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परमाणु भौतिकी और क्वांटम यांत्रिकी के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. डी ब्रॉग्ली (de Broglie) की परिकल्पना के अनुसार, प्रत्येक गतिमान द्रव्य कण (जैसे इलेक्ट्रॉन) के साथ एक तरंग जुड़ी होती है, जिसकी तरंगदैर्ध्य कण के संवेग के व्युत्क्रमानुपाती होती है, और यह अवधारणा सूक्ष्म कणों की तरंग-कण द्वैतता (Wave-Particle Duality) को स्पष्ट करती है।
- 2. हाइजेनबर्ग के अनिश्चितता सिद्धांत (Uncertainty Principle) के अनुसार, किसी सूक्ष्म कण की स्थिति और उसके संवेग का एक साथ यथार्थ निर्धारण करना असंभव है, और उनके अनिश्चितताओं का गुणनफल प्लांक नियतांक के आधे ($\hbar/2$) से कम या उसके बराबर होता है।
- 3. रेडियोएक्टिव क्षय के दौरान उत्सर्जित होने वाली 'गामा किरणें' (Gamma rays) उच्च आवृत्ति वाले विद्युत चुम्बकीय विकिरण हैं, जो नाभिक के ऊर्जा स्तरों में परिवर्तन के फलस्वरूप उत्पन्न होती हैं, और इन पर कोई आवेश या द्रव्यमान नहीं होता है।
- 4. परमाणु रिएक्टर में मंदक (Moderator) के रूप में प्रयुक्त होने वाला 'भारी जल' ($D_2O$) या ग्रेफाइट तीव्रगामी न्यूट्रॉनों की गति को धीमा कर देते हैं ताकि वे यूरेनियम-235 के साथ प्रभावी रूप से विखंडन श्रृंखला अभिक्रिया जारी रख सकें।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि डी ब्रॉग्ली परिकल्पना के अनुसार द्रव्य तरंगों की तरंगदैर्ध्य $\lambda = h/p$ होती है, जो संवेग के व्युत्क्रमानुपाती है। कथन 2 गलत है क्योंकि हाइजेनबर्ग के अनिश्चितता सिद्धांत के अनुसार स्थिति और संवेग की अनिश्चितताओं का गुणनफल प्लांक केReduced Planck constant के आधे से अधिक या उसके बराबर होता है, यानी $\Delta x \cdot \Delta p \ge \hbar/2$, न कि 'कम या उसके बराबर'। कथन 3 सही है क्योंकि गामा किरणें विद्युत चुंबकीय तरंगें हैं जिनका आवेश और द्रव्यमान शून्य होता है और ये नाभिकीय संक्रमण से निकलती हैं। विकिपीडिया संदर्भ। कथन 4 सही है क्योंकि नाभिकीय रिएक्टरों में विखंडन से उत्पन्न तीव्र न्यूट्रॉनों को धीमा करने के लिए भारी जल या ग्रेफाइट को मंदक के रूप में प्रयोग किया जाता है।
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प्रकाशिकी (Optics) और लेंस-दर्पण के व्यवहार के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर…
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आनुवंशिकी और जैव विकास के सिद्धांतों के संदर्भ में…
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कार्बनिक रसायन में हाइड्रोकार्बन और ईंधन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. एल्केन्स (Alkanes) संतृप्त हाइड्रोकार्बन होते हैं जिनमें सभी कार्बन-कार्बन बंध एकल सहसंयोजक बंध होते हैं, और इनका सामान्य सूत्र $C_nH_{2n+2}$ होता है, जबकि एल्कीन्स और एल्काइन्स असंतृप्त हाइड्रोकार्बन की श्रेणी में आते हैं।
2. 'ऑक्टेन संख्या' (Octane Number) डीजल इंजनों में प्रयुक्त ईंधनों की टर्बुलेंट दहन क्षमता और उनके प्रस्फोटन (Knocking) प्रतिरोध का माप है, जिसमें उच्च ऑक्टेन ईंधन कम प्रस्फोटन उत्पन्न करता है।
3. द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) मुख्य रूप से प्रोपेन और ब्यूटेन का मिश्रण होती है, और सुरक्षा की दृष्टि से इसमें जो तीव्र गंधयुक्त पदार्थ मिलाया जाता है, वह एथिल मर्कैप्टेन ($C_2H_5SH$) होता है।
4. पेट्रोल की गुणवत्ता को सुधारने और उसके अपस्फोटन (Knocking) को रोकने के लिए अतीत में 'टेट्राएथिल लेड' (TEL) का उपयोग एंटी-नॉक एजेंट के रूप में किया जाता था, जो पर्यावरण और स्वास्थ्य पर इसके विषैلے प्रभावों के कारण अब प्रतिबंधित है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण और पादप हार्मोन्स के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' (Amphibians) कहा जाता है क्योंकि ये स्थल पर जीवित रह सकते हैं, किंतु इन्हें लैंगिक जनन के लिए जल की अनिवार्य आवश्यकता होती है, और इनका मुख्य पादप शरीर युग्मकोद्भिद (Gametophyte) होता है।
2. प्रकाश संश्लेषण के दौरान प्रकाश अभिक्रिया (Light Reaction) हरित लवक के स्ट्रोमा (Stroma) में संपन्न होती है, जिसमें एटीपी (ATP) और एनएडीपीएच (NADPH) का निर्माण होता है, जिनका उपयोग बाद में अंधकार अभिक्रिया के लिए किया जाता है।
3. जिब्रेलिन (Gibberellin) पादप हार्मोन आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में तने की लंबाई में अत्यधिक वृद्धि (Internode elongation) को प्रेरित करता है तथा बीजों की प्रसुप्ति (Dormancy) को तोड़कर अंकुरण को बढ़ावा देता है।
4. C4 पादप उच्च तापमान और तीव्र प्रकाश तीव्रता में C3 पादपों की तुलना में अधिक कुशल होते हैं क्योंकि उनमें क्रेंज शारीरिक संरचना (Kranz anatomy) पाई जाती है, जिसके कारण उनमें प्रकाश श्वसन (Photorespiration) नगण्य होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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रासायनिक बंधन और अम्ल-क्षार तथा लवणों के वैचारिक सिद्धांतों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आयनिक क्रिस्टल में धनायन और ऋणायन के बीच स्थिरवैद्युत आकर्षण बल (Coulombic force) बहुत प्रबल होते हैं, जिससे ये ठोस अवस्था में विद्युत के कुचालक होते हैं, किंतु गलित अवस्था या जलीय विलयन में आने पर मुक्त आयनों की उपस्थिति के कारण विद्युत का सुचालक बन जाते हैं।
2. लुईस अम्ल वे रासायनिक स्पीशीज होती हैं जो इलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण करने की प्रवृत्ति रखती हैं (जैसे $BF_3$ और $AlCl_3$), जबकि लुईस क्षार इलेक्ट्रॉन युग्म दान करते हैं।
3. दुर्बल अम्ल और प्रबल क्षार के उदासीनीकरण से बने लवण (जैसे सोडियम एसीटेट) का जलीय विलयन जल-अपघटन के कारण क्षारीय प्रकृति प्रदर्शित करता है, जिससे विलयन का pH मान 7 से अधिक हो जाता है।
4. आर्हेनियस सिद्धांत के अनुसार, अम्ल वे पदार्थ हैं जो जलीय विलयन में विघटित होकर हाइड्रोनियम आयन ($H_3O^+$) उत्पन्न करते हैं, और यह सिद्धांत केवल जलीय माध्यम तक ही सीमित है तथा गैसीय अवस्था या अजलीय विलायकों पर लागू नहीं होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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धातुओं, अधातुओं और उनके प्रमुख यौगिकों के रासायनिक तथा भौतिक गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सोडियम और पोटेशियम जैसी क्षार धातुएँ इतनी नरम होती हैं कि इन्हें चाकू से काटा जा सकता है, और इनका घनत्व इतना कम होता है कि ये जल पर तैर सकती हैं, तथा ये जल के साथ तीव्र ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस मुक्त करती हैं।
2. ऐल्युमिनियम अपनी उच्च अभिक्रियाशीलता के बावजूद वायु में संक्षारित नहीं होता है, क्योंकि इसकी सतह पर ऑक्सीजन के साथ क्रिया करके ऐल्युमिनियम ऑक्साइड ($Al_2O_3$) की एक निष्क्रिय और स्थिर परत बन जाती है, जिसे 'ऐनोडाइज़िंग' प्रक्रिया द्वारा और अधिक मोटा किया जाता है।
3. 'एक्वा रेजिया' (Aqua Regia) सांद्र हाइड्रोक्लोरिक अम्ल और सांद्र नाइट्रिक अम्ल का 1:3 के आयतन अनुपात में ताजा तैयार मिश्रण होता है, जो स्वर्ण और प्लैटिनम जैसी उत्कृष्ट धातुओं को भी घोलने की क्षमता रखता है।
4. सफेद फॉस्फोरस (White Phosphorus) एक अत्यधिक प्रतिक्रियाशील, विषैला और दीप्तिकारी (Phosphorescent) अधातु है, जो हवा के संपर्क में आने पर स्वतः प्रज्वलित हो जाता है, इसलिए इसे जल के नीचे सुरक्षित रखा जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के तंत्र और पादप हार्मोन्स की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और इनमें मुख्य पादप शरीर गेमेटोफाइट (युग्मकोद्भिद्) होता है जो बीजाणुद्भिद (स्पोरोफाइट) पर पोषण के लिए आंशिक रूप से निर्भर रहता है।
2. C3 पौधों की तुलना में C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर नगण्य होती है, जिसका मुख्य कारण यह है कि उनमें रुबिको (RuBisCO) एंजाइम बंडल शीथ कोशिकाओं में उच्च सांद्रता में पाया जाता है जहाँ कार्बन डाइऑक्साइड का सांद्रण मैलिक अम्ल के डीकार्बोक्सिलेशन द्वारा बढ़ जाता है।
3. ऑक्सिन (जैसे IAA) त्रेपोट्रॉपिज्म और फोटोट्रॉपिज्म की क्रियाओं को नियंत्रित करता है, जहाँ प्रकाश के विपरीत दिशा में ऑक्सिन का पार्श्व वितरण अधिक हो जाने के कारण त्रेपोट्रॉपिक वक्रता उत्पन्न होती है, जिसे डार्विन और उनके पुत्र द्वारा कैनरी ग्रास के कोलियोप्टाइल पर किए गए प्रयोगों से समझा गया था।
4. जिबरेलिन (Gibberellin) आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में internode (पर्वान्तर) के दीर्घीकरण को प्रेरित करके उनकी लंबाई बढ़ाते हैं, और ये बीज अंकुरण के दौरान एल्यूरोन परत पर प्रभाव डालकर अल्फा-एमाइलेज जैसे हाइड्रोलिटिक एंजाइमों के संश्लेषण को उत्प्रेरित करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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कोशिका का ऊर्जा गृह किसे कहा जाता है?
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