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उच्च न्यायालय को रिट जारी करने की शक्ति किस अनुच्छेद के तहत प्राप्त है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
उच्च न्यायालय अनुच्छेद 226 के तहत रिट जारी कर सकते हैं।
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धन का निष्कासन (Drain Theory) का सिद्धांत किसने दिया था?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 200' और 'अनुच्छेद 201' के अंतर्गत राज्य के राज्यपाल की विधायी शक्तियों (Legislative Powers of the Governor) तथा राज्य विधायिका द्वारा पारित विधेयकों पर उसकी अनुमति के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जब राज्य विधायिका द्वारा कोई विधेयक पारित कर राज्यपाल के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है, तो राज्यपाल के पास यह शक्ति होती है कि वह विधेयक पर अपनी अनुमति दे सकता है, अनुमति रोक सकता है, या विधेयक को (यदि वह धन विधेयक नहीं है) राज्य विधायिका के पुनर्विचार के लिए वापस भेज सकता है, किंतु यदि विधायिका संशोधन सहित या बिना संशोधन के विधेयक को दोबारा पारित कर देती है, तो राज्यपाल उस पर अनुमति रोकने के लिए बाध्यकारी रूप से स्वतंत्र नहीं रहता है, बल्कि उसे अनुमति देनी ही पड़ती है।
2. राज्यपाल राज्य विधायिका द्वारा पारित किसी विधेयक को भारत के राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित (Reserve) कर सकता है, और संविधान में ऐसे मामलों की कोई निश्चित सूची नहीं दी गई है जिनके तहत राज्यपाल के लिए विधेयक को राष्ट्रपति के पास भेजना अनिवार्य हो, सिवाय उन परिस्थितियों के जहाँ विधेयक का उपबंध उच्च न्यायालय की शक्तियों को इस प्रकार अल्पकालीन या सीमित करता है कि उससे संविधान द्वारा उच्च न्यायालय कोप्रदत्त स्थिति खतरे में पड़ जाए।
3. सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों के अनुसार, राज्यपाल द्वारा किसी विधेयक को राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित करने का निर्णय पूरी तरह से उसका स्वविवेक (Individual Discretion) होता है, और इस निर्णय की न्यायसंगतता या वैधता की न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) किसी भी परिस्थिति में नहीं की जा सकती है, भले ही यह राज्य मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह के विपरीत क्यों न हो।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XV' के अंतर्गत 'निर्वाचन' (Elections - अनुच्छेद 324 से 329A) तथा भारत के निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 324 के अनुसार निर्वाचन आयोग एक स्थायी और स्वतंत्र निकाय है, जिसमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त और उतने ही अन्य निर्वाचन आयुक्त होते हैं, जितने समय-समय पर राष्ट्रपति द्वारा तय किए जाते हैं, और मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया और उसके अधिकार सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के समान ही होते हैं।
2. निर्वाचन आयोग के अन्य निर्वाचन आयुक्तों या क्षेत्रीय आयुक्तों को मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सिफारिश के बिना राष्ट्रपति द्वारा उनके पद से किसी भी समय हटाया जा सकता है, क्योंकि संविधान उन्हें मुख्य निर्वाचन आयुक्त के समान विधिक सुरक्षा या महाभियोग जैसी प्रक्रिया प्रदान नहीं करता है।
3. जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (Representation of the People Act, 1951) की धारा 123 के अंतर्गत 'भ्रष्ट आचरण' (Corrupt Practices) की परिभाषा में केवल जाति, नस्ल, समुदाय या भाषा के आधार पर वोट मांगना ही शामिल है, और यदि कोई उम्मीदवार अपने प्रतिद्वंद्वी के निजी जीवन या उसके व्यक्तिगत चरित्र से जुड़े पहलुओं पर बयान देता है, तो वह इस धारा के तहत भ्रष्ट आचरण की श्रेणी में नहीं आता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 356' (राष्ट्रपति शासन) और इससे संबंधित प्रावधानों तथा 'एस.आर. बोम्मई बनाम भारत संघ (1994)' मामले के ऐतिहासिक निर्णय के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत यदि राष्ट्रपति को किसी राज्य के राज्यपाल से रिपोर्ट मिलने पर या अन्यथा यह समाधान हो जाता है कि ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है जिसमें राज्य की सरकार संविधान के प्रावधानों के अनुसार नहीं चलाई जा सकती है, तो राष्ट्रपति उस राज्य के शासन को अपने हाथ में ले सकते हैं, किंतु इस उद्घोषणा को संसद के दोनों सदनों द्वारा इसके जारी होने की तारीख से 'दो महीनों' के भीतर अनुमोदित किया जाना अनिवार्य है।
2. 'एस.आर. बोम्मई बनाम भारत संघ (1994)' मामले में सर्वोच्च न्यायालय की नौ-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने यह स्पष्ट किया कि राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की उद्घोषणा न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) के दायरे से परे है, क्योंकि यह राष्ट्रपति का एक संप्रभु और राजनीतिक विशेषाधिकार है जिसकी वैधता को किसी भी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती।
3. बोम्मई मामले के निर्णय में यह भी व्यवस्था दी गई थी कि विधानसभा में बहुमत परीक्षण (Floor Test) यह तय करने का एकमात्र और सबसे सही तरीका है कि राज्य सरकार के पास बहुमत है या नहीं, और यदि केंद्र सरकार द्वारा बिना किसी सदन में बहुमत परीक्षण के मनमाने ढंग से किसी राज्य सरकार को बर्खास्त कर दिया जाता है, तो न्यायालय को उस उद्घोषणा को रद्द करने और बर्खास्त विधानसभा को बहाल (Restore) करने की शक्ति प्राप्त है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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राष्ट्रपति किस प्रकार के विधेयकों को संसद के पास पुनर्विचार हेतु लौटा सकते हैं?
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