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पृथ्वी के चुम्बकत्व, चुंबकीय पदार्थों के गुणों और विद्युत चुंबकीय प्रेरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र का क्षैतिज घटक ($B_H$) और नति कोण ($ heta$) किसी स्थान पर उस क्षेत्र के संपूर्ण चुंबकीय प्रभाव को परिभाषित करते हैं, तथा चुंबकीय ध्रुवों पर नति कोण 90° होने के कारण क्षैतिज घटक का मान शून्य हो जाता है।
- 2. क्यूरी ताप (Curie Temperature) वह विशिष्ट तापमान है जिसके ऊपर जाने पर कोई लौहचुंबकीय पदार्थ (Ferromagnetic substance) अपनी अनुचुंबकीय (Paramagnetic) प्रकृति खो देता है और पूर्णतः प्रतिचुंबकीय बन जाता है।
- 3. स्वप्रेरकत्व (Self-inductance) किसी कुंडली का वह विद्युत गुण है जो उस कुंडली में प्रवाहित होने वाली धारा के मान में होने वाले परिवर्तन का विरोध करता है, और इसका एसआई मात्रक 'वेबर प्रति ऐम्पियर' या 'हेनरी' होता है।
- 4. भंवर धाराएँ (Eddy Currents), जिन्हें 'फूको धाराएँ' भी कहा जाता है, किसी चालक से बद्ध चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन होने पर उस चालक के भीतर उत्पन्न होने वाली चक्राकार प्रेरित विद्युत धाराएँ हैं, जिनका उपयोग विद्युत चुंबकीय डैम्पिंग और प्रेरण भट्टी में किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र का क्षैतिज घटक $B_H = B \cos\theta$ होता है; चुंबकीय ध्रुवों पर नति कोण ($ heta$) 90° होता है, जिससे $\cos(90°) = 0$ होने के कारण क्षैतिज घटक शून्य हो जाता है। कथन 2 गलत है क्योंकि क्यूरी ताप के ऊपर जाने पर लौहचुंबकीय पदार्थ केवल अनुचुंबकीय (Paramagnetic) प्रकृति में परिवर्तित होते हैं, वे प्रतिचुंबकीय (Diamagnetic) नहीं बनते। कथन 3 सही है क्योंकि स्वप्रेरकत्व (Self-inductance) धारा परिवर्तन का विरोध करता है और इसका मात्रक वेबर/ऐम्पियर या हेनरी है। कथन 4 सही है क्योंकि भंवर धाराएँ परिवर्तनशील चुंबकीय फ्लक्स के कारण चालक के भीतर चक्राकार रूप में उत्पन्न होती हैं, जिनके विभिन्न व्यावहारिक अनुप्रयोग हैं। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
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पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) और पादप हार्मोन्स के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल पर निर्भर होते हैं, तथा इनमें मुख्य पादप शरीर द्विगुनीत (Sporophyte) होता है जो स्वतंत्र रूप से जीवित रहता है।
2. C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर C3 पौधों की तुलना में नगण्य या शून्य होती है, क्योंकि इनमें रुबिस्को (RuBisCO) एंजाइम उच्च सांद्रता वाले पर्णमध्योतक (Mesophyll) कोशिकाओं में नहीं बल्कि पूंछ आच्छद (Bundle Sheath) कोशिकाओं में पाया जाता है जहाँ $CO_2$ की सांद्रता बढ़ जाती है।
3. जिब्रेलिन ($GA_3$) एक ऐसा पादप हॉर्मोन है जो आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में पर्व की लंबाई (Internode elongation) को बढ़ाकर सामान्य लंबाई प्राप्त करने में मदद करता है और बीजों की प्रसुप्ति (Seed dormancy) को तोड़कर अंकुरण को प्रेरित करता है।
4. ऑक्सिन (Auxin) का संश्लेषण मुख्य रूप से प्ररोह और मूल के शीर्ष पर होता है, और यह 'शीर्ष प्रमुखता' (Apical Dominance) के लिए उत्तरदायी है, जहाँ शीर्षस्थ कली की उपस्थिति पार्श्व कलियों के विकास को संदमित करती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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धातुओं, अधातुओं और उनके यौगिकों के रासायनिक तथा भौतिक गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. एक्वा रेजिया (Aqua Regia), जो सांद्र हाइड्रोक्लोरिक अम्ल और सांद्र नाइट्रिक अम्ल का 3:1 के आयतन अनुपात में ताजा मिश्रण है, सोने और प्लेटिनम जैसी उत्कृष्ट धातुओं को भी घोलने में सक्षम होता है।
2. थर्माइट वेल्डिंग की प्रक्रिया में, एल्युमिनियम चूर्ण का उपयोग अपचायक (Reducing agent) के रूप में किया जाता है, जो फेरिक ऑक्साइड ($Fe_2O_3$) को पिघले हुए लोहे में अपचयित करता है।
3. सफेद फॉस्फोरस, जो अत्यधिक प्रतिक्रियाशील और वाष्पशील गैर-धातु है, जल के साथ तीव्र अभिक्रिया करके फॉस्फोरिक अम्ल बनाता है, इसलिए इसे हमेशा केरोसिन तेल के अंदर रखा जाता है।
4. सोडियम धातु अत्यधिक प्रतिक्रियाशील होने के कारण खुली हवा में नमी और ऑक्सीजन से तुरंत अभिक्रिया करती है, जिसके कारण इसे दुर्घटना से बचाने के लिए किरोसिन (मिट्टी के तेल) के नीचे डुबोकर रखा जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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पृथ्वी के चुम्बकत्व और विद्युत चुंबकीय प्रेरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र के घटक के रूप में, किसी स्थान पर 'नति कोण' (Angle of Dip) का मान उस स्थान पर कुल चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता और उसके क्षैतिज घटक के बीच का कोण होता है, तथा ध्रुवों पर नति कोण का मान 90° होता है।
2. भंवर धाराएँ (Eddy Currents), जिन्हें 'फूको धाराएँ' भी कहा जाता है, किसी चालक से बद्ध चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन होने पर उस चालक के भीतर उत्पन्न होने वाली प्रेरित आभासी चक्राकार विद्युत धाराएँ हैं, जिनका उपयोग विद्युत ब्रेक (Magnetic braking) और प्रेरण भट्टी (Induction furnace) में किया जाता है।
3. अन्योन्य प्रेरण (Mutual Induction) इस सिद्धांत पर कार्य करता है कि जब किसी प्राथमिक कुंडली में प्रवाहित धारा के मान में परिवर्तन किया जाता है, तो उससे जुड़ी द्वितीयक कुंडली में चुंबकीय फ्लक्स परिवर्तन के कारण प्रेरित विद्युत वाहक बल उत्पन्न होता है, और इसका एसआई मात्रक 'वेबर प्रति ऐम्पियर' होता है।
4. एक समरूप चुंबकीय क्षेत्र में गतिमान किसी चालक छड़ में उत्पन्न प्रेरित विद्युत वाहक बल का मान छड़ की लंबाई, चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता और छड़ के वेग के गुणनफल पर निर्भर करता है, बशर्ते ये तीनों राशियाँ एक-दूसरे के समानांतर हों।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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अनुदैर्ध्य तरंगों (Longitudinal Waves) और अनुप्रस्थ तरंगों (Transverse Waves) की प्रकृति तथा ध्वनि संचरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अनुप्रस्थ तरंगों का संचरण केवल ठोस पदार्थों और द्रवों के मुक्त पृष्ठों पर ही संभव है क्योंकि इनके संचरण के लिए माध्यम में अपरूपण प्रत्यास्थता (Shear Elasticity) का होना आवश्यक है, जबकि गैसों में अपरूपण प्रत्यास्थता न होने के कारण इनमें अनुप्रस्थ तरंगें उत्पन्न नहीं की जा सकतीं।
2. किसी गैस में ध्वनि की चाल उस गैस के परम ताप के वर्गमूल के सीधे आनुपातिक होती है, तथा गैस के घनत्व के वर्गमूल के व्युत्क्रमानुपाती होती है।
3. जब ध्वनि तरंगें एक माध्यम से दूसरे माध्यम में प्रवेश करती हैं, तो उनकी चाल और तरंगदैर्ध्य दोनों बदल जाते हैं, किंतु उनकी आवृत्ति (Frequency) अपरिवर्तित रहती है क्योंकि आवृत्ति स्रोत का गुण है माध्यम का नहीं।
4. न्यूटन द्वारा प्रतिपादित ध्वनि की चाल के सूत्र में लाप्लास ने यह संशोधन किया कि वायु में ध्वनि का संचरण एक समतापीय (Isothermal) प्रक्रम है, जिसके कारण दाब परिवर्तन के समय उत्पन्न ऊष्मा बाहर निकल जाती है और तापमान नियत रहता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के तंत्र और पादप हार्मोन्स की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और इनमें मुख्य पादप शरीर गेमेटोफाइट (युग्मकोद्भिद्) होता है जो बीजाणुद्भिद (स्पोरोफाइट) पर पोषण के लिए आंशिक रूप से निर्भर रहता है।
2. C3 पौधों की तुलना में C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर नगण्य होती है, जिसका मुख्य कारण यह है कि उनमें रुबिको (RuBisCO) एंजाइम बंडल शीथ कोशिकाओं में उच्च सांद्रता में पाया जाता है जहाँ कार्बन डाइऑक्साइड का सांद्रण मैलिक अम्ल के डीकार्बोक्सिलेशन द्वारा बढ़ जाता है।
3. ऑक्सिन (जैसे IAA) त्रेपोट्रॉपिज्म और फोटोट्रॉपिज्म की क्रियाओं को नियंत्रित करता है, जहाँ प्रकाश के विपरीत दिशा में ऑक्सिन का पार्श्व वितरण अधिक हो जाने के कारण त्रेपोट्रॉपिक वक्रता उत्पन्न होती है, जिसे डार्विन और उनके पुत्र द्वारा कैनरी ग्रास के कोलियोप्टाइल पर किए गए प्रयोगों से समझा गया था।
4. जिबरेलिन (Gibberellin) आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में internode (पर्वान्तर) के दीर्घीकरण को प्रेरित करके उनकी लंबाई बढ़ाते हैं, और ये बीज अंकुरण के दौरान एल्यूरोन परत पर प्रभाव डालकर अल्फा-एमाइलेज जैसे हाइड्रोलिटिक एंजाइमों के संश्लेषण को उत्प्रेरित करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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कोशिका का ऊर्जा गृह किसे कहा जाता है?
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