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मानव अंतःस्रावी तंत्र में हॉर्मोनों के नियंत्रण, उनके रासायनिक प्रकृति और प्रतिक्रिया तंत्र (Feedback Mechanism) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. हाइपोथैलेमस से स्रावित होने वाले 'गोनाडोट्रोपिन-रिलीजिंग हॉर्मोन' (GnRH) की पल्स आवृत्ति (Pulse frequency) अग्र पीयूष ग्रंथि से ल्यूटिनाइजिंग हॉर्मोन (LH) और फॉलिकल-स्टिम्युलेटिंग हॉर्मोन (FSH) के स्रावण के अनुपात को नियंत्रित करती है, जिसमें उच्च आवृत्ति पल्स मुख्य रूप से LH के स्रावण को बढ़ावा देती है।
  2. 2. अधिवृक्क वल्कुट (Adrenal Cortex) से स्रावित होने वाले कोर्टिसोल (Cortisol) का स्तर बढ़ने पर यह अग्र पीयूष ग्रंथि और हाइपोथैलेमस पर नकारात्मक पुनर्भरण (Negative Feedback) आरोपित करता है, जिससे ACTH और CRH का स्रावण कम हो जाता है।
  3. 3. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, पेप्टाइड हॉर्मोन जैसे इंसुलिन और ग्लूकागॉन अपनी जल-विलेय प्रकृति के कारण लक्ष्य कोशिकाओं की प्लाज्मा झिल्ली पर स्थित विशिष्ट ग्राहियों (Receptors) से जुड़ते हैं और कोशिका के भीतर द्वितीयक संदेशवाहकों (जैसे $cAMP$) का उपयोग करके अपनी जैविक प्रतिक्रिया दर्शाते हैं।
  4. 4. थायराइड ग्रंथि द्वारा स्रावित थायरोक्सिन ($T_4$) और ट्राईआयोडोथायरोनिन ($T_3$) स्टेरॉयड प्रकृति के हॉर्मोन होने के कारण कोशिका झिल्ली को पार नहीं कर सकते, अतः वे सतह पर ही रिसेप्टर्स के माध्यम से कार्य करते हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1, 2 और 3 सही हैं। हाइपोथैलेमस से स्रावित GnRH की पल्स आवृत्ति अग्र पीयूष ग्रंथि से गोनाडोट्रोपिन (LH और FSH) के स्रावण को विशिष्ट रूप से नियंत्रित करती है। कोर्टिसोल का स्रावण नकारात्मक पुनर्भरण (Negative Feedback) तंत्र द्वारा हाइपोथैलेमस-पियूष ग्रंथि अक्ष (HPA axis) के माध्यम से नियंत्रित होता है। विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, पेप्टाइड और प्रोटीन हॉर्मोन (जैसे इंसुलिन) जल-विलेय होते हैं और कोशिका झिल्ली की सतह पर स्थित ग्राहियों से बंधकर द्वितीयक संदेशवाहकों (cAMP आदि) को सक्रिय करते हैं। कथन 4 गलत है क्योंकि थायराइड हॉर्मोन ($T_3$ और $T_4$) अमीनो अम्ल व्युत्पन्न होते हुए भी लाइपोफिलिक (वसा-विलेय) प्रकृति के होते हैं, इसलिए वे कोशिका झिल्ली को आसानी से पार करके intracellular receptors से जुड़ते हैं।
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