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Civil services
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असहयोग आंदोलन (1920) के कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. इसे 1920 में शुरू किया गया,
- 2. चौरी-चौरा घटना के बाद वापस लिया गया,
- 3. उद्देश्य ब्रिटिश संस्थानों का बहिष्कार था।
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Detailed Explanation
तीनों कथन असहयोग आंदोलन के संदर्भ में सही हैं।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 129' और 'अनुच्छेद 215' के अंतर्गत 'अभिलेख न्यायालय' (Court of Record) तथा 'न्यायिक अवमानना' (Contempt of Court) के प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 129 के अनुसार उच्चतम न्यायालय और अनुच्छेद 215 के अनुसार उच्च न्यायालय 'अभिलेख न्यायालय' होते हैं, जिसका अर्थ यह है कि उनके सभी निर्णय, अभिलेख और न्यायिक कार्यवाही स्थायी स्मरण और साक्ष्य के रूप में सुरक्षित रखे जाते हैं और किसी भी अन्य न्यायालय में उनकी प्रामाणिकता पर प्रश्न नहीं उठाया जा सकता है।
2. 'न्यायिक अवमानना अधिनियम, 1971' के अंतर्गत अवमानना को 'सिविल अवमानना' (Civil Contempt) और 'आपराधिक अवमानना' (Criminal Contempt) में वर्गीकृत किया गया है, और आपराधिक अवमानना के अंतर्गत किसी न्यायिक कार्यवाही की निष्पक्षता को पूर्वाग्रहित करना या न्याय प्रशासन में हस्तक्षेप करना शामिल है।
3. 'प्रशांत भूषण अवमानना मामला (2020)' और 'बरवारा मामला' में सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (अनुच्छेद 19(1)(a)) असीमित नहीं है और न्यायालय की आलोचना के नाम पर न्यायपालिका की गरिमा को धूमिल करने वाले बयानों पर स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेते हुए उच्च न्यायालयों को भी सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बिना आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने का पूर्ण अधिकार है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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संविधान सभा की 'संघ शक्ति समिति' (Union Powers Committee) के अध्यक्ष कौन थे?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग III' के अंतर्गत मूल अधिकारों (Fundamental Rights) के प्रवर्तन और अपवादों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सर्वोच्च न्यायालय और अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालयों को मूल अधिकारों के प्रवर्तन के लिए रिट (Writs) जारी करने की शक्ति प्राप्त है, किंतु सर्वोच्च न्यायालय का रिट क्षेत्राधिकार (Writ Jurisdiction) उच्च न्यायालय की तुलना में अधिक विस्तृत है क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय केवल मूल अधिकारों के उल्लंघन पर ही रिट जारी कर सकता है, जबकि उच्च न्यायालय मूल अधिकारों के साथ-साथ अन्य कानूनी अधिकारों के उल्लंघन पर भी रिट जारी कर सकते हैं।
2. अनुच्छेद 33 संसद को यह शक्ति प्रदान करता है कि वह सशस्त्र बलों, अर्ध-सैनिक बलों, पुलिस बलों और खुफिया एजेंसियों के सदस्यों के मूल अधिकारों पर प्रतिबंध लगा सके या उन्हें समाप्त कर सके, ताकि उनके द्वारा कर्तव्यों का समुचित निर्वहन और अनुशासन बना रहे, तथा इस प्रकार का कानून बनाने की शक्ति केवल संसद में निहित है, राज्य विधानमंडलों में नहीं।
3. अनुच्छेद 34 के अंतर्गत जब देश के किसी भी क्षेत्र में मार्शल लॉ (Martial Law) प्रवृत्त होता है, तो संसद को यह शक्ति प्राप्त है कि वह केंद्र या राज्य के अधीन सेवा करने वाले किसी भी व्यक्ति को मार्शल लॉ के दौरान किए गए किसी भी कार्य के लिए वैध ठहरा सके और उसे संसद द्वारा दी गई किसी भी सजा या क्षतिपूर्ति के दावे से मुक्त करने के लिए 'क्षतिपूर्ति अधिनियम' (Indemnity Act) बना सके।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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सामान्य विज्ञान और पर्यावरण के संदर्भ में, 'पारिस्थितिकीय अनुक्रमण' (Ecological Succession) और 'क्लाइमैक्स कम्युनिटी' (Climax Community) की अवधारणा के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. प्राथमिक अनुक्रमण (Primary Succession) उन क्षेत्रों में प्रारंभ होता है जहाँ पहले से कोई जीवित जीव समुदाय मौजूद नहीं था, जैसे कि नग्न चट्टानें, लावा प्रवाह या नवनिर्मित रेत के टीले, और इसमें पायनियर प्रजाति (Pioneer species) के रूप में प्रायः लाइकेन या काई का विकास होता है।
2. 'क्लाइमैक्स कम्युनिटी' (चरम समुदाय) पारिस्थितिकीय अनुक्रमण की एक ऐसी अंतिम स्थिर अवस्था होती है जो पर्यावरण के साथ पूर्ण संतुलन में होती है और इसमें प्रजातियों की विविधता और बायोमास न्यूनतम स्तर पर पहुंच जाते हैं।
3. ऑटोजेनिक अनुक्रमण (Autogenic succession) तब होता है जब अनुक्रमण की प्रक्रिया पर्यावरण के बाहरी कारकों, जैसे कि जलवायु परिवर्तन या बाढ़ द्वारा संचालित होती है, न कि स्वयं जीवों की गतिविधियों के कारण।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 161' के अंतर्गत राज्यपाल की 'क्षमादान की शक्ति' (Pardoning Power) और राष्ट्रपति की शक्तियों के साथ इसकी तुलना के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 161 के अनुसार, किसी राज्य के राज्यपाल को उस राज्य की कार्यकारी शक्ति के विस्तार के भीतर आने वाले विषयों से संबंधित विधि के विरुद्ध किसी अपराध के लिए दोषी ठहराए गए किसी भी व्यक्ति के दंडादेश को क्षमा, प्रविराम, विराम या परिहार करने की अथवा उसका निलंबन या लघुकरण करने की शक्ति प्राप्त है।
2. राज्यपाल को सेना न्यायालय (Court Martial) द्वारा दिए गए किसी भी दंडादेश को क्षमा, निलंबित या कम करने की शक्ति प्राप्त नहीं होती है, जबकि राष्ट्रपति को यह शक्ति अनुच्छेद 72 के तहत प्राप्त है।
3. जहाँ राष्ट्रपति की क्षमादान की शक्ति में मृत्युदंड (Death Sentence) को पूरी तरह से माफ करना (Pardon) शामिल है, वहीं राज्यपाल के पास किसी भी परिस्थिति में मृत्युदंड के दंडादेश को क्षमा करने या निलंबित करने की संवैधानिक शक्ति नहीं होती है, भले ही वह राज्य सूची के किसी विषय से संबंधित क्यों न हो।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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