोटिक दाब (Colloid osmotic pressure या Oncotic pressure) को बनाए रखना है, ताकि ऊतकों में तरल पदार्थ के अत्यधिक संचय (Edema) को रोका जा सके।
2. 'ग्लोबुलिन' (Globulins) प्रोटीन के अंतर्गत आने वाले गामा-ग्लोबुलिन (Gamma globulins) मुख्य रूप से यकृत द्वारा संश्लेषित होते हैं और शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए 'एंटीबॉडी' (Immunoglobulins) के रूप में कार्य करते हैं।
3. रुधिर स्कंदन (Blood coagulation) में सहायक 'फाइब्रिनोजेन' (Fibrinogen) एक घुलनशील प्लाज्मा प्रोटीन है, जिसे थ्रॉम्बिन एंजाइम द्वारा अघुलनशील 'फाइब्रिन' में परिवर्तित किया जाता है।
4. रुधिर सीरम (Blood Serum) और प्लाज्मा में मुख्य अंतर यह है कि सीरम में फाइब्रिनोजेन और अन्य स्कंदन कारक अनुपस्थित होते हैं क्योंकि वे रक्त के थक्का बनने की प्रक्रिया के दौरान उपभोग कर लिए जाते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मानव रक्त परिसंचरण तंत्र और रक्त समूहों की जटिल जैव-रासायनिक संरचना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लाल रक्त कोशिकाओं (RBCs) की सतह पर पाए जाने वाले ABO रक्त समूह के प्रतिजन (Antigens) सीधे प्रोटीन के रूप में संश्लेषित नहीं होते हैं, बल्कि यह ओलिगोसैक्राइड श्रृंखलाएँ होती हैं जिनका निर्माण ग्लाइकोसिलट्रांसफेरेज एंजाइमों द्वारा एक पूर्ववर्ती 'H-एंटीजन' पर शर्करा इकाइयों के जुड़ने से होता है।
2. 'बॉम्बे रक्त समूह' ($O_h$ फिनोटाइप) वाले व्यक्तियों में FUT1 जीन के उत्परिवर्तन के कारण H-एंटीजन का पूर्णतः अभाव होता है, जिसके परिणामस्वरूप उनके प्लाज्मा में एंटी-A और एंटी-B एंटीबॉडी के साथ-साथ एक विशिष्ट 'एंटी-H' एंटीबॉडी भी उपस्थित होती है, जो उन्हें किसी भी सामान्य ABO रक्त समूह (जैसे O, A, B, AB) से रक्त प्राप्त करने से रोकती है।
3. Rh-असंगतता (Erythroblastosis fetalis) की स्थिति में, प्रथम गर्भधारण के दौरान माँ के शरीर में बनने वाली प्रारंभिक एंटी-Rh एंटीबॉडी मुख्य रूप से उच्च आणविक भार वाली $IgM$ प्रकार की होती हैं, जो प्लेसेंटा को आसानी से पार कर लेती हैं और प्रथम Rh-धनात्मक शिशु को गंभीर रूप से प्रभावित करती हैं।
4. रुधिर स्कंदन (Blood Coagulation) की आंतरिक प्रणाली (Intrinsic pathway) की शुरुआत तब होती है जब रक्त वाहिका के उपकला आवरण की क्षति के बाद संपर्क कारकों (Contact factors) जैसे कि फैक्टर XII और प्रीकैलिक्रिन की सक्रियता होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के तंत्र और पादप हार्मोन्स की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और इनमें मुख्य पादप शरीर गेमेटोफाइट (युग्मकोद्भिद्) होता है जो बीजाणुद्भिद (स्पोरोफाइट) पर पोषण के लिए आंशिक रूप से निर्भर रहता है।
2. C3 पौधों की तुलना में C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर नगण्य होती है, जिसका मुख्य कारण यह है कि उनमें रुबिको (RuBisCO) एंजाइम बंडल शीथ कोशिकाओं में उच्च सांद्रता में पाया जाता है जहाँ कार्बन डाइऑक्साइड का सांद्रण मैलिक अम्ल के डीकार्बोक्सिलेशन द्वारा बढ़ जाता है।
3. ऑक्सिन (जैसे IAA) त्रेपोट्रॉपिज्म और फोटोट्रॉपिज्म की क्रियाओं को नियंत्रित करता है, जहाँ प्रकाश के विपरीत दिशा में ऑक्सिन का पार्श्व वितरण अधिक हो जाने के कारण त्रेपोट्रॉपिक वक्रता उत्पन्न होती है, जिसे डार्विन और उनके पुत्र द्वारा कैनरी ग्रास के कोलियोप्टाइल पर किए गए प्रयोगों से समझा गया था।
4. जिबरेलिन (Gibberellin) आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में internode (पर्वान्तर) के दीर्घीकरण को प्रेरित करके उनकी लंबाई बढ़ाते हैं, और ये बीज अंकुरण के दौरान एल्यूरोन परत पर प्रभाव डालकर अल्फा-एमाइलेज जैसे हाइड्रोलिटिक एंजाइमों के संश्लेषण को उत्प्रेरित करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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कोशिका का ऊर्जा गृह किसे कहा जाता है?
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