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किस भारतीय एथलीट ने 'रॉटरडैम मैराथन 2026' में 48 साल पुराना राष्ट्रीय मैराथन रिकॉर्ड तोड़ा है?

Detailed Explanation

गोपी थोनाकल ने रॉटरडैम मैराथन 2026 में 48 साल पुराना राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ा है।
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→ भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XX' के अंतर्गत 'संविधान संशोधन' की प्रक्रिया (अनुच्छेद 368) और उसकी सीमाओं के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत संसद को संविधान के किसी भी उपबंध में संशोधन करने की शक्ति प्राप्त है, और संशोधन विधेयक संसद के किसी भी सदन में केवल राष्ट्रपति की पूर्व सिफ़ारिश से ही पुनःस्थापित किया जा सकता है। 2. संविधान के कुछ विशिष्ट उपबंधों, जैसे राष्ट्रपति के निर्वाचन की प्रक्रिया या संघ और राज्यों की कार्यपालिका शक्तियों के विस्तार से संबंधित संशोधनों के लिए, संसद के दोनों सदनों द्वारा विशेष बहुमत के साथ-साथ देश के कुल राज्यों में से कम-से-कम आधे राज्यों के विधानमंडलों द्वारा साधारण बहुमत से अनुसमर्थन (Ratification) होना अनिवार्य है। 3. उच्चतम न्यायालय द्वारा 'केशवानंद भारती वाद' (1973) में प्रतिपादित 'संविधान की मूल संरचना' (Basic Structure) के सिद्धांत के अंतर्गत न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) की शक्ति और मौलिक अधिकारों तथा नीति निर्देशक तत्वों के बीच संतुलन को शामिल किया गया है, और संसद संविधान संशोधन के माध्यम से भी मूल संरचना का उल्लंघन नहीं कर सकती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 72' के तहत राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति (Pardoning Power) और 'अनुच्छेद 161' के तहत राज्यपाल की क्षमादान शक्ति के बीच तुलनात्मक प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति का दायरा उन मामलों तक विस्तारित है जहाँ सजा या दंड ऐसे कानून के विरुद्ध दिए गए अपराध के लिए हो जो संघ की कार्यकारी शक्ति के विस्तार क्षेत्र में आता है, जबकि राज्यपाल के पास मृत्युदंड (Death Sentence) को क्षما करने की वैधानिक शक्ति कभी नहीं होती है, भले ही संबंधित राज्य का कानून मृत्युदंड का प्रावधान करता हो। 2. न्यायालय द्वारा दी गई किसी भी सैन्य अदालत या कोर्ट-मार्शल (Court-martial) द्वारा दिए गए दंड या सजा के मामले में राष्ट्रपति को क्षमादान, प्रविलंबन या परिहार देने की अनन्य शक्ति प्राप्त है, जबकि राज्यपाल को कोर्ट-मार्शल के निर्णयों के विरुद्ध ऐसी कोई शक्ति प्राप्त नहीं है। 3. उच्चतम न्यायालय के निर्णयों के अनुसार, राष्ट्रपति और राज्यपाल दोनों की क्षमादान शक्तियों के प्रयोग की न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) की जा सकती है, और यदि यह पाया जाता है कि निर्णय बिना किसी युक्तियुक्त आधार के, या राजनीतिक पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर, या प्रासंगिक तथ्यों को नजरअंदाज करके लिया गया है, तो न्यायालय उस आदेश को रद्द कर सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → उच्च न्यायालय को रिट जारी करने की शक्ति किस अनुच्छेद के तहत प्राप्त है? → मिस्र की राजधानी काहिरा किस नदी के किनारे स्थित है? → भारतीय अर्थव्यवस्था और सतत विकास के संदर्भ में, 'सार्वभौमिक बुनियादी आय' (Universal Basic Income - UBI) की अवधारणा और इसके प्रभावों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. सार्वभौमिक बुनियादी आय एक ऐसी सामाजिक कल्याणकारी अवधारणा है जिसमें बिना किसी पूर्व शर्त, कार्य की बाध्यता या साधन-परीक्षण (Means-testing) के, देश के प्रत्येक नागरिक को एक निश्चित अंतराल पर नियमित रूप से नकद हस्तांतरण (Cash Transfer) प्रदान किया जाता है। 2. आर्थिक सर्वेक्षण (2016-17) में UBI को भारत में पारंपरिक लक्षित सब्सिडी प्रणालियों के एक व्यवहार्य विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया गया था, जिसमें यह तर्क दिया गया था कि यह गरीबी उन्मूलन में अधिक प्रभावी हो सकता है और इससे लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (TPDS) या उर्वरक सब्सिडी में होने वाले प्रशासनिक रिसाव (Leakage) को समाप्त किया जा सकता है। 3. UBI के समर्थकों का यह मुख्य दृष्टिकोण रहता है कि यह महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता और सौदेबाजी की शक्ति में सुधार करता है, किंतु आलोचकों का मानना है कि इसके कार्यान्वयन से श्रम आपूर्ति पर प्रतिकूल प्रभाव (Adverse Labour Supply Effects) पड़ सकता है और इसके कारण उत्पन्न होने वाला भारी राजकोषीय बोझ देश के स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे उत्पादक सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के वित्तपोषण को गंभीर रूप से बाधित कर सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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