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गुरुत्वाकर्षण और उपग्रहों की गति के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. किसी कृत्रिम उपग्रह की कक्षीय चाल ($v_o$) उपग्रह के द्रव्यमान पर निर्भर करती है, और उपग्रह जितना अधिक पृथ्वी की सतह के समीप होगा, उसकी कक्षीय चाल उतनी ही कम होगी।
  2. 2. भू-स्थिर उपग्रह (Geostationary satellite) का आवर्तकाल पृथ्वी के अपने अक्ष के घूर्णन काल (24 घंटे) के बराबर होता है और यह विषुवत तल में पश्चिम से पूर्व की ओर पृथ्वी की परिक्रमा करता है, जिसकी पृथ्वी की सतह से ऊँचाई लगभग 36,000 किमी होती है।
  3. 3. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, यदि पृथ्वी का घूर्णन वेग अचानक वर्तमान मान से 17 गुना अधिक हो जाए, तो भूमध्य रेखा (Equator) पर रखी वस्तुओं का भार शून्य हो जाएगा और वहाँ भारहीनता की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी।
  4. 4. पलायन वेग ($v_e$) का मान पिंड के द्रव्यमान और प्रक्षेपण कोण पर निर्भर करता है, तथा पृथ्वी की सतह से किसी पिंड का पलायन वेग लगभग 11.2 किमी/सेकंड होता है, जो कक्षीय चाल का $\sqrt{2}$ गुना होता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है क्योंकि किसी उपग्रह की कक्षीय चाल $v_o = \sqrt{\frac{GM}{R+h}}$ होती है, जो उपग्रह के अपने द्रव्यमान ($m$) पर बिल्कुल निर्भर नहीं करती है। साथ ही, उपग्रह जितना पृथ्वी के समीप होगा (अर्थात $h$ का मान जितना कम होगा), उसकी कक्षीय चाल उतनी ही अधिक होगी। कथन 2 सत्य है क्योंकि भू-स्थिर उपग्रह का आवर्तकाल 24 घंटे होता है, यह विषुवत वृत्त के तल में पश्चिम से पूर्व की ओर घूमता है और इसकी लगभग ऊँचाई 36,000 किमी (या 35,786 किमी) होती है। कथन 3 सत्य है; पृथ्वी के घूर्णन के कारण भूमध्य रेखा पर प्रभावी गुरुत्वीय त्वरण $g' = g - R\omega^2$ होता है। यदि घूर्णन कोण वेग $\omega$ का मान इतना बढ़ जाए कि $R\omega^2 = g$ हो जाए (अर्थात घूर्णन वेग 17 गुना होने पर), तो भूमध्य रेखा पर भारहीनता की स्थिति आ जाएगी। विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार यह प्रभाव केवल भूमध्य रेखा पर अनुभव होता है। कथन 4 असत्य है क्योंकि पलायन वेग ($v_e = \sqrt{2gR}$) का मान प्रक्षेपित किए जाने वाले पिंड के द्रव्यमान और उसके प्रक्षेपण कोण (Projection angle) पर बिल्कुल निर्भर नहीं करता है, हालांकि यह कक्षीय चाल का $\sqrt{2}$ गुना अवश्य होता है।
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