BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

Civil services
38 views

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: (1) गुप्त काल के दौरान 'भूमि अनुदान' (अग्रहार) की प्रथा में अत्यधिक वृद्धि हुई। (2) इस काल में 'सामंतवाद' के उदय के स्पष्ट संकेत मिलने लगे थे। उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

गुप्त काल में ब्राह्मणों को दिए जाने वाले भूमि अनुदान में वृद्धि हुई, जो कालान्तर में सामंतवाद के उदय का आधार बनी।
Share:

Related Questions

→ U15 एवं U20 एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप 2026 में भारत ने कुल कितने पदक जीते हैं? → भाखड़ा-नांगल परियोजना किस नदी पर विकसित की गई है? → भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 352' के अंतर्गत राष्ट्रीय आपातकाल (National Emergency) की उद्घोषणा और इसके प्रभावों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा संपूर्ण भारत या उसके किसी भाग के लिए की जा सकती है, और वर्ष 1978 के 44वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा यह प्रावधान किया गया कि 'सशस्त्र विद्रोह' (Armed Rebellion) के आधार पर भी आपातकाल की घोषणा की जा सकती है (इससे पहले इस आधार के लिए 'आंतरिक अशांति' शब्द का प्रयोग किया जाता था)। 2. राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त सभी छह मौलिक अधिकार स्वतः (Suo motu) निलंबित हो जाते हैं, और इसके लिए राष्ट्रपति द्वारा किसी अलग औपचारिक आदेश की आवश्यकता नहीं होती है। 3. संविधान के अनुच्छेद 359 के तहत राष्ट्रपति को यह अधिकार प्राप्त है कि वह एक आदेश जारी करके राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान अनुच्छेद 20 और अनुच्छेद 21 द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन को छोड़कर, अन्य किसी भी मौलिक अधिकार को निलंबित कर सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय अर्थव्यवस्था और सतत विकास के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय हरित अधिकरण' (National Green Tribunal - NGT) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राष्ट्रीय हरित अधिकरण की स्थापना राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 के अंतर्गत पर्यावरण संरक्षण, वनों और अन्य प्राकृतिक संसाधनों (जिनमें प्रवर्तनीय विधिक अधिकार भी शामिल हैं) के संरक्षण से संबंधित मामलों के प्रभावी और तीव्र निपटान के लिए की गई थी। 2. यह अधिकरण सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अंतर्गत निर्धारित नागरिक न्यायालय की प्रक्रिया से कड़ाई से बंधा हुआ है और यह 'प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों' (Principles of Natural Justice) के आधार पर कार्य करने के लिए बाध्य नहीं है। 3. राष्ट्रीय हरित अधिकरण के किसी आदेश, निर्णय या अवार्ड से व्यथित कोई भी व्यक्ति सर्वोच्च न्यायालय में अपील दायर कर सकता है, किंतु यह अपील आदेश की तारीख से साठ दिनों के भीतर की जानी अनिवार्य है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय पर्यावरण कानून और 'राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड' (National Board for Wildlife - NBWL) तथा 'वन संरक्षण अधिनियम, 1980' के विधिक एवं संस्थागत ढांचे के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड' (NBWL) एक सांविधिक निकाय (Statutory Body) है जिसका गठन वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के प्रावधानों के तहत किया गया है, और इसकी अध्यक्षता स्वयं देश के प्रधानमंत्री करते हैं। 2. वन्यजीव अभ्यारण्यों और राष्ट्रीय उद्यानों की सीमाओं के भीतर किसी भी प्रकार के गैर-वानिकी गतिविधियों या वाणिज्यिक उपयोग की अनुमति देने के लिए 'स्थाई समिति' (Standing Committee) के अनुमोदन की आवश्यकता होती है, और इस स्थाई समिति की अध्यक्षता केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री द्वारा की जाती है। 3. 'वन संरक्षण अधिनियम, 1980' के तहत किसी भी आरक्षित वन (Reserved Forest) या गैर-वन भूमि को गैर-वानिकी उद्देश्यों के लिए उपयोग करने हेतु केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति अनिवार्य है, और इस अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करने पर राज्यों को यह शक्ति प्राप्त है कि वे बिना केंद्र की अनुमति के वन भूमि का डायवर्जन कर सकते हैं यदि मामला लोक कल्याण से जुड़ा हो। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.