BaalVikas
Menu
General Science
Asked 6 hours ago · Viewed 0 times

आधुनिक आवर्त सारणी और तत्वों के आवर्ती गुणों (Periodic Properties) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. आवर्त सारणी में किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर परमाणु त्रिज्या में सामान्यतः कमी आती है, क्योंकि प्रभावी नाभिकीय आवेश में वृद्धि होती है, किंतु उत्कृष्ट गैसों (Noble Gases) के मामले में वान डर वाल्स त्रिज्या (van der Waals radius) का मान अधिक होने के कारण उनका आकार उनके ठीक पहले आने वाले हैलोजन तत्वों की तुलना में अचानक बढ़ जाता है।
  2. 2. इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी (Electron Gain Enthalpy) का ऋणात्मक मान हैलोजन समूह में फ्लोरिन का सबसे अधिक होता है, क्योंकि फ्लोरिन का आकार बहुत छोटा होने के कारण आने वाला इलेक्ट्रॉन अंतra-इलेक्ट्रॉनिक प्रतिकर्षणात्मक बलों को आसानी से सहन कर लेता है।
  3. 3. आयनन एन्थैल्पी (Ionization Enthalpy) का मान एक ही आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर सामान्यतः बढ़ता है, किंतु द्वितीय आवर्त में बोरॉन (B) की आयनन एन्थैल्पी बेरिलियम (Be) से कम होती है, जिसका कारण बेरिलियम के 2s कक्षक का पूर्णतः भरा होना है।
  4. 4. किसी तत्व की विद्युत ऋणात्मकता (Electronegativity) एक आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर घटती है और वर्ग में ऊपर से नीचे आने पर बढ़ती है, जो रासायनिक बंध में साझा इलेक्ट्रॉन युग्म को आकर्षित करने की क्षमता को दर्शाती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर प्रभावी नाभिकीय आवेश बढ़ने से परमाणु आकार घटता है, लेकिन उत्कृष्ट गैसों के लिए वान डर वाल्स त्रिज्या परिभाषित होने के कारण उनका आकार सहसंयोजक त्रिज्या वाले हैलोजन से बड़ा होता है। कथन 2 गलत है क्योंकि फ्लोरिन के छोटे आकार के कारण उच्च इलेक्ट्रॉन घनत्व से अंतra-इलेक्ट्रॉनिक प्रतिकर्षणात्मक बल बढ़ जाते हैं, जिससे क्लोरीन की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का ऋणात्मक मान फ्लोरिन से अधिक होता है। विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, तत्वों के भौतिक और रासायनिक गुण उनके परमाणु क्रमांक के आवर्ती फलन होते हैं। कथन 3 सही है क्योंकि बेरिलियम ($1s^2 2s^2$) का पूर्णतः भरा हुआ $s$-कक्षक अधिक स्थायी होता है, जिससे उससे इलेक्ट्रॉन निकालने के लिए अधिक ऊर्जा (आयनन एन्थैल्पी) की आवश्यकता होती है, अतः बोरॉन की आयनन एन्थैल्पी बेरिलियम से कम होती है। कथन 4 गलत है क्योंकि विद्युत ऋणात्मकता एक आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर बढ़ती है और वर्ग में ऊपर से नीचे आने पर घटती है।
Share:
अगला प्रश्न → मानव अंतःस्रावी तंत्र और हॉर्मोनों की कार्यप्रणाली के संदर्भ में, निम्नलिखित… ← पिछला प्रश्न मानव शरीर के पाचन, श्वसन, परिसंचरण और तंत्रिका तंत्र के…

Related Questions

→ विद्युत धारा, प्रतिरोध और सर्किट के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी चालक का विद्युत प्रतिरोध (Electrical Resistance) उसकी लंबाई के समानुपाती और उसकी अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती होता है, तथा प्रतिरोधकता (Resistivity) का मान चालक के पदार्थ की प्रकृति और उसके तापमान पर निर्भर करता है, न कि उसके आयामों पर। 2. जब प्रतिरोधकों को समांतर क्रम (Parallel Combination) में जोड़ा जाता है, तो सर्किट का कुल समतुल्य प्रतिरोध परिपथ के किसी भी व्यक्तिगत प्रतिरोधक के न्यूनतम मान से भी अधिक होता है। 3. किर्चॉफ का प्रथम नियम (Kirchhoff's Current Law) आवेश संरक्षण के सिद्धांत पर आधारित है, जिसके अनुसार किसी संधि (Junction) पर मिलने वाली सभी विद्युत धाराओं का बीजगणितीय योग शून्य होता है। 4. अतिचालकता (Superconductivity) की स्थिति में कुछ पदार्थों का विद्युत प्रतिरोध शून्य हो जाता है, और यह परिघटना सामान्य तापमान पर ही सभी धातुओं में स्वतः उत्पन्न हो जाती है बिना किसी शीतलन के। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → विद्युत चुंबकीय प्रेरण और चुम्बकत्व के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. फैराडे के विद्युत चुंबकीय प्रेरण के द्वितीय नियम के अनुसार, किसी बंद परिपथ में प्रेरित विद्युत वाहक बल (EMF) का परिमाण उस परिपथ से गुजरने वाले चुंबकीय फ्लक्स के परिवर्तन की समय-दर के अनुक्रमानुपाती होता है। 2. लेंज का नियम (Lenz's Law) ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत का एक प्रत्यक्ष परिणाम है, जो यह बताता है कि प्रेरित धारा की दिशा हमेशा उस कारण का विरोध करती है जिससे वह स्वयं उत्पन्न होती है। 3. स्वप्रेरकत्व (Self-inductance) का एसआई मात्रक 'हेनरी' (Henry) है, और यह किसी कुंडली का वह गुण है जो कुंडली में प्रवाहित होने वाली धारा के परिवर्तन का विरोध करता है। 4. किसी धारावाही परिनालिका (Solenoid) के भीतर चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता परिनालिका के क्रोस-सेक्शनल क्षेत्रफल पर निर्भर करती है तथा परिनालिका की लंबाई बढ़ाने से चुंबकीय क्षेत्र का मान बढ़ जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → मानव रक्त परिसंचरण तंत्र और रक्त समूहों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. एरिथ्रोब्लास्टोसिस फेटलिस (Erythroblastosis Fetalis) की समस्या तब उत्पन्न होती है जब Rh-ऋणात्मक माता और Rh-धनात्मक पिता की द्वितीय या उसके बाद की संतान Rh-धनात्मक होती है, क्योंकि प्रथम गर्भावस्था के दौरान माँ के शरीर में बने Rh एंटीबॉडीज भ्रूण की लाल रक्त कणिकाओं को नष्ट करने लगते हैं। 2. रुधिर स्कंदन (Blood Coagulation) की प्रक्रिया में, प्रोथ्रोम्बिन को थ्रोम्बिन में बदलने के लिए थ्रोम्बोप्लास्टिन और कैल्शियम आयनों ($Ca^{2+}$) की उपस्थिति अनिवार्य होती है, तथा फाइब्रिनोजेन एक अघुलनशील प्रोटीन है जो सीधे रक्त का थक्का जमाता है बिना किसी एंजाइमी रूपांतरण के। 3. रुधिर वर्ग 'AB' वाले व्यक्तियों की प्लाज्मा में एंटी-A और एंटी-B दोनों प्राकृतिक एंटीबॉडी (Agglutinins) अनुपस्थित होते हैं, जिसके कारण ये किसी भी वर्ग से रक्त प्राप्त कर सकते हैं और इन्हें 'सर्वग्राही' (Universal Recipient) कहा जाता है। 4. मानव हृदय का पेसमेकर साइनोएट्रियल नोड (SAN) कहलाता है, जो दाहिने आलिंद के ऊपरी दाहिने कोने पर स्थित होता है और यह स्वतः उत्तेजना उत्पन्न करने की क्षमता रखता है, जिससे हृदय की संकुचन तरंगें प्रारंभ होती हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → मानव रक्त परिसंचरण तंत्र और रक्त समूहों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. रक्त समूह 'O' वाले व्यक्तियों की लाल रक्त कणिकाओं (RBC) की सतह पर एंटीजन A और B दोनों अनुपस्थित होते हैं, इसलिए इन्हें 'सर्वदाता' (Universal Donor) माना जाता है, किंतु ये केवल 'O' रक्त समूह के व्यक्तियों से ही रक्त प्राप्त कर सकते हैं। 2. 'बॉम्बे रक्त समूह' (Bombay Blood Group) सबसे दुर्लभ रक्त समूहों में से एक है, जिसमें व्यक्ति की RBC पर 'H' एंटीजन भी अनुपस्थित होता है क्योंकि उनमें FUT1 जीन उत्परिवर्तित होता है, और ऐसे रोगी को केवल बॉम्बे फेनोटाइप वाले व्यक्ति से ही रक्त दिया जा सकता है। 3. एरिथ्रोब्लास्टोसिस फेटलिस (Erythroblastosis Fetalis) की स्थिति तब उत्पन्न होती है जब Rh-धनात्मक पिता और Rh-ऋणात्मक माता की प्रथम संतान Rh-धनात्मक होती है, जिससे प्रथम गर्भावस्था में ही गंभीर हीमोलिटिक एनीमिया हो जाता है। 4. शिराओं (Veins) में रक्त का प्रवाह हृदय की ओर होता है और इनमें उच्च दाब पर रक्त प्रवाहित होता है, इसलिए इनकी दीवारें धमनियों की तुलना में अत्यधिक मोटी, पेशीय और कपाटहीन (Valve-less) होती हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के तंत्र और पादप हार्मोन्स की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और इनमें मुख्य पादप शरीर गेमेटोफाइट (युग्मकोद्भिद्) होता है जो बीजाणुद्भिद (स्पोरोफाइट) पर पोषण के लिए आंशिक रूप से निर्भर रहता है। 2. C3 पौधों की तुलना में C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर नगण्य होती है, जिसका मुख्य कारण यह है कि उनमें रुबिको (RuBisCO) एंजाइम बंडल शीथ कोशिकाओं में उच्च सांद्रता में पाया जाता है जहाँ कार्बन डाइऑक्साइड का सांद्रण मैलिक अम्ल के डीकार्बोक्सिलेशन द्वारा बढ़ जाता है। 3. ऑक्सिन (जैसे IAA) त्रेपोट्रॉपिज्म और फोटोट्रॉपिज्म की क्रियाओं को नियंत्रित करता है, जहाँ प्रकाश के विपरीत दिशा में ऑक्सिन का पार्श्व वितरण अधिक हो जाने के कारण त्रेपोट्रॉपिक वक्रता उत्पन्न होती है, जिसे डार्विन और उनके पुत्र द्वारा कैनरी ग्रास के कोलियोप्टाइल पर किए गए प्रयोगों से समझा गया था। 4. जिबरेलिन (Gibberellin) आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में internode (पर्वान्तर) के दीर्घीकरण को प्रेरित करके उनकी लंबाई बढ़ाते हैं, और ये बीज अंकुरण के दौरान एल्यूरोन परत पर प्रभाव डालकर अल्फा-एमाइलेज जैसे हाइड्रोलिटिक एंजाइमों के संश्लेषण को उत्प्रेरित करते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → कोशिका का ऊर्जा गृह किसे कहा जाता है?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.