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Indian Polity
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शीशा (कांच) क्या है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
भौतिकी में कांच को एक 'अतिशीतित द्रव' (Supercooled Liquid) माना जाता है।
Related Questions
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भारतीय संविधान में 'प्रथम संशोधन' किस वर्ष हुआ था?
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भारतीय संविधान के प्रथम भाग के अंतर्गत 'संघ एवं उसके राज्य क्षेत्र' (अनुच्छेद 1-4) और राज्यों के पुनर्गठन से संबंधित विभिन्न आयोगों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. धर आयोग (लिंक्विस्टिक प्रोविंस कमीशन, 1948) ने राज्यों के पुनर्गठन के लिए भाषा के आधार को पूर्ण रूप से अस्वीकार करते हुए प्रशासनिक सुविधा, भौगोलिक समरूपता और वित्तीय आत्मनिर्भरता को मुख्य आधार बनाने की संस्तुति की थी।
2. जे.वी.पी. समिति (जवाहरलाल नेहरू, वल्लभभाई पटेल और पट्टाभि सीतारमैया), जिसने अप्रैल 1949 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की, ने भी भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन के विचार को औपचारिक रूप से खारिज कर दिया था।
3. न्यायमूर्ति फज़ल अली आयोग (राज्य पुनर्गठन आयोग, 1953) ने अपनी रिपोर्ट में भाषा को राज्यों के पुनर्गठन का एकमात्र और सर्वोपरि आधार स्वीकार किया, जिसके आधार पर 1st November 1956 को 14 राज्यों और 6 केंद्र शासित प्रदेशों का गठन किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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राज्य की कार्यपालिका के संदर्भ में राज्यपाल की क्षमादान शक्तियों, अध्यादेश निर्माण तथा मुख्यमंत्री की संवैधानिक स्थिति के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 161 के तहत राज्यपाल को राज्य की कार्यकारी शक्ति के विस्तार वाले विषयों से संबंधित विधियों के विरुद्ध अपराध के लिए दोषसिद्ध ठहराए गए किसी व्यक्ति के दंड को क्षमा करने, उसका प्रविलंबन, विराम या परिहार करने की शक्ति प्राप्त है, किंतु राज्यपाल को मृत्युदंड (Death Sentence) के मामले में क्षमादान देने की शक्ति प्राप्त नहीं है और न ही वह सेना न्यायालय (Court Martial) द्वारा दिए गए दंड को माफ कर सकता है।
2. अनुच्छेद 213 के अनुसार राज्यपाल द्वारा प्रख्यापित अध्यादेश की शक्ति राज्य विधानमंडल द्वारा पारित किसी अधिनियम के समान ही होती है, किंतु यदि ऐसा अध्यादेश किसी ऐसे विषय पर है जिसके लिए संविधान के तहत राज्य विधानमंडल द्वारा विधेयक पर राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति आवश्यक होती, तो राज्यपाल ऐसा अध्यादेश राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित रखे बिना अपनी मर्जी से प्रख्यापित नहीं कर सकता।
3. अनुच्छेद 164 के प्रावधानों के अनुसार मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राज्यपाल, मुख्यमंत्री की सलाह पर करता है, तथा संविधान में यह स्पष्ट रूप से उपबंधित किया गया है कि मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की कुल संख्या राज्य विधानसभा के कुल सदस्यों के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी, और छोटे राज्यों के लिए मंत्रिपरिषद की न्यूनतम संख्या मुख्यमंत्री सहित 12 निर्धारित की गई है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान की प्रस्तावना (उद्देशिका) और उसकी विधिक प्रकृति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा 13 दिसंबर 1946 को संविधान सभा में प्रस्तुत और 22 जनवरी 1947 को स्वीकृत 'उद्देश्य प्रस्ताव' (Objectives Resolution) का ही परिष्कृत रूप भारतीय संविधान की प्रस्तावना है।
2. 'बेरूबारी यूनियन वाद (1960)' में उच्चतम न्यायालय ने यह निर्णय दिया था कि प्रस्तावना संविधान का एक अभिन्न अंग है और इसमें अनुच्छेद 368 के तहत संशोधन किया जा सकता है।
3. प्रस्तावना में उल्लिखित 'सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक' न्याय के आदर्श को रूस की क्रांति (1917) से प्रेरित होकर शामिल किया गया था, जबकि 'स्वतंत्रता, समता और बंधुत्व' के आदर्श फ्रांस की क्रांति (1789) से लिए गए हैं।
4. संविधान की प्रस्तावना न तो विधायिका की शक्तियों पर कोई प्रतिबंध लगाती है और न ही यह न्यायालय द्वारा न्यायोचित (Justiciable) है, अर्थात इसके प्रावधानों को किसी भी न्यायालय में स्वतः प्रवर्तित नहीं कराया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के भाग-IV के अंतर्गत वर्णित राज्य के नीति निर्देशक तत्वों (DPSP - अनुच्छेद 36-51) की संवैधानिक प्रकृति, न्यायिक समीक्षा तथा उनके व्यावहारिक क्रियान्वयन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 37 में यह स्पष्ट रूप से उपबंधित है कि नीति निर्देशक तत्व देश के शासन में मूलभूत हैं और विधि बनाने में इन तत्वों को लागू करना राज्य का कर्तव्य होगा, किंतु ये किसी भी न्यायालय द्वारा न्यायसंगत (Justiciable) नहीं हैं, जिसका अर्थ है कि इनके क्रियान्वयन न होने पर न्यायालय द्वारा इन्हें प्रवर्तित नहीं कराया जा सकता है।
2. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा नीति निर्देशक तत्वों में कुछ नए प्रावधान जोड़े गए, जिनके तहत अनुच्छेद 39A (समान न्याय और निःशुल्क विधिक सहायता), अनुच्छेद 43A (उद्योगों के प्रबंधन में श्रमिकों की भागीदारी), और अनुच्छेद 48A (पर्यावरण का संरक्षण और संवर्धन तथा वन एवं वन्यजीवों की रक्षा) को शामिल किया गया था।
3. सर्वोच्च न्यायालय ने अपने ऐतिहासिक निर्णयों (विशेषकर 'मिनर्वा मिल्स वाद', 1980) में यह प्रतिपादित किया है कि मूल अधिकार और नीति निर्देशक तत्व एक-दूसरे के पूरक हैं, और यदि संसद अनुच्छेद 39(b) तथा 39(c) में वर्णित सामाजिक-आर्थिक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए कोई कानून बनाती है जो अनुच्छेद 14 या अनुच्छेद 19 के मूल अधिकारों का उल्लंघन करता है, तो ऐसा कानून सर्वोच्च न्यायालय द्वारा स्वतः असंवैधानिक घोषित कर दिया जाएगा और इसे कोई विधिक संरक्षण प्राप्त नहीं होगा।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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