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BPSC TRE 4.0
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ब्लीचिंग पाउडर का रासायनिक सूत्र क्या है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
ब्लीचिंग पाउडर कैल्शियम ऑक्सीक्लोराइड है।
Related Questions
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ध्वनि तरंगों और तरंग गति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ध्वनि तरंगें अनुदैर्ध्य (Longitudinal) यांत्रिक तरंगें होती हैं, जिनमें माध्यम के कणों का कंपन तरंग संचरण की दिशा के समानांतर होता है, और ये तरंगें ठोस, द्रव तथा गैस तीनों माध्यमों में गमन कर सकती हैं।
2. किसी माध्यम में ध्वनि की चाल माध्यम के प्रत्यास्थता (Elasticity) के वर्गमूल के सीधे आनुपातिक और उसके घनत्व (Density) के वर्गमूल के व्युत्क्रमानुपाती होती है, यही कारण है कि ध्वनि की चाल गैसों की तुलना में ठोस पदार्थों में अधिकतम होती है।
3. वायु में ध्वनि की चाल पर दाब (Pressure) के परिवर्तन का सीधा प्रभाव पड़ता है, अर्थात् यदि किसी गैस का दाब दोगुना कर दिया जाए, तो नियत तापमान पर ध्वनि की चाल भी दोगुनी हो जाती है।
4. जब ध्वनि तरंग एक माध्यम से दूसरे माध्यम में प्रवेश करती है, तो उसकी आवृत्ति (Frequency) और तरंगदैर्ध्य दोनों अपरिवर्तित रहते हैं, जबकि माध्यम बदलने के कारण उसकी चाल में परिवर्तन हो जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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बिहार के जनजातीय आंदोलनों, विशेष रूप से संथाल विद्रोह (1855-56), उलगुलान (मुण्डा विद्रोह, 1899-1900) और ताना भगत आंदोलन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संथाल विद्रोह के नेताओं (सिद्धू, कान्हा, चाँद और भैरव) ने ब्रिटिश शासन, महाजनों और दिकुओं के शोषण के विरुद्ध 'दामिन-इ-कोह' क्षेत्र में सशस्त्र संघर्ष का नेतृत्व किया था, जिसे दबाने के लिए बाद में ब्रिटिश सरकार ने 'संथाल परगना टेनेंसी एक्ट' (SPTA) के माध्यम से कुछ सुरक्षात्मक प्रावधान किए।
2. भगवान बिरसा मुण्डा के नेतृत्व में हुए 'उलगुलान' (महान हलचल) का मुख्य उद्देश्य 'खुटकट्टी' (सामूहिक भूमि व्यवस्था) प्रथा की पुनर्स्थापना करना और दिकुओं तथा ब्रिटिश कानूनों के शोषण से मुक्ति पाना था, जिसके परिणामस्वरूप 'छोटानगपुर काश्तकारी अधिनियम' (CNTA, 1908) अस्तित्व में आया।
3. जतरा भगत के नेतृत्व में प्रारंभ हुआ 'ताना भगत आंदोलन' एक उग्र सशस्त्र विद्रोह था, जिसने ब्रिटिश सत्ता को उखाड़ फेंकने के लिए हिंसा और हथियारों के उठाने का मार्ग चुना तथा कभी भी महात्मा गांधी के सविनय अवज्ञा आंदोलन से जुड़ाव महसूस नहीं किया।
4. ताना भगतों ने अहिंसक सत्याग्रह, सामाजिक सुधारों और मादक पदार्थों के बहिष्कार के माध्यम से ब्रिटिश शासन का विरोध किया था, और उन्होंने लगान अदायगी के विरुद्ध भी कड़ा रुख अपनाया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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पारिस्थितिकीय पिरामिड (Ecological Pyramids) और उनके प्रकारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ऊर्जा का पिरामिड (Pyramid of Energy) सदैव सीधा होता है, क्योंकि ऊर्जा का प्रवाह एकमार्गीय होता है और लिंडेनमैन के 10 प्रतिशत नियम (10% Law) के अनुसार प्रत्येक उच्च पोषण स्तर पर जाने पर ऊर्जा का ह्रास होता है।
2. जलीय पारितंत्र (Aquatic Ecosystem) में संख्या का पिरामिड (Pyramid of Numbers) सदैव उल्टा होता है, क्योंकि प्राथमिक उत्पादक (फाइटोप्लांकटन) की संख्या शाकाहारी जंतुओं (जूप्लांकटन) और मछलियों की तुलना में कम होती है।
3. वृक्ष पारितंत्र (Tree Ecosystem) में जैवभार का पिरामिड (Pyramid of Biomass) उल्टा (Inverted) बनता है, क्योंकि एक विशाल वृक्ष (उत्पादक) का जैवभार उस पर निर्भर रहने वाले शाकाहारी जीवों (पक्षियों और कीटों) की कुल मात्रा से बहुत अधिक होता है।
4. बायोम या वन पारितंत्र में ऊर्जा और जैवभार दोनों के पिरामिड सामान्यतः सीधे होते हैं, किंतु समुद्र में बायोमास का पिरामिड उल्टा पाया जा सकता है क्योंकि वहाँ फाइटोप्लांकटन का अल्पकालिक जैवभार जलीय जीवों के जैवभार से कम होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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घोघा के गोहिल राजपूत राजा मोखदजी गोहिल किसके समकालीन थे?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और केंद्रीय मंत्रिपरिषद के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अनुच्छेद 74 के अनुसार राष्ट्रपति को सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद होगी जिसका प्रमुख प्रधानमंत्री होगा, और राष्ट्रपति इस सलाह के अनुसार अपने कृत्यों का प्रयोग करेगा, बशर्ते राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद से ऐसी सलाह पर पुनर्विचार करने के लिए कह सकता है किंतु पुनर्विचार के पश्चात दी गई सलाह के अनुसार कार्य करने के लिए राष्ट्रपति बाध्य नहीं होता है।
2. उपराष्ट्रपति, जो राज्य सभा का पदेन सभापति होता है, जब संविधान के अनुच्छेद 65 के अधीन राष्ट्रपति के रूप में कार्य करता है या उसके कृत्यों का निर्वहन करता है, तब वह राज्य सभा के सभापति के रूप में किसी भी कर्तव्य का पालन नहीं करता है और उसे राज्य सभा के सभापति के रूप में मिलने वाले वेतन या भत्ते प्राप्त नहीं होते हैं।
3. केंद्रीय मंत्रिपरिषद के सदस्यों का व्यक्तिगत उत्तरदायित्व राष्ट्रपति के प्रति होता है (अनुच्छेद 75 के अनुसार वे राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करते हैं), जबकि सामूहिक उत्तरदायित्व लोकसभा के प्रति होता है।
4. यदि उपराष्ट्रपति का चुनाव उच्चतम न्यायालय द्वारा शून्य घोषित कर दिया जाता है, तो उपराष्ट्रपति के रूप में उस असीमित या विवादित अवधि के दौरान उसके द्वारा किए गए आधिकारिक कार्य अवैध (Invalid) हो जाते हैं और उन्हें न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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