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चटगाँव शस्त्रागार कांड के नायक कौन थे?

Detailed Explanation

चटगाँव शस्त्रागार कांड (1930) का नेतृत्व सूर्य सेन ('मास्टरदा') ने किया था।
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→ बिहार में जनसंख्या घनत्व, नगरीकरण के स्तर तथा जनगणना 2011 के प्रासंगिक आंकड़ों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, बिहार का कुल जनसंख्या घनत्व 1106 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है, जो भारत के सभी राज्यों में सर्वाधिक है, जबकि राष्ट्रीय औसत जनसंख्या घनत्व 382 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है। 2. बिहार में कुल नगरीकरण का स्तर मात्र 11.29 प्रतिशत है, जो देश के बड़े राज्यों में सबसे कम (या न्यूनतम) में से एक है, तथा यहाँ की कुल आबादी का लगभग 88.71 प्रतिशत हिस्सा ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करता है। 3. राज्य के जिलों में सर्वाधिक नगरीकृत जिला पटना है, जहाँ कुल जनसंख्या का लगभग 43.1 प्रतिशत भाग शहरी क्षेत्रों में रहता है, जबकि सबसे कम नगरीकृत जिला समस्तीपुर है। 4. जनगणना 2011 के अनुसार, बिहार में 10 लाख से अधिक आबादी वाले (Million-plus) नगरों की कुल संख्या दो है—पटना और गया, तथा राज्य में वैधानिक नगरों (Statutory Towns) की कुल संख्या 200 से अधिक है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं? → भारतीय संविधान का अनुच्छेद 280 किससे संबंधित है? → भारत के महान्यायवादी (Attorney General for India) और संसद (लोकसभा एवं राज्यसभा) की विधायी शक्तियों एवं प्रक्रियाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 76 के अनुसार महान्यायवादी भारत सरकार का सर्वोच्च विधि अधिकारी होता है, जिसे भारत के राज्यक्षेत्र के सभी न्यायालयों में सुनवाई का अधिकार है तथा उसे संसद के दोनों सदनों या उनकी संयुक्त बैठकों में बोलने और भाग लेने का अधिकार प्राप्त है, किंतु उसे किसी भी स्थिति में मतदान (Vote) करने का अधिकार नहीं है। 2. अनुच्छेद 88 के प्रावधानों के अंतर्गत महान्यायवादी को संसद के सदनों की किसी भी समिति का सदस्य बनाया जा सकता है और उसे उस समिति की बैठकों में भी बोलने तथा विचार-विमर्श में भाग लेने का अधिकार होता है, बशर्ते उसे समिति में भी मताधिकार प्राप्त नहीं होता। 3. लोकसभा और राज्यसभा के सदनों की बैठकों में कोरम (गणपूर्ति) सदन की कुल सदस्य संख्या का दसवाँ हिस्सा (1/10th) होता है, और यदि किसी सदन की बैठक में कोरम पूरा नहीं है, तो पीठासीन अधिकारी का यह कर्तव्य है कि वह सदन को स्थगित कर दे या बैठक को तब तक के लिए रोक दे जब तक कोरम पूरा न हो जाए। 4. धन विधेयक (Money Bill) केवल लोकसभा में ही पुनःस्थापित किया जा सकता है और राज्यसभा इस विधेयक को अस्वीकार या संशोधित कर सकती है तथा अधिकतम 30 दिनों की अवधि तक अपने पास रोक सकती है, जिसके पश्चात राज्यसभा की सहमति के बिना भी वह दोनों सदनों से पारित मान लिया जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं? → असहयोग आंदोलन (1920-22) और उसके स्थगन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. नागपुर अधिवेशन (दिसंबर 1920) में कांग्रेस के संविधान में परिवर्तन किया गया जिसके तहत 'शांतिपूर्ण और वैध साधनों' द्वारा 'स्वराज' की प्राप्ति को कांग्रेस का लक्ष्य बनाया गया, तथा प्रांतीय कांग्रेस कमेटियों का गठन भाषाई आधार पर किया गया। 2. चौरी-चौरा कांड (5 फरवरी 1922) की हिंसक घटना के बाद महात्मा गांधी ने बारडोली में कांग्रेस की बैठक में असहयोग आंदोलन को तत्काल प्रभाव से वापस लेने की घोषणा की, जिससे देश के कई युवा नेताओं जैसे सुभाष चंद्र बोस और चित्तरंजन दास ने इस निर्णय का पूर्ण समर्थन किया। 3. आंदोलन के स्थगन के पश्चात चित्तरंजन दास और मोतीलाल नेहरू ने गया अधिवेशन (1922) के दौरान कांग्रेस के भीतर ही 'स्वराज पार्टी' की स्थापना की, जिसका उद्देश्य परिषदों में प्रवेश कर सरकार की नीतियों में बाधा डालना था। 4. असहयोग आंदोलन के दौरान पहली बार बड़े पैमाने पर महिलाओं, विद्यार्थियों और व्यापारियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया, किंतु मुस्लिम समुदाय की भागीदारी इस आंदोलन में नगण्य रही क्योंकि खिलाफत आंदोलन का इससे कोई संबंध नहीं था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं? → प्राचीन एवं मध्यकालीन भारतीय इतिहास के विभिन्न स्रोतों, अभिलेखों तथा विदेशी यात्रियों के विवरण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मौर्य सम्राट अशोक के अभिलेखों को सर्वप्रथम पढ़ने में वर्ष 1837 में जेम्स प्रिंसेप को सफलता मिली थी, जिसमें अधिकांश अभिलेखों में उनकी प्राकृत भाषा और ब्राह्मी लिपि का प्रयोग किया गया है, किंतु उत्तर-पश्चिम के अभिलेखों में खरोष्ठी, आर्मेनियाई और ग्रीक लिपियों का भी उपयोग मिलता है। 2. गुप्त सम्राट समुद्रगुप्त के 'प्रयाग प्रशस्ति' (इलाहाबाद स्तंभ लेख) की रचना उसके दरबारी कवि हरिषेण ने संस्कृत भाषा और चम्पू (गद्य-पद्य मिश्रित) शैली में की थी, जिसमें हूणों और शकों के विरुद्ध समुद्रगुप्त की विजयों का विस्तृत एवं प्रामाणिक विवरण मिलता है। 3. हर्षवर्धन के शासनकाल में भारत आने वाले चीनी यात्री ह्वेनसांग (Hiuen Tsang) ने अपनी यात्रा वृत्तांत 'सी-यू-की' (Si-Yu-Ki) में तत्कालीन भारतीय समाज, कानून व्यवस्था, शिक्षा के केंद्र (विशेषकर नालंदा विश्वविद्यालय) और बौद्ध धर्म की स्थिति का अत्यंत सजीव वर्णन किया है। 4. सल्तनत काल के प्रसिद्ध इतिहासकार मिनहाज-उस-सिराह द्वारा रचित ग्रंथ 'तकात-ए-नासिरी' में मुहम्मद गोरी की भारत विजय से लेकर सुल्तान नसरुद्दीन महमूद के शासनकाल तक का इतिहास प्रस्तुत किया गया है, और इस ग्रंथ का नाम सुल्तान नसिरुद्दीन महमूद के सम्मान में रखा गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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