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अनुदैर्ध्य तरंगों (Longitudinal waves) और अनुप्रस्थ तरंगों (Transverse waves) की प्रकृति तथा ध्वनि तरंगों के संचरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. अनुदैर्ध्य तरंगों में माध्यम के कण तरंग संचरण की दिशा के समानांतर कंपन करते हैं, जिसके कारण माध्यम में संपीडन (Compression) और विरलन (Rarefaction) के क्षेत्र बनते हैं, और ये तरंगें ठोस, द्रव तथा गैस तीनों माध्यमों में उत्पन्न की जा सकती हैं।
- 2. प्रकाश तरंगें विद्युत चुंबकीय तरंगें होने के कारण अनुप्रस्थ प्रकृति की होती हैं, और इन्हें ध्रुवित (Polarized) किया जा सकता है, जबकि ध्वनि तरंगें अनुदैर्ध्य तरंगें होने के कारण ध्रुवण की परिघटना प्रदर्शित नहीं करती हैं।
- 3. जब ध्वनि तरंगें किसी एक माध्यम से दूसरे माध्यम में प्रवेश करती हैं, तो उनकी चाल और तरंगदैर्ध्य बदल जाते हैं, लेकिन तरंग की आवृत्ति (Frequency) माध्यम परिवर्तन से अपरिवर्तित रहती है क्योंकि आवृत्ति स्रोत की विशेषता है।
- 4. किसी माध्यम में ध्वनि की चाल माध्यम के प्रत्यास्थता गुणांक और घनत्व पर निर्भर करती है, जिसके कारण नम हवा का घनत्व शुष्क हवा के घनत्व से अधिक होने के कारण नम हवा में ध्वनि की चाल शुष्क हवा की तुलना में कम हो जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि अनुदैर्ध्य तरंगों में कण संचरण की दिशा के समानांतर गति करते हैं और संपीडन-विरलन बनाते हैं, जो सभी अवस्थाओं में संभव है। कथन 2 सही है क्योंकि ध्रुवण (Polarization) केवल अनुप्रस्थ तरंगों का गुण है; प्रकाश अनुप्रस्थ होने के कारण ध्रुवित होता है जबकि ध्वनि अनुदैर्ध्य होने के कारण नहीं। कथन 3 सही है क्योंकि माध्यम बदलने पर ध्वनि का वेग और तरंगदैर्ध्य परिवर्तित होते हैं, किंतु स्रोत की आवृत्ति पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। कथन 4 गलत है क्योंकि जलवाष्प का घनत्व शुष्क हवा की तुलना में कम होता है (क्योंकि $H_2O$ का आणविक भार शुष्क हवा के औसत आणविक भार से कम होता है), इसलिए आर्द्र वायु में ध्वनि की चाल शुष्क वायु से अधिक होती है। विकिपीडिया संदर्भ
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कृत्रिम उपग्रहों की गति और गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी भू-स्थिर उपग्रह (Geostationary Satellite) की परिक्रमण अवधि ठीक 24 घंटे होती है, और इसे स्थापित करने के लिए पृथ्वी की सतह से इसकी कक्षीय ऊँचाई लगभग 36,000 किमी होती है, तथा यह विषुवत वृत्त के ठीक ऊपर पश्चिम से पूर्व की ओर परिक्रमण करता है।
2. यदि कोई उपग्रह किसी दीर्घवृत्ताकार कक्षा (Elliptical Orbit) में पृथ्वी की परिक्रमा कर रहा है, तो पृथ्वी के निकटतम बिंदु (उपभू या Perigee) पर उसकी कक्षीय चाल न्यूनतम होती है, जबकि दूरस्थ बिंदु (अपभू या Apogee) पर उसकी चाल अधिकतम होती है।
3. भारहीनता की स्थिति (Weightlessness) में अंतरिक्ष यात्री और उपग्रह दोनों एक ही समान गुरुत्वीय त्वरण के साथ पृथ्वी की ओर स्वतंत्र रूप से गिर रहे होते हैं (Free Fall), जिसके कारण अंतरिक्ष यात्री को किसी भी प्रकार के संपर्क बल का अनुभव नहीं होता है।
4. ध्रुवीय उपग्रह (Polar Satellite) उत्तर-दक्षिण दिशा में ध्रुवों के ऊपर से पृथ्वी की परिक्रमा करते हैं, और इनकी कक्षीय ऊँचाई बहुत कम (लगभग 500 से 800 किमी) होती है, जिसके कारण ये पूरे ग्रह की रिमोट सेंसिंग और मौसम संबंधी निगरानी करने में सक्षम होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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जीन विनिमय (Crossing Over) और आनुवंशिक विविधता के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जीन विनिमय की प्रक्रिया समजात गुणसूत्रों (Homologous chromosomes) की गैर-सह-भ्रातृ गुणसूत्रिकाओ (Non-sister chromatids) के बीच अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis) की पैकाइटीन अवस्था में होती है।
2. क्रॉसिंग ओवर के दौरान आनुवंशिक सामग्री के आदान-प्रदान के लिए उत्तरदायी एंजाइम को 'रेकॉम्बिनेज' (Recombinase) कहा जाता है, जो डीएनए स्ट्रैंड के टूटने और जुड़ने को उत्प्रेरित करता है।
3. दो जीनों के बीच पुनרו संयोजन आवृत्ति (Recombination frequency) का मान इस बात पर निर्भर करता है कि गुणसूत्र पर वे जीन एक-दूसरे से कितनी दूर स्थित हैं, और दूरी बढ़ने पर पुनרו संयोजन की संभावना घट जाती है।
4. मूरगन (Morgan) द्वारा ड्रोसोफिला पर किए गए प्रयोगों से यह ज्ञात हुआ कि लिंकेज (सहलग्नता) की ताकत और पुनर्संयोजन आवृत्ति एक-दूसरे के व्युत्क्रमानुपाती होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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गुरुत्वाकर्षण और उपग्रहों की गति के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पृथ्वी की सतह के समीप परिक्रमण कर रहे किसी उपग्रह की कक्षीय चाल (Orbital Speed) का मान केवल पृथ्वी के द्रव्यमान और उसकी त्रिज्या पर निर्भर करता है, और यह उपग्रह के अपने द्रव्यमान से पूर्णतः स्वतंत्र होता है।
2. केप्लर के ग्रहों की गति के तृतीय नियम (परिक्रमण काल का नियम) के अनुसार, किसी ग्रह के परिक्रमण काल का वर्ग उसकी सूर्य से दीर्घवृत्ताकार कक्षा की अर्ध-दीर्घ अक्ष (Semi-major axis) के घन के सीधे समानुपाती होता है।
3. यदि पृथ्वी अपनी वर्तमान कोणीय चाल से अचानक अपनी अक्ष पर घूमना बंद कर दें (शून्य कोणीय वेग), तो ध्रुवों को छोड़कर पृथ्वी की सतह पर स्थित सभी वस्तुओं के भार में आभासी वृद्धि हो जाएगी, और विषुवत रेखा पर भार में अधिकतम कमी दर्ज की जाएगी।
4. किसी पिंड का गुरुत्वीय त्वरण ($g$) पृथ्वी की सतह से गहराई में जाने पर और पृथ्वी की सतह से ऊँचाई पर जाने पर दोनों ही स्थितियों में घटता है, बशर्ते पृथ्वी को एकसमान घनत्व का ठोस गोला माना जाए।
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विलयन के अणुसंख्यक गुणधर्म (Colligative Properties) और उत्प्रेरण के सिद्धांतों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी विलायक में अवाष्पशील विलेय मिलाने पर उसके वाष्प दाब में होने वाला आपेक्षिक अवनमन विलेय के मोल प्रभाज के बराबर होता है, और यह राउल्ट के नियम पर आधारित एक अणुसंख्यक गुणधर्म है।
2. क्वथनांक में उन्नयन ($\Delta T_b$) और हिमांक में अवनमन ($\Delta T_f$) दोनों ही विलायक की मोललता के सीधे समानुपाती होते हैं, तथा इनके आनुपातिक स्थिरांक क्रमशः मोलल उन्नयन स्थिरांक (इब्यूलियोस्कोपिक स्थिरांक) और मोलल अवनमन स्थिरांक (क्रायोस्कोपिक स्थिरांक) कहलाते हैं।
3. समांगी उत्प्रेरण (Homogeneous Catalysis) में उत्प्रेरक और अभिकारक दोनों एक ही भौतिक अवस्था (जैसे गैसीय या द्रव) में होते हैं, जबकि विषमांगी उत्प्रेरण में उत्प्रेरक ठोस अवस्था में होता है और अभिकारक गैसीय या द्रव अवस्था में होते हैं।
4. ज़ीओलाइट्स (Zeolites) सूक्ष्म-छिद्रयुक्त एलुमिनोसिलिकेट्स होते हैं जो आकार-वरण उत्प्रेरण (Shape-Selective Catalysis) प्रदर्शित नहीं करते हैं, क्योंकि उनकी क्रिस्टलीय संरचना रासायनिक रूप से निष्क्रिय और एकसमान होती है।
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पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के तंत्र और पादप हार्मोन्स की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और इनमें मुख्य पादप शरीर गेमेटोफाइट (युग्मकोद्भिद्) होता है जो बीजाणुद्भिद (स्पोरोफाइट) पर पोषण के लिए आंशिक रूप से निर्भर रहता है।
2. C3 पौधों की तुलना में C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर नगण्य होती है, जिसका मुख्य कारण यह है कि उनमें रुबिको (RuBisCO) एंजाइम बंडल शीथ कोशिकाओं में उच्च सांद्रता में पाया जाता है जहाँ कार्बन डाइऑक्साइड का सांद्रण मैलिक अम्ल के डीकार्बोक्सिलेशन द्वारा बढ़ जाता है।
3. ऑक्सिन (जैसे IAA) त्रेपोट्रॉपिज्म और फोटोट्रॉपिज्म की क्रियाओं को नियंत्रित करता है, जहाँ प्रकाश के विपरीत दिशा में ऑक्सिन का पार्श्व वितरण अधिक हो जाने के कारण त्रेपोट्रॉपिक वक्रता उत्पन्न होती है, जिसे डार्विन और उनके पुत्र द्वारा कैनरी ग्रास के कोलियोप्टाइल पर किए गए प्रयोगों से समझा गया था।
4. जिबरेलिन (Gibberellin) आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में internode (पर्वान्तर) के दीर्घीकरण को प्रेरित करके उनकी लंबाई बढ़ाते हैं, और ये बीज अंकुरण के दौरान एल्यूरोन परत पर प्रभाव डालकर अल्फा-एमाइलेज जैसे हाइड्रोलिटिक एंजाइमों के संश्लेषण को उत्प्रेरित करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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कोशिका का ऊर्जा गृह किसे कहा जाता है?
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