General Science
Asked 4 hours ago · Viewed 0 times
मानव रोगों और उनके संचरण या उपचार तंत्र के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. टिटनेस (Tetanus), जिसे 'लॉकजॉ' भी कहा जाता है, 'क्लॉस्ट्रिडियम टिटेनी' (Clostridium tetani) जीवाणु के बहिर्विष (Exotoxin) के कारण होता है, जो केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित कर कंकाल पेशियों में तीव्र संकुचन और ऐंठन उत्पन्न करता है।
- 2. रेबीज (Rabies) का विषाणु तंत्रिका तंत्र को संक्रमित करता है और इसके संक्रमण के बाद रोगसूचक अवधि (Incubation period) के दौरान 'नेग्री बॉडीज' (Negri bodies) नामक अंतःकोशिकीय समावेशन पिंड संक्रमित तंत्रिका कोशिकाओं के साइटोप्लाज्मा में पाए जाते हैं।
- 3. फाइलेरियासिस (Filariasis), जिसे हाथीपांव भी कहते हैं, 'वुचेरेरिया बैनक्रॉफ्टी' नामक गोलकृमि द्वारा होता है, जिसके वयस्क परजीवी लसीका वाहिनियों (Lymphatic vessels) में निवास करते हैं और इसके संचरण के लिए मादा क्युलेक्स मच्छर उत्तरदायी होती है।
- 4. एलिसा (ELISA) परीक्षण का उपयोग मुख्य रूप से एड्स के संपुष्टि परीक्षण (Confirmatory test) के रूप में किया जाता है, जो एंटीजन-एंटीबॉडी प्रतिक्रिया के सिद्धांत पर कार्य करता है और प्रारंभिक जांच के लिए सबसे विश्वसनीय विधि है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1, 2 और 3 सही हैं। टिटनेस 'क्लॉस्ट्रिडियम टिटेनी' के न्यूरोटॉक्सिन (टेटनोस्पैस्मिन) के कारण होता है। रेबीज के विषाणु संक्रमण में मस्तिष्क की कोशिकाओं में 'नेग्री बॉडीज' का पाया जाना एक प्रमुख नैदानिक लक्षण है। फाइलेरियासिस वुचेरेरिया बैनक्रॉफ्टी द्वारा होता है और इसका संचरण मादा क्युलेक्स मच्छर द्वारा होता है। कथन 4 गलत है क्योंकि एलिसा (ELISA) एक प्रारंभिक स्क्रीनिंग परीक्षण है, जबकि एड्स का पुष्टिकरण परीक्षण 'वेस्टर्न ब्लॉट' (Western Blot) परीक्षण होता है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
अगला प्रश्न →
मानव रोगों, उनके रोगजनकों और संचरण तंत्र के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर…
← पिछला प्रश्न
मानव शरीर के पाचन, श्वसन, परिसंचरण और तंत्रिका तंत्र के…
Related Questions
→
बोर के परमाणु मॉडल (Bohr's Atomic Model) और क्वांटम यांत्रिकी के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बोर के मॉडल के अनुसार, इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर केवल उन्हीं निश्चित वृत्ताकार कक्षाओं में चक्कर लगाते हैं जिनमें उनका कोणीय संवेग (Angular Momentum) $\frac{h}{2\pi}$ का पूर्ण गुणज (Integral multiple) होता है।
2. हाइजेनबर्ग का अनिश्चितता का सिद्धांत (Heisenberg's Uncertainty Principle) यह बताता है कि किसी गतिमान सूक्ष्म कण की स्थिति और संवेग दोनों का एक साथ पूर्ण सटीकता से निर्धारण करना असंभव है, और यह सिद्धांत बोर के निश्चित कक्षाओं वाले मॉडल के विपरीत है।
3. जब कोई इलेक्ट्रॉन किसी उच्च ऊर्जा स्तर ($E_2$) से निम्न ऊर्जा स्तर ($E_1$) में संक्रमण करता है, तो ऊर्जा का उत्सर्जन फोटोन के रूप में होता है, जिसकी आवृत्ति $\Delta E = E_2 - E_1 = h\nu$ समीकरण द्वारा दी जाती है।
4. क्वांटम संख्या 'दिग्ंशी क्वांटम संख्या' (Azimuthal Quantum Number) उपकोशों (Subshells) के आकार और इलेक्ट्रॉन मेघ के स्थानिक विन्यास को निर्धारित करती है, तथा इसके किसी दिए गए मुख्य क्वांटम संख्या $n$ के लिए कुल मान $0$ से $n$ तक होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
प्रकाशिकी (Optics) के सिद्धांतों और लेंस-दर्पण के व्यवहार के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जब प्रकाश की किरण किसी सघन माध्यम से विरल माध्यम में प्रवेश करती है और आपतन कोण का मान क्रांतिक कोण (Critical Angle) से अधिक हो जाता है, तो किरण सघन माध्यम में ही परावर्तित हो जाती है, जिसे पूर्ण आंतरिक परावर्तन कहते हैं।
2. एक उत्तल लेंस (Convex lens) को जब ऐसे द्रव में डुबोया जाता है जिसका अपवर्तनांक लेंस के पदार्थ के अपवर्तनांक से अधिक होता है, तो वह लेंस अभिसारी (Converging) व्यवहार के बजाय अपसारी (Diverging) लेंस की तरह कार्य करने लगता है।
3. गोलीय दर्पणों के लिए, यदि वस्तु की दूरी ($u$) और प्रतिबिंब की दूरी ($v$) के बीच ग्राफ खींचा जाए, तो अवतल दर्पण द्वारा वास्तविक प्रतिबिंब बनाने की स्थिति में ग्राफ एक सरल रेखा प्राप्त होता है।
4. किसी समतल दर्पण के सामने यदि कोई वस्तु दर्पण की ओर $v$ वेग से गति करती है, तो दर्पण में बनने वाला उसका प्रतिबिंब वस्तु की अपेक्षा $2v$ सापेक्ष वेग से उसकी ओर आता हुआ प्रतीत होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
धातुओं, अधातुओं और उनके यौगिकों के रासायनिक तथा भौतिक गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. एक्वा रेजिया (Aqua Regia), जो सांद्र हाइड्रोक्लोरिक अम्ल और सांद्र नाइट्रिक अम्ल का 3:1 के आयतन अनुपात में ताजा मिश्रण है, सोने और प्लेटिनम जैसी उत्कृष्ट धातुओं को भी घोलने में सक्षम होता है।
2. थर्माइट वेल्डिंग की प्रक्रिया में, एल्युमिनियम चूर्ण का उपयोग अपचायक (Reducing agent) के रूप में किया जाता है, जो फेरिक ऑक्साइड ($Fe_2O_3$) को पिघले हुए लोहे में अपचयित करता है।
3. सफेद फॉस्फोरस, जो अत्यधिक प्रतिक्रियाशील और वाष्पशील गैर-धातु है, जल के साथ तीव्र अभिक्रिया करके फॉस्फोरिक अम्ल बनाता है, इसलिए इसे हमेशा केरोसिन तेल के अंदर रखा जाता है।
4. सोडियम धातु अत्यधिक प्रतिक्रियाशील होने के कारण खुली हवा में नमी और ऑक्सीजन से तुरंत अभिक्रिया करती है, जिसके कारण इसे दुर्घटना से बचाने के लिए किरोसिन (मिट्टी के तेल) के नीचे डुबोकर रखा जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) और पादप हार्मोन्स के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल पर निर्भर होते हैं, तथा इनमें मुख्य पादप शरीर द्विगुनीत (Sporophyte) होता है जो स्वतंत्र रूप से जीवित रहता है।
2. C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर C3 पौधों की तुलना में नगण्य या शून्य होती है, क्योंकि इनमें रुबिस्को (RuBisCO) एंजाइम उच्च सांद्रता वाले पर्णमध्योतक (Mesophyll) कोशिकाओं में नहीं बल्कि पूंछ आच्छद (Bundle Sheath) कोशिकाओं में पाया जाता है जहाँ $CO_2$ की सांद्रता बढ़ जाती है।
3. जिब्रेलिन ($GA_3$) एक ऐसा पादप हॉर्मोन है जो आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में पर्व की लंबाई (Internode elongation) को बढ़ाकर सामान्य लंबाई प्राप्त करने में मदद करता है और बीजों की प्रसुप्ति (Seed dormancy) को तोड़कर अंकुरण को प्रेरित करता है।
4. ऑक्सिन (Auxin) का संश्लेषण मुख्य रूप से प्ररोह और मूल के शीर्ष पर होता है, और यह 'शीर्ष प्रमुखता' (Apical Dominance) के लिए उत्तरदायी है, जहाँ शीर्षस्थ कली की उपस्थिति पार्श्व कलियों के विकास को संदमित करती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के तंत्र और पादप हार्मोन्स की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और इनमें मुख्य पादप शरीर गेमेटोफाइट (युग्मकोद्भिद्) होता है जो बीजाणुद्भिद (स्पोरोफाइट) पर पोषण के लिए आंशिक रूप से निर्भर रहता है।
2. C3 पौधों की तुलना में C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर नगण्य होती है, जिसका मुख्य कारण यह है कि उनमें रुबिको (RuBisCO) एंजाइम बंडल शीथ कोशिकाओं में उच्च सांद्रता में पाया जाता है जहाँ कार्बन डाइऑक्साइड का सांद्रण मैलिक अम्ल के डीकार्बोक्सिलेशन द्वारा बढ़ जाता है।
3. ऑक्सिन (जैसे IAA) त्रेपोट्रॉपिज्म और फोटोट्रॉपिज्म की क्रियाओं को नियंत्रित करता है, जहाँ प्रकाश के विपरीत दिशा में ऑक्सिन का पार्श्व वितरण अधिक हो जाने के कारण त्रेपोट्रॉपिक वक्रता उत्पन्न होती है, जिसे डार्विन और उनके पुत्र द्वारा कैनरी ग्रास के कोलियोप्टाइल पर किए गए प्रयोगों से समझा गया था।
4. जिबरेलिन (Gibberellin) आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में internode (पर्वान्तर) के दीर्घीकरण को प्रेरित करके उनकी लंबाई बढ़ाते हैं, और ये बीज अंकुरण के दौरान एल्यूरोन परत पर प्रभाव डालकर अल्फा-एमाइलेज जैसे हाइड्रोलिटिक एंजाइमों के संश्लेषण को उत्प्रेरित करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
कोशिका का ऊर्जा गृह किसे कहा जाता है?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.