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मानव रक्त परिसंचरण तंत्र और रक्त समूहों (Blood Groups) की आणविक व आनुवंशिक विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. लाल रक्त कोशिकाओं (RBC) की सतह पर पाए जाने वाले ABO रक्त समूह के प्रतिजन (Antigens 'A' और 'B') मूल रूप से ग्लाइकोलिपिड या ग्लाइकोप्रोटीन होते हैं, जिनके निर्माण को नियंत्रित करने वाला जीन 'I' क्रोमोसोम 9 पर स्थित होता है।
- 2. 'बॉम्बे रक्त समूह' ($O_h$ फेनोटाइप) से ग्रस्त व्यक्तियों में 'H-प्रतिजन' का पूर्ण अभाव होता है, क्योंकि उनमें FUT1 (H-जीन) का उत्परिवर्तन होता है, जिसके कारण वे केवल बॉम्बे रक्त समूह से ही रक्त प्राप्त कर सकते हैं, हालांकि वे किसी भी अन्य ABO समूह (A, B, AB, O) के व्यक्ति को रक्त दान कर सकते हैं।
- 3. रुधिर स्कंदन (Blood Coagulation) की आंतरिक कैस्केड प्रक्रिया के दौरान, फैक्टर XII (हागेमैन फैक्टर) के सक्रिय होने से अंततः प्रोथ्रॉम्बिन एक्टिवेटर का निर्माण होता है, जो कैल्शियम आयनों की उपस्थिति में प्रोथ्रॉम्बिन को सक्रिय थ्रॉम्बिन में बदलता है।
- 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, Rh कारक (Rhesus factor) एक प्रोटीन है जो RBC की सतह पर उपस्थित होता है, और Rh-ऋणात्मक माता तथा Rh-धनात्मक पिता से उत्पन्न प्रथम संतान में 'एरिथ्रोब्लास्टोसिस फिटलिस' (Erythroblastosis fetalis) का खतरा सामान्यतः बहुत अधिक होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि ABO रक्त समूह के प्रतिजन आरबीसी की प्लाज्मा झिल्ली से जुड़े ग्लाइकोलिपिड या ग्लाइकोप्रोटीन होते हैं और इनका नियंत्रण जीन 'I' (जो क्रोमोसोम 9 पर स्थित है) द्वारा होता है। कथन 2 गलत है क्योंकि बॉम्बे रक्त समूह वाले व्यक्ति केवल बॉम्बे रक्त समूह से ही रक्त प्राप्त कर सकते हैं और केवल O समूह (या अन्य ABO समूहों) को दान कर सकते हैं, लेकिन यहाँ दान करने के संदर्भ में यह तकनीकी रूप से केवल बॉम्बे फेनोटाइप को ही रक्त दे सकते हैं क्योंकि इनके प्लाज्मा में एंटी-H प्रतिरक्षी होते हैं जो अन्य सभी RBC (जिन पर H-प्रतिजन होता है) को agglutinate कर देते हैं। कथन 3 सही है क्योंकि आंतरिक मार्ग में फैक्टर XII से शुरू होकर कैस्केड क्रिया के माध्यम से प्रोथ्रॉम्बिन एक्टिवेटर बनता है जो कैल्शियम ($Ca^{2+}$) की उपस्थिति में प्रोथ्रॉम्बिन को थ्रॉम्बिन में बदलता है। कथन 4 गलत है क्योंकि एरिथ्रोब्लास्टोसिस फिटलिस सामान्यतः प्रथम गर्भावस्था में नहीं होता, बल्कि प्रथम संतान के जन्म के समय रक्त के संपर्क में आने से माता के शरीर में Rh एंटीबॉडी बनते हैं जो द्वितीय गर्भावस्था को प्रभावित करते हैं। विकिपीडिया संदर्भ
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चुम्बकत्व और विद्युत चुंबकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. फैराडे के विद्युत चुंबकीय प्रेरण के द्वितीय नियम के अनुसार, किसी परिपथ में प्रेरित विद्युत वाहक बल (EMF) का परिमाण उस परिपथ से बद्ध चुंबकीय फ्लक्स के परिवर्तन की समय-दर के सीधे समानुपाती होता है।
2. लेंज का नियम ऊर्जा संरक्षण के नियम के प्रतिकूल (विरुद्ध) है, जिसके अनुसार प्रेरित धारा की दिशा सदैव उस कारण का विरोध करती है जो इसे उत्पन्न करता है।
3. स्वप्रेरण (Self-induction) किसी कुंडली का वह गुण है जिसके कारण वह अपने से गुजरने वाले विद्युत धारा के मान में होने वाले परिवर्तन का विरोध करती है, और इसका एसआई मात्रक हेनरी (Henry) होता है।
4. भंवर धाराएँ (Eddy Currents) धातु के बड़े टुकड़ों में परिवर्ती चुंबकीय क्षेत्र के कारण उत्पन्न होने वाली प्रेरित आभासी धाराएँ हैं, जिनका उपयोग विद्युत ब्रेक (Magnetic braking) और प्रेरण भट्टी (Induction furnace) जैसी प्रणालियों में किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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आधुनिक आवर्त सारणी और तत्वों के आवर्ती गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर प्रभावी नाभिकीय आवेश ($Z_{eff}$) में क्रमिक वृद्धि के कारण परमाणु त्रिज्या में सामान्यतः कमी आती है, परंतु उत्कृष्ट गैसों (Noble Gases) के मामले में वांडर वॉल त्रिज्या का मान अधिक होने से उनका आकार अपने समूह के अन्य तत्वों की तुलना में बड़ा हो जाता है।
2. इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी (Electron Gain Enthalpy) का मान हमेशा ऋणात्मक नहीं होता है, और आवर्त सारणी में क्लोरीन की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का ऋणात्मक मान सर्वाधिक होता है, जो फ्लोरीन से भी अधिक ऋणात्मक है।
3. आयनन एन्थैल्पी (Ionization Enthalpy) का मान उत्तरोत्तर बढ़ता जाता है, और किसी दिए गए परमाणु के लिए द्वितीय आयनन एन्थैल्पी का मान हमेशा प्रथम आयनन एन्थैल्पी से अधिक होता है क्योंकि उदासीन परमाणु की तुलना में धनायन से इलेक्ट्रॉन निकालना अधिक कठिन होता है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, डी-ब्लॉक (d-block) के तत्वों को संक्रमण तत्व कहा जाता है क्योंकि उनके आंशिक रूप से भरे हुए d-कक्षक होते हैं, और समूह 12 के तत्व (जैसे Zn, Cd, Hg) पूर्णतः भरे d-कक्षक होने के कारण संक्रमण तत्व नहीं माने जाते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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सुकेन्द्रकी (Eukaryotic) कोशिकाओं में कोशिका चक्र (Cell Cycle) और कोशिका विभाजन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कोशिका चक्र की 'अंतरावस्था' (Interphase) का S-चरण (Synthesis phase) वह अवधि है जिसमें डीएनए का प्रतिकृति (Replication) होता है, और यदि किसी द्विगुणित कोशिका में G1 चरण में गुणसूत्रों की संख्या $2n$ और डीएनए की मात्रा $2C$ है, तो S-चरण के पूरा होने पर गुणसूत्रों की संख्या बढ़कर $4n$ हो जाती है जबकि डीएनए की मात्रा $4C$ बनी रहती है।
2. अर्धसूत्री विभाजन-I (Meiosis-I) की पैकीटीन (Pachytene) अवस्था में समजात गुणसूत्रों के गैर-भ्रातृ अर्धगुणसूत्रों (Non-sister chromatids) के बीच आनुवंशिक सामग्री का विनिमय होता है, जिसे 'क्रॉसिंग ओवर' कहा जाता है, और यह प्रक्रिया रिकॉम्बिनेज (Recombinase) एंजाइम द्वारा उत्प्रेरित होती है।
3. समसूत्री विभाजन (Mitosis) की एनाफेज़ (Anaphase) अवस्था के दौरान, सेंट्रोमियर का विभाजन होता है जिससे सह-अर्धगुणसूत्र (Sister chromatids) अलग हो जाते हैं और विपरीत ध्रुवों की ओर गति करते हैं।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, पादप कोशिकाओं में कोशिका विभाजन के समय साइटोकिनेसिस (Cytokinesis) की प्रक्रिया कोशिका प्लेट (Cell plate) के निर्माण द्वारा होती है, जिसका विकास गॉल्जीकाय द्वारा स्रावित पुटिकाओं (Vesicles) के संलयन से केंद्र से परिधि की ओर होता है।
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मानव रक्त परिसंचरण तंत्र और प्लाज्मा के थक्के जमने की क्रियाविधि (Blood Coagulation Cascade) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. रक्त का थक्का जमने की प्रक्रिया में 'प्रोथ्रॉम्बिन' को सक्रिय 'थ्रॉम्बिन' में बदलने के लिए थ्रॉम्बोप्लास्टिन और कैल्शियम आयनों ($Ca^{2+}$) की उपस्थिति अनिवार्य होती है, जिसे कैस्केड परिकल्पना के अंतर्गत आंतरिक (Intrinsic) और बाह्य (Extrinsic) दोनों मार्गों द्वारा प्रेरित किया जा सकता है।
2. हिपैरिन (Heparin) एक प्राकृतिक थक्کارोधी (Anticoagulant) है जिसे मुख्य रूप से यकृत और बेसोफिल कोशिकाओं द्वारा स्रावित किया जाता है, जो रक्त वाहिकाओं के भीतर रक्त को जमने से रोकता है।
3. रुधिर स्कंदन के दौरान फाइब्रिनोजेन एक अघुलनशील प्रोटीन है, जिसे सक्रिय थ्रॉम्बिन एंजाइम द्वारा घुलनशील फाइब्रिन तंतुओं में परिवर्तित किया जाता है, जो विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार घाव को बंद करने वाला मुख्य जाल बनाते हैं।
4. सीरम (Serum) और प्लाज्मा में मुख्य रासायनिक अंतर यह है कि सीरम वह प्लाज्मा है जिसमें से फाइब्रिनोजेन और अन्य स्कंदन कारक निकाले जा चुके होते हैं।
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पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के तंत्र और पादप हार्मोन्स की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और इनमें मुख्य पादप शरीर गेमेटोफाइट (युग्मकोद्भिद्) होता है जो बीजाणुद्भिद (स्पोरोफाइट) पर पोषण के लिए आंशिक रूप से निर्भर रहता है।
2. C3 पौधों की तुलना में C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर नगण्य होती है, जिसका मुख्य कारण यह है कि उनमें रुबिको (RuBisCO) एंजाइम बंडल शीथ कोशिकाओं में उच्च सांद्रता में पाया जाता है जहाँ कार्बन डाइऑक्साइड का सांद्रण मैलिक अम्ल के डीकार्बोक्सिलेशन द्वारा बढ़ जाता है।
3. ऑक्सिन (जैसे IAA) त्रेपोट्रॉपिज्म और फोटोट्रॉपिज्म की क्रियाओं को नियंत्रित करता है, जहाँ प्रकाश के विपरीत दिशा में ऑक्सिन का पार्श्व वितरण अधिक हो जाने के कारण त्रेपोट्रॉपिक वक्रता उत्पन्न होती है, जिसे डार्विन और उनके पुत्र द्वारा कैनरी ग्रास के कोलियोप्टाइल पर किए गए प्रयोगों से समझा गया था।
4. जिबरेलिन (Gibberellin) आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में internode (पर्वान्तर) के दीर्घीकरण को प्रेरित करके उनकी लंबाई बढ़ाते हैं, और ये बीज अंकुरण के दौरान एल्यूरोन परत पर प्रभाव डालकर अल्फा-एमाइलेज जैसे हाइड्रोलिटिक एंजाइमों के संश्लेषण को उत्प्रेरित करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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कोशिका का ऊर्जा गृह किसे कहा जाता है?
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