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पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण और पादप हार्मोन्स के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' (Amphibians) कहा जाता है क्योंकि ये स्थल पर जीवित रह सकते हैं, किंतु इन्हें लैंगिक जनन के लिए जल की अनिवार्य आवश्यकता होती है, और इनका मुख्य पादप शरीर युग्मकोद्भिद (Gametophyte) होता है।
- 2. प्रकाश संश्लेषण के दौरान प्रकाश अभिक्रिया (Light Reaction) हरित लवक के स्ट्रोमा (Stroma) में संपन्न होती है, जिसमें एटीपी (ATP) और एनएडीपीएच (NADPH) का निर्माण होता है, जिनका उपयोग बाद में अंधकार अभिक्रिया के लिए किया जाता है।
- 3. जिब्रेलिन (Gibberellin) पादप हार्मोन आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में तने की लंबाई में अत्यधिक वृद्धि (Internode elongation) को प्रेरित करता है तथा बीजों की प्रसुप्ति (Dormancy) को तोड़कर अंकुरण को बढ़ावा देता है।
- 4. C4 पादप उच्च तापमान और तीव्र प्रकाश तीव्रता में C3 पादपों की तुलना में अधिक कुशल होते हैं क्योंकि उनमें क्रेंज शारीरिक संरचना (Kranz anatomy) पाई जाती है, जिसके कारण उनमें प्रकाश श्वसन (Photorespiration) नगण्य होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि ब्रायोफाइट्स को पादप जगत के उभयचर कहा जाता है; इन्हें निषेचन के लिए जल की आवश्यकता होती है और इनका प्रभावी पादप शरीर युग्मकोद्भिद होता है। कथन 2 गलत है क्योंकि प्रकाश संश्लेषण की प्रकाश अभिक्रिया हरित लवक के थैलाकोइड (Thylakoid / Grana) में होती है, न कि स्ट्रोमा में (स्ट्रोमा में केल्विन चक्र या अंधकार अभिक्रिया होती है)। कथन 3 सही है क्योंकि जिब्रेलिन पर्वसंधियों (internodes) के दीर्घीकरण और बीजों की प्रसुप्ति को तोड़ने के लिए उत्तरदायी प्रमुख हार्मोन है। कथन 4 सही है क्योंकि C4 पौधों में क्रेंज शारीरिकी (Kranz Anatomy) पाई जाती है जो प्रकाश श्वसन को न्यूनतम करती है।
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Related Questions
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मानव रक्त परिसंचरण तंत्र और रक्त समूहों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. रक्त समूह 'O' वाले व्यक्तियों की लाल रक्त कणिकाओं (RBC) की सतह पर एंटीजन A और B दोनों अनुपस्थित होते हैं, इसलिए इन्हें 'सर्वदाता' (Universal Donor) माना जाता है, किंतु ये केवल 'O' रक्त समूह के व्यक्तियों से ही रक्त प्राप्त कर सकते हैं।
2. 'बॉम्बे रक्त समूह' (Bombay Blood Group) सबसे दुर्लभ रक्त समूहों में से एक है, जिसमें व्यक्ति की RBC पर 'H' एंटीजन भी अनुपस्थित होता है क्योंकि उनमें FUT1 जीन उत्परिवर्तित होता है, और ऐसे रोगी को केवल बॉम्बे फेनोटाइप वाले व्यक्ति से ही रक्त दिया जा सकता है।
3. एरिथ्रोब्लास्टोसिस फेटलिस (Erythroblastosis Fetalis) की स्थिति तब उत्पन्न होती है जब Rh-धनात्मक पिता और Rh-ऋणात्मक माता की प्रथम संतान Rh-धनात्मक होती है, जिससे प्रथम गर्भावस्था में ही गंभीर हीमोलिटिक एनीमिया हो जाता है।
4. शिराओं (Veins) में रक्त का प्रवाह हृदय की ओर होता है और इनमें उच्च दाब पर रक्त प्रवाहित होता है, इसलिए इनकी दीवारें धमनियों की तुलना में अत्यधिक मोटी, पेशीय और कपाटहीन (Valve-less) होती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मानव रक्त परिसंचरण तंत्र और रक्त समूहों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. एरिथ्रोब्लास्टोसिस फेटलिस (Erythroblastosis Fetalis) की समस्या तब उत्पन्न होती है जब Rh-ऋणात्मक माता और Rh-धनात्मक पिता की द्वितीय या उसके बाद की संतान Rh-धनात्मक होती है, क्योंकि प्रथम गर्भावस्था के दौरान माँ के शरीर में बने Rh एंटीबॉडीज भ्रूण की लाल रक्त कणिकाओं को नष्ट करने लगते हैं।
2. रुधिर स्कंदन (Blood Coagulation) की प्रक्रिया में, प्रोथ्रोम्बिन को थ्रोम्बिन में बदलने के लिए थ्रोम्बोप्लास्टिन और कैल्शियम आयनों ($Ca^{2+}$) की उपस्थिति अनिवार्य होती है, तथा फाइब्रिनोजेन एक अघुलनशील प्रोटीन है जो सीधे रक्त का थक्का जमाता है बिना किसी एंजाइमी रूपांतरण के।
3. रुधिर वर्ग 'AB' वाले व्यक्तियों की प्लाज्मा में एंटी-A और एंटी-B दोनों प्राकृतिक एंटीबॉडी (Agglutinins) अनुपस्थित होते हैं, जिसके कारण ये किसी भी वर्ग से रक्त प्राप्त कर सकते हैं और इन्हें 'सर्वग्राही' (Universal Recipient) कहा जाता है।
4. मानव हृदय का पेसमेकर साइनोएट्रियल नोड (SAN) कहलाता है, जो दाहिने आलिंद के ऊपरी दाहिने कोने पर स्थित होता है और यह स्वतः उत्तेजना उत्पन्न करने की क्षमता रखता है, जिससे हृदय की संकुचन तरंगें प्रारंभ होती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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प्रकाशिकी (Optics) और लेंस-दर्पण के व्यवहार के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जब किसी उत्तल लेंस को ऐसे द्रव में डुबोया जाता है जिसका अपवर्तनांक लेंस के पदार्थ के अपवर्तनांक से अधिक होता है, तो लेंस की फोकस दूरी ऋणात्मक हो जाती है और वह अभिसारी (Converging) लेंस के बजाय अपसारी (Diverging) लेंस की तरह व्यवहार करने लगता है。
2. गोलीय दर्पण की फोकस दूरी ($f$) और उसकी वक्रता त्रिज्या ($R$) के बीच का संबंध $R = 2f$ होता है, और यह संबंध इस बात पर निर्भर करता है कि दर्पण हवा में रखा है या किसी अन्य सघन माध्यम में डूबा हुआ है。
3. पूर्ण आंतरिक परावर्तन (Total Internal Reflection) की परिघटना के लिए प्रकाश किरण का सघन माध्यम से विरल माध्यम में जाना अनिवार्य है, तथा आपतन कोण का मान उस युग्म के लिए क्रांतिक कोण (Critical Angle) से अधिक होना चाहिए。
4. एक संयुक्त सूक्ष्मदर्शी (Compound Microscope) की आवर्धन क्षमता को बढ़ाने के लिए अभिदृश्यक (Objective) लेंस और नेत्रलिका (Eyepiece) दोनों की फोकस दूरी बहुत अधिक होनी चाहिए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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परमाणु भौतिकी और क्वांटम यांत्रिकी के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. डी ब्रॉग्ली (de Broglie) की परिकल्पना के अनुसार, प्रत्येक गतिमान द्रव्य कण (जैसे इलेक्ट्रॉन) के साथ एक तरंग जुड़ी होती है, जिसकी तरंगदैर्ध्य कण के संवेग के व्युत्क्रमानुपाती होती है, और यह अवधारणा सूक्ष्म कणों की तरंग-कण द्वैतता (Wave-Particle Duality) को स्पष्ट करती है।
2. हाइजेनबर्ग के अनिश्चितता सिद्धांत (Uncertainty Principle) के अनुसार, किसी सूक्ष्म कण की स्थिति और उसके संवेग का एक साथ यथार्थ निर्धारण करना असंभव है, और उनके अनिश्चितताओं का गुणनफल प्लांक नियतांक के आधे ($\hbar/2$) से कम या उसके बराबर होता है।
3. रेडियोएक्टिव क्षय के दौरान उत्सर्जित होने वाली 'गामा किरणें' (Gamma rays) उच्च आवृत्ति वाले विद्युत चुम्बकीय विकिरण हैं, जो नाभिक के ऊर्जा स्तरों में परिवर्तन के फलस्वरूप उत्पन्न होती हैं, और इन पर कोई आवेश या द्रव्यमान नहीं होता है।
4. परमाणु रिएक्टर में मंदक (Moderator) के रूप में प्रयुक्त होने वाला 'भारी जल' ($D_2O$) या ग्रेफाइट तीव्रगामी न्यूट्रॉनों की गति को धीमा कर देते हैं ताकि वे यूरेनियम-235 के साथ प्रभावी रूप से विखंडन श्रृंखला अभिक्रिया जारी रख सकें।
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पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के तंत्र और पादप हार्मोन्स की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और इनमें मुख्य पादप शरीर गेमेटोफाइट (युग्मकोद्भिद्) होता है जो बीजाणुद्भिद (स्पोरोफाइट) पर पोषण के लिए आंशिक रूप से निर्भर रहता है।
2. C3 पौधों की तुलना में C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर नगण्य होती है, जिसका मुख्य कारण यह है कि उनमें रुबिको (RuBisCO) एंजाइम बंडल शीथ कोशिकाओं में उच्च सांद्रता में पाया जाता है जहाँ कार्बन डाइऑक्साइड का सांद्रण मैलिक अम्ल के डीकार्बोक्सिलेशन द्वारा बढ़ जाता है।
3. ऑक्सिन (जैसे IAA) त्रेपोट्रॉपिज्म और फोटोट्रॉपिज्म की क्रियाओं को नियंत्रित करता है, जहाँ प्रकाश के विपरीत दिशा में ऑक्सिन का पार्श्व वितरण अधिक हो जाने के कारण त्रेपोट्रॉपिक वक्रता उत्पन्न होती है, जिसे डार्विन और उनके पुत्र द्वारा कैनरी ग्रास के कोलियोप्टाइल पर किए गए प्रयोगों से समझा गया था।
4. जिबरेलिन (Gibberellin) आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में internode (पर्वान्तर) के दीर्घीकरण को प्रेरित करके उनकी लंबाई बढ़ाते हैं, और ये बीज अंकुरण के दौरान एल्यूरोन परत पर प्रभाव डालकर अल्फा-एमाइलेज जैसे हाइड्रोलिटिक एंजाइमों के संश्लेषण को उत्प्रेरित करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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कोशिका का ऊर्जा गृह किसे कहा जाता है?
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