General Science
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एल्केन (Alkanes), एल्कीन (Alkenes) और एल्काइन (Alkynes) जैसे हाइड्रोकार्बन के रासायनिक गुणों और उनकी प्रतिक्रियाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. एल्केन संतृप्त हाइड्रोकार्बन होते हैं जो मुख्य रूप से प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ (Substitution reactions) दर्शाते हैं, जबकि एल्कीन और एल्काइन असंतृप्त हाइड्रोकार्बन होने के कारण विशेषताः योग आत्मक अभिक्रियाएँ (Addition reactions) प्रदर्शित करते हैं।
- 2. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, सिस-एल्कीन (Cis-alkenes) में समान समूह द्विबंध के एक ही ओर स्थित होते हैं जिसके कारण उनका द्विध्रुव आघूर्ण (Dipole Moment) शून्य होता है, जबकि ट्रांस-एल्कीन (Trans-alkenes) का द्विध्रुव आघूर्ण अशून्य होता है।
- 3. मार्कोवnikov का नियम (Markovnikov's rule) यह बताता है कि किसी असममित एल्कीन पर हाइड्रोजन हैलाइड ($HX$) के योग के दौरान, अभिकर्मक का ऋणात्मक भाग उस कार्बन परमाणु पर जुड़ता है जिस पर हाइड्रोजन परमाणुओं की संख्या कम होती है।
- 4. एसिटिलीन ($C_2H_2$) जैसे टर्मिनल एल्काइन अपनी अम्लीय प्रकृति के कारण अमोनियामय क्यूप्रस क्लोराइड विलयन के साथ अभिक्रिया करके लाल रंग का कॉपर एसिटिलाइड अवक्षेप बनाते हैं, जबकि एल्केन और एल्कीन यह परीक्षण नहीं देते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि एल्केन संतृप्त हाइड्रोकार्बन होते हैं और मुक्त मूलक प्रतिस्थापन (Free radical substitution) अभिक्रियाएँ देते हैं, जबकि एल्कीन और एल्काइन असंतृप्त होने के कारण इलेक्ट्रोफिलिक योग आत्मक अभिक्रियाएँ दर्शाते हैं। कथन 2 गलत है; सिस-एल्कीन (Cis-alkenes) में ध्रुवीय आघूर्ण एक ही दिशा में होने के कारण उनका द्विध्रुव आघूर्ण अशून्य होता है (ध्रुवीय होते हैं), जबकि ट्रांस-एल्कीन (Trans-alkenes) में समान समूह विपरीत दिशा में होने के कारण उनके द्विध्रुव आघूर्ण एक-दूसरे को निरस्त कर देते हैं और ट्रांस-एल्कीन का द्विध्रुव आघूर्ण शून्य होता है। कथन 3 सही है, मार्कोवnikov के नियम के अनुसार असममित एल्कीन पर $HX$ के योग में ऋणात्मक भाग कम हाइड्रोजन वाले (यानी अधिक प्रतिस्थापित) कार्बन पर जुड़ता है। कथन 4 सही है, टर्मिनल एल्काइन अम्लीय प्रकृति के होते हैं और भारी धातुओं के साथ एसिटिलाइड बनाते हैं। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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पदार्थ के सामान्य गुण, जैसे पृष्ठ तनाव, श्यानता और आर्किमिडीज के सिद्धांत के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी द्रव की श्यानता (Viscosity) उसकी विभिन्न परतों के बीच होने वाली आपेक्षिक गति का विरोध करती है, और सामान्यतः ताप में वृद्धि होने पर द्रवों की श्यानता घटती है जबकि गैसों की श्यानता बढ़ती है।
2. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, पृष्ठ तनाव (Surface tension) किसी द्रव के पृष्ठ पर एकांक लंबाई पर लगने वाला बल है, और यदि पानी में कोई साबुन या डिटर्जेंट मिलाया जाए, तो पानी का पृष्ठ तनाव कम हो जाता है, जिससे वह मैल को अधिक प्रभावी ढंग से साफ कर पाता है।
3. आर्किमिडीज के सिद्धांत के अनुसार, जब कोई वस्तु किसी तरल में आंशिक या पूर्ण रूप से डुबोई जाती है, तो वह अपने द्वारा हटाए गए तरल के भार के बराबर ऊपर की ओर एक उत्प्लावक बल का अनुभव करती है, जिसका केंद्र विस्थापित तरल के द्रव्यमान केंद्र पर संकेंद्रित होता है जिसे 'उत्प्लावन केंद्र' (Center of Buoyancy) कहते हैं।
4. यदि किसी कृत्रिम उपग्रह के अंदर पूर्ण भारहीनता की स्थिति हो, तो केशिका नली (Capillary tube) में द्रव नली की केवल एक निश्चित कम ऊँचाई तक ही चढ़ेगा, क्योंकि गुरुत्वाकर्षण बल शून्य होने के कारण केशिकत्व की घटना पूरी तरह समाप्त हो जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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ऊष्मा और तापमापी (Heat and Thermometry) के सिद्धांतों तथा ऊष्मागतिकी के नियमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. स्थिर आयतन गैस तापमापी (Constant-volume gas thermometer) में गैस के दाब और ताप के रैखिक संबंध का उपयोग किया जाता है, और यह अत्यंत उच्च तापमान (जैसे 500°C से अधिक) को मापने के लिए प्लैटिनम प्रतिरोध तापमापी की तुलना में अधिक संवेदनशील और सटीक होता है।
2. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, जल का त्रिक बिंदु (Triple Point of Water), जिस पर बर्फ, द्रव जल और जलवाष्प सह-अस्तित्व में होते हैं, का मान 273.16 K होता है, और इसे केल्विन पैमाने के निर्धारण में एक मानक संदर्भ बिंदु के रूप में उपयोग किया जाता है।
3. ऊष्मागतिकी के शून्यवें नियम (Zeroth Law of Thermodynamics) के अनुसार, यदि दो निकाय किसी तीसरे निकाय के साथ अलग-अलग तापीय साम्य में हैं, तो वे दोनों निकाय आपस में भी तापीय साम्य में होंगे, और यही नियम तापमान की संकल्पना का आधार प्रदान करता है।
4. रुष्म प्रक्रम (Adiabatic process) के दौरान निकाय और परिवेश के बीच ऊष्मा का आदान-प्रदान शून्य होता है ($dQ = 0$), जिसके कारण यदि किसी आदर्श गैस का अचानक संपीड़न (Compression) किया जाए, तो उसकी आंतरिक ऊर्जा में कमी आती है और उसका ताप घट जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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ऊष्मागतिकी के प्रथम और द्वितीय नियमों तथा तापमापी के सिद्धांतों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम ऊर्जा संरक्षण का ही एक व्यापक रूप है, जिसके अनुसार किसी निकाय को दी गई ऊष्मा ($dQ$) निकाय की आंतरिक ऊर्जा में परिवर्तन ($dU$) और निकाय द्वारा किए गए कार्य ($dW$) के योग के बराबर होती है ($dQ = dU + dW$)।
2. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, ऊष्मागतिकी का द्वितीय नियम यह स्पष्ट करता है कि ऊष्मा का स्वतः प्रवाह कम तापमान वाले पिंड से अधिक तापमान वाले पिंड की ओर संभव है, बशर्ते बाहरी कार्य न किया जाए।
3. स्थिर आयतन गैस तापमापी (Constant-volume gas thermometer) में गैस के दाब में परिवर्तन के आधार पर तापमान मापा जाता है, और यह अत्यंत उच्च तापमान (जैसे 500°C से अधिक) को मापने के लिए प्लैटिनम प्रतिरोध तापमापी की तुलना में अधिक संवेदनशील और सटीक होता है।
4. रुष्म प्रक्रम (Adiabatic process) के दौरान निकाय और परिवेश के बीच ऊष्मा का कोई आदान-प्रदान नहीं होता ($dQ = 0$), जिसके कारण यदि किसी गैस का अचानक संपीड़न (Compression) किया जाए, तो उसकी आंतरिक ऊर्जा और ताप दोनों में वृद्धि हो जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मानव शरीर में होने वाले विभिन्न संक्रामक रोगों, उनके रोगजनकों (Pathogens) और उनके नैदानिक लक्षणों या परीक्षणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. डिप्थीरिया (Diphtheria) एक जीवाणु जनित संक्रमण है जो कॉर्नेबैक्टीरियम डिप्थीरिया (Corynebacterium diphtheriae) के कारण होता है, और इसके प्रभाव से श्वसन मार्ग में एक विशिष्ट 'सफेद-धूसर झिल्ली' (Pseudomembrane) का निर्माण होता है जो दम घुटने का कारण बन सकती है।
2. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, टिटनेस (Tetanus) का रोगजनक 'क्लोस्ट्रीडियम टिटानी' (Clostridium tetani) एक वायवीय (Aerobic) जीवाणु है, जो कंकाल पेशियों में अनैच्छिक और दर्दनाक ऐंठन (Lockjaw) उत्पन्न करता है।
3. फाइलेरियासिस (Lymphatic Filariasis) का संक्रमण थ्रेड-जैसी फाइरियल कृमियों (जैसे वुचेरेरिया बैनक्रॉफ्टी) के कारण होता है, जो क्यूलैस मच्छरों द्वारा संचरित होते हैं और इसके दीर्घकालिक प्रभाव से अंगों में भारी सूजन (हाथीपांव) हो जाती है।
4. ऐस्केरिस (Ascaris lumbricoides) एक अंतःपरजीवी गोलकृमि है जो मुख्य रूप से संदूषित जल और सब्जियों के माध्यम से मनुष्य की आंत्र में प्रवेश करता है, जिससे आंतरिक रक्तस्राव, पेशीय दुर्बलता और आंत्र का अवरोध उत्पन्न हो सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के तंत्र और पादप हार्मोन्स की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और इनमें मुख्य पादप शरीर गेमेटोफाइट (युग्मकोद्भिद्) होता है जो बीजाणुद्भिद (स्पोरोफाइट) पर पोषण के लिए आंशिक रूप से निर्भर रहता है।
2. C3 पौधों की तुलना में C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर नगण्य होती है, जिसका मुख्य कारण यह है कि उनमें रुबिको (RuBisCO) एंजाइम बंडल शीथ कोशिकाओं में उच्च सांद्रता में पाया जाता है जहाँ कार्बन डाइऑक्साइड का सांद्रण मैलिक अम्ल के डीकार्बोक्सिलेशन द्वारा बढ़ जाता है।
3. ऑक्सिन (जैसे IAA) त्रेपोट्रॉपिज्म और फोटोट्रॉपिज्म की क्रियाओं को नियंत्रित करता है, जहाँ प्रकाश के विपरीत दिशा में ऑक्सिन का पार्श्व वितरण अधिक हो जाने के कारण त्रेपोट्रॉपिक वक्रता उत्पन्न होती है, जिसे डार्विन और उनके पुत्र द्वारा कैनरी ग्रास के कोलियोप्टाइल पर किए गए प्रयोगों से समझा गया था।
4. जिबरेलिन (Gibberellin) आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में internode (पर्वान्तर) के दीर्घीकरण को प्रेरित करके उनकी लंबाई बढ़ाते हैं, और ये बीज अंकुरण के दौरान एल्यूरोन परत पर प्रभाव डालकर अल्फा-एमाइलेज जैसे हाइड्रोलिटिक एंजाइमों के संश्लेषण को उत्प्रेरित करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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कोशिका का ऊर्जा गृह किसे कहा जाता है?
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