General Science
Asked 3 hours ago · Viewed 0 times
एलकेन, एल्कीन और एल्काइन जैसे हाइड्रोकार्बनों के रासायनिक गुणों और बंधनों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संतृप्त हाइड्रोकार्बन (ऐल्केन) मुख्य रूप से प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ (Substitution Reactions) प्रदर्शित करते हैं, क्योंकि इनके सभी कार्बन-कार्बन बंध एकल (Single) सहसंयोजक बंध होते हैं जो अत्यधिक स्थायी होते हैं।
- 2. एल्कीन और एल्काइन जैसे असंतृप्त हाइड्रोकार्बन इलेक्ट्रॉन-स्नेही (Electrophilic) योगशील अभिक्रियाओं के प्रति उच्च प्रतिक्रियाशीलता दर्शाते हैं, जिसका मुख्य कारण उनमें पाई (π) बंधों के इलेक्ट्रॉनों का आसानी से उपलब्ध होना है।
- 3. मार्कोवनीकॉव नियम (Markovnikov's Rule) के अनुसार, किसी असममित एल्कीन पर हाइड्रोजन हैलाइड (जैसे HBr) के योग के दौरान, अभिकर्मक का ऋणात्मक भाग उस कार्बन परमाणु पर जुड़ता है जिसके पास हाइड्रोजन परमाणुओं की संख्या अधिक होती है।
- 4. एसिटिलीन (एल्काइन) में कार्बन-कार्बन त्रिबंध होने के कारण इसके हाइड्रोजन परमाणु अम्लीय प्रकृति के होते हैं, और यह अमोनियामय सिल्वर नाइट्रेट विलयन के साथ अभिक्रिया करके सफेद अवक्षेप देता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि संतृप्त हाइड्रोकार्बन (ऐल्केन) में सभी सिग्मा (σ) बंध होते हैं जो मजबूत होते हैं और ये मुक्त मूलक प्रतिस्थापन (Free Radical Substitution) अभिक्रियाएँ दर्शाते हैं। कथन 2 सही है क्योंकि असंतृप्त हाइड्रोकार्बनों में कमजोर पाई (π) बंधों की उपस्थिति के कारण ये योगशील अभिक्रियाएँ आसानी से करते हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि मार्कोवनीकॉव नियम के अनुसार अभिकर्मक का ऋणात्मक भाग उस कार्बन परमाणु पर जुड़ता है जिसके पास हाइड्रोजन परमाणुओं की संख्या **कम** होती है (यानी कम प्रतिस्थापित कार्बन पर)। कथन 4 सही है क्योंकि एल्काइनों के टर्मिनल हाइड्रोजन परमाणु अम्लीय होते हैं जो विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार धातु आयनों के साथ एसिटिलाइड (Acetide) बनाते हैं।
अगला प्रश्न →
आधुनिक आवर्त सारणी और तत्वों के रासायनिक गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों…
← पिछला प्रश्न
मानव अंतःस्रावी तंत्र (Endocrine System) और विभिन्न…
Related Questions
→
रासायनिक बंधन, अम्ल, क्षार और लवण के सिद्धांतों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लुईस अम्ल (Lewis acid) वे रासायनिक स्पीशीज होती हैं जो इलेक्ट्रॉन युग्म को ग्रहण कर सकती हैं, और सभी धनावेशित आयन तथा अष्टक अपूर्ण वाले यौगिक (जैसे $BF_3$) उत्कृष्ट लुईस अम्ल के रूप में कार्य करते हैं।
2. ब्रॉन्स्टेड-लॉरी संकल्पना के अनुसार, किसी प्रबल अम्ल का संयुग्मी क्षार (Conjugate base) हमेशा दुर्बल होता है, जबकि दुर्बल अम्ल का संयुग्मी क्षार अपेक्षाकृत प्रबल होता है।
3. जल का स्वतः आयनन (Auto-ionization) एक ऊष्माशोषी प्रक्रिया है, जिसके कारण तापमान में वृद्धि होने पर जल का आयनिक गुणनफल ($K_w$) बढ़ जाता है और शुद्ध जल का उदासीन pH मान 7 से कम हो जाता है।
4. सोडियम एसीटेट ($CH_3COONa$) का जलीय विलयन अम्लीय प्रकृति का होता है, क्योंकि इसका जलीय अपघटन (Hydrolysis) होने पर एसीटेट आयन जल के साथ अभिक्रिया करके हाइड्रोनियम आयन ($H_3O^+$) की सांद्रता को अत्यधिक बढ़ा देता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
आधुनिक आवर्त सारणी और तत्वों के विभिन्न रासायनिक तथा भौतिक गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आवर्त सारणी के किसी भी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर परमाणु त्रिज्या घटती है, लेकिन उत्कृष्ट गैसों (Noble Gases) के वान डेर वाल्स (van der Waals) आकार उनके ठीक पहले के हैलोजन तत्वों की तुलना में काफ़ी बड़े होते हैं।
2. इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी (Electron Gain Enthalpy) का ऋणात्मक मान हमेशा समूह में नीचे जाने पर बढ़ता है, और फ्लोरीन की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का ऋणात्मक मान क्लोरीन की तुलना में अधिक होता है क्योंकि फ्लोरीन का आकार बहुत छोटा होता है।
3. डी-ब्लॉक (d-block) के तत्वों में 5d संक्रमण श्रेणी के तत्वों की परमाणु त्रिज्याएँ अपने ठीक ऊपर स्थित 4d संक्रमण श्रेणी के तत्वों की तुलना में लगभग समान होती हैं, जिसका मुख्य कारण 'लैंथेनाइड संकुचन' (Lanthanide Contraction) है।
4. किसी परमाणु की विद्युत ऋणात्मकता (Electronegativity) एक स्थिर मौलिक गुण है जो किसी विशेष तत्व के लिए सभी रासायनिक वातावरण और ऑक्सीकरण अवस्थाओं में हमेशा समान बनी रहती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
मानव शरीर को प्रभावित करने वाले विभिन्न जनित रोगों और उनके कारकों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'सिफिलिस' (Syphilis) एक दीर्घकालिक संक्रामक रोग है जो स्पिरोकीट जीवाणु 'ट्रेपोनेमा पैलिडम' (Treponema pallidum) के कारण होता है, और यह मुख्य रूप से यौन संपर्क के माध्यम से फैलता है।
2. 'एथलीट फुट' (Athlete's Foot) एक कवक जनित (Fungal) त्वचा संक्रमण है जो 'ट्राइकोफाइटोन' प्रजाति के कवक के कारण होता है, और यह आमतौर पर नम और गर्म वातावरण में पैर की उंगलियों के बीच फैलता है।
3. 'फाइलेरियासिस' (Lymphatic Filariasis) का कारण बनने वाला परजीवी कृमि एक कवक है, जो लिंफ वाहिकाओं को अवरुद्ध कर देता है और इससे अंगों में अत्यधिक सूजन ('हाथीपांव') उत्पन्न होती है।
4. 'हेपेटाइटिस बी' एक डीएनए विषाणु जनित रोग है जो यकृत को गंभीर रूप से प्रभावित करता है, और यह संक्रमित रक्त, असुरक्षित यौन संबंध तथा संदूषित सुइयों के माध्यम से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में संचरित हो सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
प्रकाशिकी (Optics) के सिद्धांतों और लेंस-दर्पण के व्यवहार के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जब किसी उत्तल लेंस को ऐसे द्रव में डुबोया जाता है जिसका अपवर्तनांक लेंस के पदार्थ के अपवर्तनांक से अधिक होता है, तो लेंस की फोकस दूरी बढ़ जाती है और उसकी अभिसारी (Converging) प्रकृति अपसारी (Diverging) प्रकृति में बदल जाती है।
2. गोलीय दर्पण की फोकस दूरी ($f$) और उसकी वक्रता त्रिज्या ($R$) के बीच का संबंध $R = 2f$ केवल उन किरणों के लिए सटीक होता है जो मुख्य अक्ष के बहुत निकट होती हैं (जिन्हें पैरेक्सियल किरणें कहा जाता है)।
3. पूर्ण आंतरिक परावर्तन (Total Internal Reflection) की परिघटना के लिए यह आवश्यक है कि प्रकाश किरण सघन माध्यम से विरल माध्यम में जा रही हो तथा आपतन कोण का मान उस युग्म के क्रांतिक कोण (Critical Angle) से कम होना चाहिए।
4. एक समतल दर्पण द्वारा बनाई गई छवि हमेशा आभासी और सीधी होती है, लेकिन यदि कोई वस्तु समतल दर्पण की ओर $v$ चाल से गति करती है, तो दर्पण में उसका प्रतिबिंब वस्तु के सापेक्ष $2v$ चाल से приблиž (समीप) आता हुआ प्रतीत होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के तंत्र और पादप हार्मोन्स की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और इनमें मुख्य पादप शरीर गेमेटोफाइट (युग्मकोद्भिद्) होता है जो बीजाणुद्भिद (स्पोरोफाइट) पर पोषण के लिए आंशिक रूप से निर्भर रहता है।
2. C3 पौधों की तुलना में C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर नगण्य होती है, जिसका मुख्य कारण यह है कि उनमें रुबिको (RuBisCO) एंजाइम बंडल शीथ कोशिकाओं में उच्च सांद्रता में पाया जाता है जहाँ कार्बन डाइऑक्साइड का सांद्रण मैलिक अम्ल के डीकार्बोक्सिलेशन द्वारा बढ़ जाता है।
3. ऑक्सिन (जैसे IAA) त्रेपोट्रॉपिज्म और फोटोट्रॉपिज्म की क्रियाओं को नियंत्रित करता है, जहाँ प्रकाश के विपरीत दिशा में ऑक्सिन का पार्श्व वितरण अधिक हो जाने के कारण त्रेपोट्रॉपिक वक्रता उत्पन्न होती है, जिसे डार्विन और उनके पुत्र द्वारा कैनरी ग्रास के कोलियोप्टाइल पर किए गए प्रयोगों से समझा गया था।
4. जिबरेलिन (Gibberellin) आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में internode (पर्वान्तर) के दीर्घीकरण को प्रेरित करके उनकी लंबाई बढ़ाते हैं, और ये बीज अंकुरण के दौरान एल्यूरोन परत पर प्रभाव डालकर अल्फा-एमाइलेज जैसे हाइड्रोलिटिक एंजाइमों के संश्लेषण को उत्प्रेरित करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
कोशिका का ऊर्जा गृह किसे कहा जाता है?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.