General Science
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मानव पोषण और जैविक अणुओं (कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन एवं विटामिन) की जैव-रासायनिक संरचना तथा कार्यों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. एमाइलोज़ (Amylose) स्टार्च का जल-विलेय घटक है जो एक रेखीय पॉलिशैकराइड है, जिसमें ग्लूकोज की इकाइयाँ केवल $\alpha-1,4$ ग्लायकोसाइडिक बंधों द्वारा जुड़ी होती हैं, जबकि एमाइलोपेक्टिन (Amylopectin) जल-अविलेय घटक है जिसमें मुख्य श्रृंखला $\alpha-1,4$ बंधों तथा शाखाएँ $\alpha-1,6$ बंधों द्वारा बनती हैं।
- 2. आवश्यक अमीनो अम्ल (Essential Amino Acids) वे होते हैं जिनका संश्लेषण मानव शरीर की कोशिकाओं में पर्याप्त मात्रा में नहीं हो पाता है, इसलिए उन्हें आहार के माध्यम से लेना अनिवार्य होता है; उदाहरण के लिए, वैलीन, ल्यूसीन और फेनिलएलानिन।
- 3. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, विटामिन K (फाइलोक्विनोन) वसा में घुलनशील विटामिन है जो यकृत में प्रोथ्रॉम्बिन के संश्लेषण के लिए अनिवार्य है और इसकी कमी से रक्त का थक्का जमने में विलंब होता है।
- 4. विटामिन C (एस्कॉर्बिक अम्ल) एक जल-विलेय विटामिन है जिसे मानव शरीर यकृत में संग्रहित कर सकता है और इसकी अत्यधिक कमी से 'बेरी-बेरी' नामक रोग उत्पन्न होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1, 2 और 3 सही हैं। एमाइलोज़ स्टार्च का लगभग 15-20% भाग बनाता है, जो जल में घुलनशील और रेखीय होता है, जिसमें $\alpha-1,4$ ग्लायकोसाइडिक बंध होते हैं। एमाइलोपेक्टिन 80-85% भाग बनाता है, जल-अविलेय होता है और इसमें $\alpha-1,6$ बंधों द्वारा शाखाएँ होती हैं। आवश्यक अमीनो अम्ल वे हैं जो शरीर में संश्लेषित नहीं होते (जैसे ल्यूसीन, वैलीन)। विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, विटामिन K रक्त का थक्का जमाने (स्कंदन) में सहायता करता है। कथन 4 असत्य है क्योंकि विटामिन C जल-विलेय है और शरीर में संग्रहित नहीं होता (मूत्र के साथ उत्सर्जित होता है), तथा इसकी कमी से 'स्कर्वी' रोग होता है, जबकि बेरी-बेरी विटामिन B1 (थायमिन) की कमी से होता है।
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आधुनिक आवर्त सारणी और तत्वों के आवर्ती गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर प्रभावी नाभिकीय आवेश ($Z_{eff}$) में क्रमिक वृद्धि के कारण परमाणु त्रिज्या में सामान्यतः कमी आती है, परंतु उत्कृष्ट गैसों (Noble Gases) के मामले में वांडर वॉल त्रिज्या का मान अधिक होने से उनका आकार अपने समूह के अन्य तत्वों की तुलना में बड़ा हो जाता है।
2. इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी (Electron Gain Enthalpy) का मान हमेशा ऋणात्मक नहीं होता है, और आवर्त सारणी में क्लोरीन की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का ऋणात्मक मान सर्वाधिक होता है, जो फ्लोरीन से भी अधिक ऋणात्मक है।
3. आयनन एन्थैल्पी (Ionization Enthalpy) का मान उत्तरोत्तर बढ़ता जाता है, और किसी दिए गए परमाणु के लिए द्वितीय आयनन एन्थैल्पी का मान हमेशा प्रथम आयनन एन्थैल्पी से अधिक होता है क्योंकि उदासीन परमाणु की तुलना में धनायन से इलेक्ट्रॉन निकालना अधिक कठिन होता है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, डी-ब्लॉक (d-block) के तत्वों को संक्रमण तत्व कहा जाता है क्योंकि उनके आंशिक रूप से भरे हुए d-कक्षक होते हैं, और समूह 12 के तत्व (जैसे Zn, Cd, Hg) पूर्णतः भरे d-कक्षक होने के कारण संक्रमण तत्व नहीं माने जाते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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आनुवंशिकी और जैव विकास (Genetics and Evolution) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हार्डी-वीनबर्ग संतुलन (Hardy-Weinberg Equilibrium) के अनुसार, एक बड़े यादृच्छिक रूप से संगमित होने वाली आबादी में एलील आवृत्तियाँ पीढ़ियों दर पीढ़ियाँ स्थिर रहती हैं, बशर्ते आबादी में उत्परिवर्तन, प्राकृतिक चयन, जीन प्रवाह, आनुवंशिक अपवाह (Genetic drift) और गैर-यादृच्छिक संगमन अनुपस्थित हों।
2. मेण्डल के स्वतंत्र अपव्यूहन के नियम (Law of Independent Assortment) का सार्वभौमिक रूप से पालन सभी द्विगुणित जीवों पर होता है, चाहे दो अलग-अलग लक्षणों को नियंत्रित करने वाले जीन एक ही गुणसूत्र पर अत्यधिक पास-पास (Linked genes) क्यों न स्थित हों।
3. लामार्कवाद के विपरीत, डार्विनवाद (Natural Selection) इस बात पर जोर देता है कि जीव अपने जीवनकाल में जिन उपार्जित लक्षणों (Acquired characters) को प्राप्त करते हैं, वे अगली पीढ़ी में सीधे वंशागत होते हैं।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, समजात अंग (Homologous organs) वे अंग होते हैं जिनकी उत्पत्ति और मूल संरचना समान होती है लेकिन उनके कार्य भिन्न हो सकते हैं, जो अपसारी विकास (Divergent evolution) का प्रमाण देते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मानव शरीर में जैविक अणुओं, पोषण और विटामिनों की जैव-रासायनिक भूमिका के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. विटामिन B12 (सायनोकोबलामिन) एकमात्र ऐसा जल-विलेय विटामिन है जिसमें कोबाल्ट धातु आयन पाया जाता है, और इसका यकृत में कई वर्षों तक भंडारण किया जा सकता है, तथा इसके अवशोषण के लिए आमाशय की भित्ति से 'कैसल का आंतरिक कारक' (Castle's intrinsic factor) अनिवार्य रूप से आवश्यक होता है।
2. ग्लाइकोजन (Glycogen) जन्तुओं और कवकों में मुख्य संचित पॉलिशैकराइड है, जिसकी संरचना एमाइलोपेक्टिन के समान होती है लेकिन इसमें अत्यधिक सघन शाखन (Branching) पाया जाता है जो प्रत्येक 8 से 12 ग्लूकोज इकाइयों के बाद $\alpha-1,6$ ग्लाइकोसाइडिक बंध के माध्यम से होता है।
3. आवश्यक वसा अम्ल (Essential Fatty Acids) जैसे लिनोलिक अम्ल और लिनोलेनिक अम्ल का संश्लेषण मानव शरीर की कोशिकाओं में पर्याप्त मात्रा में किया जा सकता है, इसलिए इन्हें आहार में लेना अनिवार्य नहीं होता है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, वसा में घुलनशील विटामिन (A, D, E और K) शरीर के यकृत और वसा ऊतकों में संगृहीत होते हैं, और इनमें से विटामिन D वस्तुतः एक प्रो-हॉर्मोन के रूप में कार्य करता है जो कैल्शियम और फॉस्फेट के होमियोस्टेसिस को विनियमित करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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सुकेन्द्रकी (Eukaryotic) कोशिकाओं में कोशिका चक्र (Cell Cycle) और कोशिका विभाजन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कोशिका चक्र की 'अंतरावस्था' (Interphase) का S-चरण (Synthesis phase) वह अवधि है जिसमें डीएनए का प्रतिकृति (Replication) होता है, और यदि किसी द्विगुणित कोशिका में G1 चरण में गुणसूत्रों की संख्या $2n$ और डीएनए की मात्रा $2C$ है, तो S-चरण के पूरा होने पर गुणसूत्रों की संख्या बढ़कर $4n$ हो जाती है जबकि डीएनए की मात्रा $4C$ बनी रहती है।
2. अर्धसूत्री विभाजन-I (Meiosis-I) की पैकीटीन (Pachytene) अवस्था में समजात गुणसूत्रों के गैर-भ्रातृ अर्धगुणसूत्रों (Non-sister chromatids) के बीच आनुवंशिक सामग्री का विनिमय होता है, जिसे 'क्रॉसिंग ओवर' कहा जाता है, और यह प्रक्रिया रिकॉम्बिनेज (Recombinase) एंजाइम द्वारा उत्प्रेरित होती है।
3. समसूत्री विभाजन (Mitosis) की एनाफेज़ (Anaphase) अवस्था के दौरान, सेंट्रोमियर का विभाजन होता है जिससे सह-अर्धगुणसूत्र (Sister chromatids) अलग हो जाते हैं और विपरीत ध्रुवों की ओर गति करते हैं।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, पादप कोशिकाओं में कोशिका विभाजन के समय साइटोकिनेसिस (Cytokinesis) की प्रक्रिया कोशिका प्लेट (Cell plate) के निर्माण द्वारा होती है, जिसका विकास गॉल्जीकाय द्वारा स्रावित पुटिकाओं (Vesicles) के संलयन से केंद्र से परिधि की ओर होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के तंत्र और पादप हार्मोन्स की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और इनमें मुख्य पादप शरीर गेमेटोफाइट (युग्मकोद्भिद्) होता है जो बीजाणुद्भिद (स्पोरोफाइट) पर पोषण के लिए आंशिक रूप से निर्भर रहता है।
2. C3 पौधों की तुलना में C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर नगण्य होती है, जिसका मुख्य कारण यह है कि उनमें रुबिको (RuBisCO) एंजाइम बंडल शीथ कोशिकाओं में उच्च सांद्रता में पाया जाता है जहाँ कार्बन डाइऑक्साइड का सांद्रण मैलिक अम्ल के डीकार्बोक्सिलेशन द्वारा बढ़ जाता है।
3. ऑक्सिन (जैसे IAA) त्रेपोट्रॉपिज्म और फोटोट्रॉपिज्म की क्रियाओं को नियंत्रित करता है, जहाँ प्रकाश के विपरीत दिशा में ऑक्सिन का पार्श्व वितरण अधिक हो जाने के कारण त्रेपोट्रॉपिक वक्रता उत्पन्न होती है, जिसे डार्विन और उनके पुत्र द्वारा कैनरी ग्रास के कोलियोप्टाइल पर किए गए प्रयोगों से समझा गया था।
4. जिबरेलिन (Gibberellin) आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में internode (पर्वान्तर) के दीर्घीकरण को प्रेरित करके उनकी लंबाई बढ़ाते हैं, और ये बीज अंकुरण के दौरान एल्यूरोन परत पर प्रभाव डालकर अल्फा-एमाइलेज जैसे हाइड्रोलिटिक एंजाइमों के संश्लेषण को उत्प्रेरित करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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कोशिका का ऊर्जा गृह किसे कहा जाता है?
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