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यांत्रिकी (Mechanics) के अंतर्गत गति के नियमों, कार्य, ऊर्जा, और संवेग संरक्षण के सिद्धांतों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. किसी वस्तु पर किया गया कुल कार्य उसकी गतिज ऊर्जा में परिवर्तन के बराबर होता है, जिसे 'कार्य-ऊर्जा प्रमेय' (Work-Energy Theorem) कहा जाता है, और यह प्रमेय केवल संरक्षी बलों (Conservative forces) के लिए ही वैध है, असंरक्षी बलों के लिए नहीं।
- 2. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, जब कोई पिंड किसी खुरदरे क्षैतिज तल पर घर्षण बल के विरुद्ध गति करता है, तो उसकी कुल यांत्रिक ऊर्जा (गतिज ऊर्जा और स्थितिज ऊर्जा का योग) संरक्षित नहीं रहती है, बल्कि यांत्रिक ऊर्जा का ह्रास ऊष्मीय ऊर्जा के रूप में हो जाता है।
- 3. संवेग संरक्षण का नियम (Law of Conservation of Momentum) न्यूटन के द्वितीय और तृतीय गति नियमों का प्रत्यक्ष परिणाम है, जिसके अनुसार यदि किसी बंद निकाय पर बाह्य बल का परिणामी मान शून्य हो, तो उस निकाय का कुल रैखिक संवेग नियत रहता है।
- 4. अपूर्णतः प्रत्यास्थ टक्कर (Inelastic collision) के दौरान गतिज ऊर्जा का संरक्षण नहीं होता है, परंतु संवेग का संरक्षण हमेशा होता है, और इस प्रकार की टक्कर में अधिकतम ऊर्जा का नुकसान तब होता है जब दोनों वस्तुएँ टक्कर के पश्चात संयुक्त होकर एक ही वेग से गति करने लगती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है क्योंकि 'कार्य-ऊर्जा प्रमेय' (Work-Energy Theorem) संरक्षी (Conservative) और असंरक्षी (Non-conservative) दोनों प्रकार के बलों के लिए समान रूप से वैध है। यह प्रमेय बताती है कि किसी वस्तु पर सभी बलों द्वारा किया गया कुल कार्य उसकी गतिज ऊर्जा में परिवर्तन के बराबर होता है। कथन 2, 3 और 4 सत्य हैं। विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, घर्षण जैसे असंरक्षी बलों की उपस्थिति में यांत्रिक ऊर्जा संरक्षित नहीं रहती है, बल्कि उसका रूपांतरण अन्य रूपों में हो जाता है। रैखिक संवेग संरक्षण का नियम बाह्य बलों की अनुपस्थिति में हमेशा लागू होता है, और पूर्णतः अप्रत्यास्थ टक्कर में गतिज ऊर्जा की हानि अधिकतम होती है।
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विलयन और उत्प्रेरण (Solutions and Catalysis) के सिद्धांतों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी तनु विलयन के वाष्प दाब का आपेक्षिक अवनमन (Relative Lowering of Vapour Pressure) विलय में उपस्थित विलेय के मोल प्रभाज के बराबर होता है, और यह राउल्ट का नियम (Raoult's Law) केवल अवाष्पशील विलेय युक्त तनु विलयनों के लिए ही एक सहसंख्यक गुणधर्म (Colligative Property) के रूप में मान्य है।
2. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, समांगी उत्प्रेरण (Homogeneous Catalysis) में उत्प्रेरक और अभिकारक दोनों एक ही भौतिक अवस्था (जैसे सभी गैस या सभी द्रव) में होते हैं, जबकि विषमांगी उत्प्रेरण में उत्प्रेरक और अभिकारकों की भौतिक अवस्थाएँ भिन्न होती हैं, जैसे हेबर प्रक्रम द्वारा अमोनिया निर्माण में ठोस लोहे (Fe) का उत्प्रेरक के रूप में उपयोग।
3. वैन 'ट हॉफ गुणांक ($i$) का मान किसी विद्युत अपघट्य के विलयन में वियोजन (Dissociation) होने पर 1 से अधिक होता है, जबकि संघनन (Association) होने पर इसका मान 1 से कम होता है, और इसके बिना सहसंख्यक गुणधर्मों के सैद्धांतिक और प्रायोगिक मानों में अंतर को स्पष्ट नहीं किया जा सकता।
4. उत्प्रेरक अभिक्रिया की सक्रियण ऊर्जा (Activation Energy) के मान को बढ़ा देता है जिससे अग्र और प्रतीप दोनों अभिक्रियाओं की दर में समान रूप से वृद्धि हो जाती है, और उत्प्रेरक अभिक्रिया के साम्य स्थिरांक ($K_{eq}$) को भी परिवर्तित कर देता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मानव शरीर में होने वाले विभिन्न संक्रामक रोगों, उनके रोगजनकों (Pathogens) और उनके नैदानिक लक्षणों या परीक्षणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. डिप्थीरिया (Diphtheria) एक जीवाणु जनित संक्रमण है जो कॉर्नेबैक्टीरियम डिप्थीरिया (Corynebacterium diphtheriae) के कारण होता है, और इसके प्रभाव से श्वसन मार्ग में एक विशिष्ट 'सफेद-धूसर झिल्ली' (Pseudomembrane) का निर्माण होता है जो दम घुटने का कारण बन सकती है।
2. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, टिटनेस (Tetanus) का रोगजनक 'क्लोस्ट्रीडियम टिटानी' (Clostridium tetani) एक वायवीय (Aerobic) जीवाणु है, जो कंकाल पेशियों में अनैच्छिक और दर्दनाक ऐंठन (Lockjaw) उत्पन्न करता है।
3. फाइलेरियासिस (Lymphatic Filariasis) का संक्रमण थ्रेड-जैसी फाइरियल कृमियों (जैसे वुचेरेरिया बैनक्रॉफ्टी) के कारण होता है, जो क्यूलैस मच्छरों द्वारा संचरित होते हैं और इसके दीर्घकालिक प्रभाव से अंगों में भारी सूजन (हाथीपांव) हो जाती है।
4. ऐस्केरिस (Ascaris lumbricoides) एक अंतःपरजीवी गोलकृमि है जो मुख्य रूप से संदूषित जल और सब्जियों के माध्यम से मनुष्य की आंत्र में प्रवेश करता है, जिससे आंतरिक रक्तस्राव, पेशीय दुर्बलता और आंत्र का अवरोध उत्पन्न हो सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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गुरुत्वाकर्षण और उपग्रहों की गति के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी कृत्रिम उपग्रह की कक्षीय चाल ($v_o$) उपग्रह के द्रव्यमान पर निर्भर करती है, और उपग्रह जितना अधिक पृथ्वी की सतह के समीप होगा, उसकी कक्षीय चाल उतनी ही कम होगी।
2. भू-स्थिर उपग्रह (Geostationary satellite) का आवर्तकाल पृथ्वी के अपने अक्ष के घूर्णन काल (24 घंटे) के बराबर होता है और यह विषुवत तल में पश्चिम से पूर्व की ओर पृथ्वी की परिक्रमा करता है, जिसकी पृथ्वी की सतह से ऊँचाई लगभग 36,000 किमी होती है।
3. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, यदि पृथ्वी का घूर्णन वेग अचानक वर्तमान मान से 17 गुना अधिक हो जाए, तो भूमध्य रेखा (Equator) पर रखी वस्तुओं का भार शून्य हो जाएगा और वहाँ भारहीनता की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी।
4. पलायन वेग ($v_e$) का मान पिंड के द्रव्यमान और प्रक्षेपण कोण पर निर्भर करता है, तथा पृथ्वी की सतह से किसी पिंड का पलायन वेग लगभग 11.2 किमी/सेकंड होता है, जो कक्षीय चाल का $\sqrt{2}$ गुना होता है।
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रासायनिक बंधन और अम्ल-क्षार सिद्धांतों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आयनिक क्रिस्टल जालक की जालक ऊर्जा (Lattice Energy) का मान धनायन और ऋणायन के आकार में वृद्धि के साथ बढ़ता है, क्योंकि बड़े आकार के आयनों के बीच स्थिर वैद्युत आकर्षण बल अधिक प्रभावी होता है।
2. लुईस अम्ल वे रासायनिक प्रजातियाँ हैं जो इलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण कर सकती हैं (Electron-pair acceptors), जबकि लुईस क्षार इलेक्ट्रॉन युग्म दाता (Electron-pair donors) होते हैं, और इस अवधारणा के अनुसार बोरॉन ट्राइफ्लोराइड ($BF_3$) एक लुईस अम्ल है।
3. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, ब्रॉन्स्टेड-लोरी संकल्पना के तहत किसी प्रबल अम्ल का संयुग्मी क्षार (Conjugated base) अत्यधिक दुर्बल होता है, तथा जल-अपघटन के दौरान अमोनियम क्लोराइड ($NH_4Cl$) जैसे लवण का जलीय विलयन अम्लीय प्रकृति का होता है।
4. सहसंयोजक बंधों की ध्रुवीयता (Polarity) का निर्धारण करने वाले वैद्युत ऋणात्मकता (Electronegativity) अंतर के कारण द्विध्रुव आघूर्ण (Dipole Moment) उत्पन्न होता है, और यही कारण है कि सममितीय अणु होने के बावजूद कार्बन डाइऑक्साइड ($CO_2$) का द्विध्रुव आघूर्ण शून्य नहीं होता है।
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पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के तंत्र और पादप हार्मोन्स की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और इनमें मुख्य पादप शरीर गेमेटोफाइट (युग्मकोद्भिद्) होता है जो बीजाणुद्भिद (स्पोरोफाइट) पर पोषण के लिए आंशिक रूप से निर्भर रहता है।
2. C3 पौधों की तुलना में C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर नगण्य होती है, जिसका मुख्य कारण यह है कि उनमें रुबिको (RuBisCO) एंजाइम बंडल शीथ कोशिकाओं में उच्च सांद्रता में पाया जाता है जहाँ कार्बन डाइऑक्साइड का सांद्रण मैलिक अम्ल के डीकार्बोक्सिलेशन द्वारा बढ़ जाता है।
3. ऑक्सिन (जैसे IAA) त्रेपोट्रॉपिज्म और फोटोट्रॉपिज्म की क्रियाओं को नियंत्रित करता है, जहाँ प्रकाश के विपरीत दिशा में ऑक्सिन का पार्श्व वितरण अधिक हो जाने के कारण त्रेपोट्रॉपिक वक्रता उत्पन्न होती है, जिसे डार्विन और उनके पुत्र द्वारा कैनरी ग्रास के कोलियोप्टाइल पर किए गए प्रयोगों से समझा गया था।
4. जिबरेलिन (Gibberellin) आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में internode (पर्वान्तर) के दीर्घीकरण को प्रेरित करके उनकी लंबाई बढ़ाते हैं, और ये बीज अंकुरण के दौरान एल्यूरोन परत पर प्रभाव डालकर अल्फा-एमाइलेज जैसे हाइड्रोलिटिक एंजाइमों के संश्लेषण को उत्प्रेरित करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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कोशिका का ऊर्जा गृह किसे कहा जाता है?
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