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मानव शरीर के परिसंचरण और तंत्रिका तंत्र के नियंत्रण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. मानव हृदय की धड़कन का स्वतः जनन 'पेसमेकर' या 'साइनोएट्रियल नोड' (SAN) द्वारा होता है, जो दाएँ आलिंद की ऊपरी दीवार पर स्थित होता है और यह स्वतः उत्तेजना उत्पन्न करने की क्षमता रखता है।
  2. 2. मेडुला ऑब्लॉन्गेटा (Medulla Oblongata) में स्थित हृदयवाहिकीय केंद्र (Cardiovascular center) स्वायत्त तंत्रिका तंत्र (ANS) के माध्यम से हृदय की गतिविधियों को नियंत्रित करता है, जिसमें अनुकंपी तंत्रिकाएं हृदय की धड़कन की दर को बढ़ाती हैं।
  3. 3. प्रतिवर्ती चाप (Reflex Arc) के संचालन के दौरान, संवेदी तंत्रिका संकेत सीधे संवेदी प्रकूट (Sensory cortex) तक पहुँचते हैं और वहीं से त्वरित मोटर प्रतिक्रिया उत्पन्न होती है, बिना रीढ़ की हड्डी (Spinal cord) की मध्यस्थता के।
  4. 4. रक्तदाब के नियमन में 'कैरोटिड साइनस' और 'महाधमनी चाप' (Aortic arch) पर स्थित दाबग्राही (Baroreceptors) महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जो रक्तचाप में वृद्धि होने पर वैसोडिलेशन (वाहिका विस्तार) को प्रेरित करते हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि साइनोएट्रियल नोड (SAN) को मानव हृदय का प्राकृतिक पेसमेकर कहा जाता है जो स्वतः लयबद्ध विद्युत आवेग उत्पन्न करता है। कथन 2 सही है; मेडुला ऑब्लॉन्गेटा में स्थित कार्डियोवैस्कुलर सेंटर स्वायत्त तंत्रिका तंत्र के माध्यम से हृदय गति को नियंत्रित करता है, जहाँ अनुकंपी (Sympathetic) तंत्रिकाएं गति बढ़ाती हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि प्रतिवर्ती क्रियाओं (Reflex Actions) का केंद्र मुख्य रूप से रीढ़ की हड्डी (Spinal Cord) होती है, न कि सीधे संवेदी प्रकूट, जो प्रतिक्रिया को तीव्र और अनैच्छिक बनाता है। कथन 4 सही है, क्योंकि दाबग्राही (Baroreceptors) रक्तचाप में परिवर्तन को महसूस कर वाहिका विस्तार (Vasodilation) द्वारा रक्तदाब को नियंत्रित करते हैं। विकिपीडिया संदर्भ
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