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सुकेन्द्रकी (Eukaryotic) कोशिकाओं में कोशिका विभाजन (Cell Division) और कोशिकांगों की सूक्ष्म संरचना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. समसूत्री विभाजन (Mitosis) के एनाफेज (Anaphase) चरण के दौरान, सेंट्रोमियर का विभाजन होता है और sister chromatids अलग होकर विपरीत ध्रुवों की ओर गति करते हैं, जिसमें यह गति मुख्य रूप से काइनेटोकोर माइक्रोट्यूब्यूल्स के लघु होने (Depolymerization) और मोटर प्रोटीन जैसे डाइनीन एवं किनेसिन की सक्रियता के कारण होती है।
- 2. अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis) की पैकाइटीन (Pachytene) अवस्था में 'रिकॉम्बिनेज' (Recombinase) एंजाइम की उपस्थिति में सजातीय (Homologous) गुणसूत्रों के गैर-भ्रातृ क्रोमैटिड्स (Non-sister chromatids) के बीच आनुवंशिक सामग्री का विनिमय होता है, जिसे काइऐस्माटा (Chiasmata) का निर्माण कहा जाता है।
- 3. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, पादप कोशिकाओं में कोशिका द्रव्य का विभाजन (Cytokinesis) सेल प्लेट (Cell plate) पद्धति द्वारा होता है, जिसमें गोलगी बॉडी द्वारा स्रावित पुटिकाएँ (Vesicles) मध्य रेखा पर संकेंद्रित होकर अपकेन्द्री (Centrifugal) रूप से बाहर की ओर बढ़ती हैं।
- 4. माइटोकॉन्ड्रिया और क्लोरोप्लास्ट अर्ध-स्वायत्त (Semi-autonomous) कोशिकांग हैं जिनमें 80S प्रकार के राइबोसोम और एकल-रज्जुकी (Single-stranded) रैखिक डीएनए पाए जाते हैं, जिसके कारण ये अपनी कुल प्रोटीन आवश्यकता का शत-प्रतिशत भाग स्वयं संश्लेषित कर लेते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: समसूत्री विभाजन (Mitosis) के एनाफेज में सेंट्रोमियर विभाजित होते हैं और सिस्टर क्रोमैटिड्स अलग होकर ध्रुवों की तरफ बढ़ते हैं, जिसमें काइनेटोकोर माइक्रोट्यूब्यूल्स का डिपोलीमराइजेशन और मोटर प्रोटीन्स की भूमिका होती है। कथन 2 गलत है: पैकाइटीन अवस्था में क्रासिंग ओवर होता है, लेकिन 'काइऐस्माटा' (Chiasmata) स्पष्ट रूप से अगली अवस्था यानी 'डিপ्लोटीन' (Diplotene) में दिखाई देता है। कथन 3 सही है: पादप कोशिकाओं में साइटोकिनेसिस सेल प्लेट निर्माण द्वारा होता है जो केंद्र से परिधि की ओर (अपकेन्द्री / Centrifugal) बढ़ता है। कथन 4 गलत है: माइटोकॉन्ड्रिया और क्लोरोप्लास्ट में 70S प्रकार के राइबोसोम और वृत्ताकार (Circular) द्विरज्जुकी डीएनए पाए जाते हैं, और ये अपनी प्रोटीन आवश्यकता का केवल आंशिक भाग ही बनाते हैं, शेष के लिए केंद्रकीय जीन पर निर्भर रहते हैं। विकिपीडिया संदर्भ
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मानव रक्त परिसंचरण तंत्र में रक्त के थक्के जमने की प्रक्रिया (Blood Coagulation) और प्लाज्मा प्रोटीन की भूमिका के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. रक्त का थक्का जमने की प्रक्रिया में फाइब्रिनोजेन (Fibrinogen), जो एक घुलनशील प्लाज्मा प्रोटीन है, प्रोथ्रोम्बिन और थ्रॉम्बोप्लास्टिन की उपस्थिति में अघुलनशील 'फाइब्रिन' तंतुओं में परिवर्तित हो जाता है जो जाल बनाकर रुधिर कणिकाओं को रोकते हैं।
2. प्रोथ्रोम्बिन का सक्रिय थ्रॉम्बिन में रूपांतरण कैल्सीयम आयनों ($Ca^{2+}$) और क्षतिग्रस्त ऊतकों द्वारा मुक्त किए जाने वाले एंजाइम 'थ्रॉम्बोकाइनेज' (Thromboplastin) की सक्रियता के बिना संभव नहीं है।
3. रुधिर वाहिनियों के भीतर रक्त के अवांछित थक्के (Thrombosis) को रोकने के लिए यकृत और वाहिनियों की अंतःकला (Endothelium) द्वारा प्राकृतिक रूप से 'हेपरिन' (Heparin) नामक प्रतिस्कंदक (Anticoagulant) स्रावित किया जाता है, जो थ्रॉम्बिन की क्रिया को रोकता है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, रक्त का थक्का जमने की प्रक्रिया में विटामिन K की अनिवार्य भूमिका होती है क्योंकि यह यकृत में प्रोथ्रोम्बिन, फैक्टर VII, IX और X के संश्लेषण के लिए एक आवश्यक सह-कारक (Cofactor) के रूप में कार्य करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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आधुनिक आवर्त सारणी और तत्वों के विभिन्न आवर्ती गुणों (Periodic Properties) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर प्रभावी नाभिकीय आवेश ($Z_{eff}$) में क्रमिक वृद्धि के कारण परमाणु त्रिज्या में सामान्यतः कमी आती है, परंतु उत्कृष्ट गैसों (Noble Gases) के मामले में वांडर वॉल त्रिज्या का मान अधिक होने से उनका आकार अपने समूह के अन्य तत्वों की तुलना में बड़ा हो जाता है।
2. इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी (Electron Gain Enthalpy) का मान हमेशा ऋणात्मक नहीं होता है, और आवर्त सारणी के दूसरे आवर्त के तत्वों (जैसे ऑक्सीजन और फ्लोरीन) की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का ऋणात्मक मान उनके ठीक नीचे आने वाले तीसरे आवर्त के तत्वों (जैसे सल्फर और क्लोरीन) की तुलना में अधिक होता है, क्योंकि छोटे आकार के कारण इलेक्ट्रॉन-इलेक्ट्रॉन प्रतिकर्षण बढ़ जाता है।
3. आयनन एन्थैल्पी (Ionization Enthalpy) का मान उत्तरोत्तर बढ़ता जाता है, और किसी दिए गए परमाणु के लिए द्वितीय आयनन एन्थैल्पी का मान हमेशा प्रथम आयनन एन्थैल्पी से अधिक होता है क्योंकि उदासीन परमाणु की तुलना में धनायन से इलेक्ट्रॉन निकालना अधिक कठिन होता है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, d-ब्लॉक (d-block) के तत्वों को संक्रमण तत्व कहा जाता है क्योंकि उनके आंशिक रूप से भरे हुए d-कक्षक होते हैं, और समूह 12 के तत्व (जैसे Zn, Cd, Hg) पूर्णतः भरे d-कक्षक होने के कारण संक्रमण तत्व नहीं माने जाते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मानव अंतःस्रावी तंत्र में हॉर्मोनों के नियंत्रण, उनके रासायनिक प्रकृति और प्रतिक्रिया तंत्र (Feedback Mechanism) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हाइपोथैलेमस से स्रावित होने वाले 'गोनाडोट्रोपिन-रिलीजिंग हॉर्मोन' (GnRH) की पल्स आवृत्ति (Pulse frequency) अग्र पीयूष ग्रंथि से ल्यूटिनाइजिंग हॉर्मोन (LH) और फॉलिकल-स्टिम्युलेटिंग हॉर्मोन (FSH) के स्रावण के अनुपात को नियंत्रित करती है, जिसमें उच्च आवृत्ति पल्स मुख्य रूप से LH के स्रावण को बढ़ावा देती है।
2. अधिवृक्क वल्कुट (Adrenal Cortex) से स्रावित होने वाले कोर्टिसोल (Cortisol) का स्तर बढ़ने पर यह अग्र पीयूष ग्रंथि और हाइपोथैलेमस पर नकारात्मक पुनर्भरण (Negative Feedback) आरोपित करता है, जिससे ACTH और CRH का स्रावण कम हो जाता है।
3. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, पेप्टाइड हॉर्मोन जैसे इंसुलिन और ग्लूकागॉन अपनी जल-विलेय प्रकृति के कारण लक्ष्य कोशिकाओं की प्लाज्मा झिल्ली पर स्थित विशिष्ट ग्राहियों (Receptors) से जुड़ते हैं और कोशिका के भीतर द्वितीयक संदेशवाहकों (जैसे $cAMP$) का उपयोग करके अपनी जैविक प्रतिक्रिया दर्शाते हैं।
4. थायराइड ग्रंथि द्वारा स्रावित थायरोक्सिन ($T_4$) और ट्राईआयोडोथायरोनिन ($T_3$) स्टेरॉयड प्रकृति के हॉर्मोन होने के कारण कोशिका झिल्ली को पार नहीं कर सकते, अतः वे सतह पर ही रिसेप्टर्स के माध्यम से कार्य करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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कार्बनिक रसायन में हाइड्रोकार्बन और उनके यौगिकों के रासायनिक गुणों तथा ईंधन दक्षता के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. एल्केन्स (Alkanes) संतृप्त हाइड्रोकार्बन होते हैं जो मुख्य रूप से प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ (Substitution reactions) दर्शाते हैं, जबकि एल्कीन्स और एल्काइन्स असंतृप्त हाइड्रोकार्बन होने के कारण विशिष्ट रूप से योगात्मक अभिक्रियाएँ (Addition reactions) प्रदर्शित करते हैं।
2. किसी ईंधन की 'ऑकोटेन संख्या' (Octane Number) पेट्रोल में आइसो-ऑक्टेन और n-हेप्टेन के मिश्रण के संदर्भ में उसके एंटी-नॉक गुणों को दर्शाती है, और उच्च ऑकोटेन संख्या वाला ईंधन इंजन में कम 'नॉक' या अपस्फोटन उत्पन्न करता है।
3. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, एथिलीन (इथीन) का बहुलकीकरण करने पर पॉलीथीन का निर्माण होता है, और यह अभिक्रिया एक प्रकार की मुक्त मूलक योगात्मक बहुलकीकरण प्रक्रिया है।
4. प्राकृतिक गैस का मुख्य घटक मीथेन है, जिसे जब उच्च तापमान पर ऑक्सीजन की सीमित मात्रा में जलाया जाता है, तो यह पूर्ण दहन के फलस्वरूप केवल कार्बन डाइऑक्साइड और जलवाष्प का उत्पादन करता है।
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पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के तंत्र और पादप हार्मोन्स की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और इनमें मुख्य पादप शरीर गेमेटोफाइट (युग्मकोद्भिद्) होता है जो बीजाणुद्भिद (स्पोरोफाइट) पर पोषण के लिए आंशिक रूप से निर्भर रहता है।
2. C3 पौधों की तुलना में C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर नगण्य होती है, जिसका मुख्य कारण यह है कि उनमें रुबिको (RuBisCO) एंजाइम बंडल शीथ कोशिकाओं में उच्च सांद्रता में पाया जाता है जहाँ कार्बन डाइऑक्साइड का सांद्रण मैलिक अम्ल के डीकार्बोक्सिलेशन द्वारा बढ़ जाता है।
3. ऑक्सिन (जैसे IAA) त्रेपोट्रॉपिज्म और फोटोट्रॉपिज्म की क्रियाओं को नियंत्रित करता है, जहाँ प्रकाश के विपरीत दिशा में ऑक्सिन का पार्श्व वितरण अधिक हो जाने के कारण त्रेपोट्रॉपिक वक्रता उत्पन्न होती है, जिसे डार्विन और उनके पुत्र द्वारा कैनरी ग्रास के कोलियोप्टाइल पर किए गए प्रयोगों से समझा गया था।
4. जिबरेलिन (Gibberellin) आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में internode (पर्वान्तर) के दीर्घीकरण को प्रेरित करके उनकी लंबाई बढ़ाते हैं, और ये बीज अंकुरण के दौरान एल्यूरोन परत पर प्रभाव डालकर अल्फा-एमाइलेज जैसे हाइड्रोलिटिक एंजाइमों के संश्लेषण को उत्प्रेरित करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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कोशिका का ऊर्जा गृह किसे कहा जाता है?
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