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14 अप्रैल 2026 को डॉ. बी.आर. अंबेडकर की 135वीं जयंती मनाई गई। डॉ. बी.आर. अंबेडकर को ‘भारत रत्न’ (मरणोपरांत) किस वर्ष प्रदान किया गया था?
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Detailed Explanation
डॉ. बी.आर. अंबेडकर को वर्ष 1990 में मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 76' के अंतर्गत भारत के 'महान्यायवादी' (Attorney General for India) के पद, उसकी शक्तियों और विशेषाधिकारों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. महान्यायवादी की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और वह व्यक्ति इस पद के लिए योग्य होना चाहिए जिसे उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त होने के लिए अर्हता प्राप्त हो, तथा संविधान में महान्यायवादी के कार्यकाल को निश्चित किया गया है और उसे हटाने की प्रक्रिया का भी स्पष्ट उल्लेख किया गया है।
2. महान्यायवादी को भारत के सभी न्यायालयों में सुनवाई का अधिकार प्राप्त है, और वह संसद के दोनों सदनों या उनकी संयुक्त बैठकों तथा संसद की किसी भी समिति (जिसका वह सदस्य बनाया जाए) की बैठकों में भाग ले सकता है और बोल सकता है, किंतु उसे संसद में मतदान करने का कोई अधिकार नहीं होता है।
3. महान्यायवादी भारत सरकार का पूर्णकालिक विधिक सलाहकार होता है, और उसे किसी भी अन्य निजी विधि प्रैक्टिस या ऐसे मामले में सलाह देने से पूर्णतः प्रतिबंधित किया जाता है जिसमें भारत सरकार के विरुद्ध हित का टकराव (Conflict of interest) हो सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय अर्थव्यवस्था और सतत विकास के संदर्भ में, 'सार्वभौमिक बुनियादी आय' (Universal Basic Income - UBI) और भारत में इसके संभावित कार्यान्वयन से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सार्वभौमिक बुनियादी आय (UBI) की अवधारणा के मूल में यह मान्यता होती है कि देश के सभी नागरिकों को बिना किसी पूर्व शर्त के एक निश्चित अंतराल पर नियमित रूप से नकद हस्तांतरण (Cash Transfer) के रूप में एक न्यूनतम आय की गारंटी दी जानी चाहिए, जिससे काम करने की उनकी इच्छा और उत्पादकता पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता।
2. भारत के संदर्भ में, आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey) में UBI का समर्थन करते हुए यह सुझाव दिया गया था कि यदि इसे पूर्ण रूप से लागू किया जाए तो लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (TPDS) और महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) जैसी सभी मौजूदा कल्याणकारी योजनाओं को बिना किसी अपवाद के तत्काल समाप्त कर देना चाहिए क्योंकि UBI उनका एकमात्र और पूर्ण विकल्प है।
3. UBI के समर्थकों का तर्क है कि यह पारंपरिक कल्याणकारी योजनाओं की तुलना में प्रशासनिक अक्षमताओं और रिसाव (Leakages) को काफी हद तक कम करता है, क्योंकि यह प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) वास्तुकला और जन धन-आधार-मोबाइल (JAM) ट्रिनिटी का उपयोग करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था के अंतर्गत भारतीय संविधान की 'सातवीं अनुसूची' (Seventh Schedule) के तहत विधायी शक्तियों के वितरण तथा अवशिष्ट शक्तियों (Residuary Powers) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 248 के अनुसार, संसद को उन सभी मामलों के संबंध में कानून बनाने की अनन्य शक्ति प्राप्त है जो समवर्ती सूची या राज्य सूची में स्पष्ट रूप से प्रगणित नहीं हैं, और इस 'अवशिष्ट शक्ति' के अंतर्गत कर-रोपण (Taxation) करने की शक्ति भी विधायी रूप से केवल और केवल संसद में ही निहित है।
2. 'यूनियन ऑफ इंडिया बनाम हरभजन सिंह ढिल्लों (1971)' और बाद के अन्य न्यायिक निर्णयों में उच्चतम न्यायालय ने यह स्पष्ट किया है कि यदि कोई विषय किसी भी सूची (संघ सूची, राज्य सूची या समवर्ती सूची) की प्रविष्टि में स्पष्ट रूप से शामिल नहीं है, तो संसद को अनुच्छेद 248 और अनुच्छेद 246 की प्रविष्टि 97 (संघ सूची) के तहत उस पर कानून बनाने की पूर्ण शक्ति प्राप्त है, जिसमें कर लगाने की शक्ति भी शामिल है।
3. राज्य विधानमंडलों को अपनी संबंधित राज्य सूची (सूची-II) के विषयों पर कानून बनाने का अधिकार है, किंतु 'कराधान' (Taxation) के मामले में राज्य सूची की प्रविष्टियाँ पूरी तरह से स्व-निहित (Self-contained) नहीं हैं और राज्य विधानमंडल समवर्ती सूची के विषयों पर भी अपनी कर-रोपण शक्तियाँ का प्रयोग कर सकते हैं यदि संसद ने उस पर कोई कानून नहीं बनाया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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