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Civil services
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भारत के राज्य सचिव (Secretary of State) के कार्य में सहायता हेतु कितनी सदस्यीय परिषद का गठन किया गया था?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
भारत के राज्य सचिव की सहायता के लिए 15 सदस्यों वाली 'इंडिया काउंसिल' का गठन किया गया था।
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भारतीय इतिहास और कला एवं संस्कृति के संदर्भ में, प्राचीन भारतीय इतिहास में प्रयुक्त होने वाली 'शिल्प और आर्थिक शब्दावली' से संबंधित निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. श्रेणि (Shreni): यह प्राचीन भारत में व्यापारियों, शिल्पकारों और कारीगरों का एक निगम या संघ (Guild) होता था, जो अपने सदस्यों के लिए उत्पादन के नियम, मूल्य निर्धारण और मजदूरी तय करता था तथा जिसे अपनी निजी सेना रखने और अपने नियमों के तहत न्याय करने का अधिकार भी प्राप्त था।
2. सार्थवाह (Sarthavaha): यह प्राचीन काल में लंबी दूरी के व्यापारिक काफिलों का प्रमुख या नेता होता था, जो जोखिम भरे मार्गों से होकर एक स्थान से दूसरे स्थान तक वस्तुओं का क्रय-विक्रय करने वाले व्यापारियों के समूह का नेतृत्व करता था।
3. विष्टि (Vishti): यह गुप्त औरोत्तर काल में प्रचलित एक प्रकार का कर (Tax) था, जिसके अंतर्गत राज्य द्वारा किसानों और कामगारों से बिना किसी पारिश्रमिक या मजदूरी के जबरन श्रम (Forced Labour / Begar) कराया जाता था।
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-सा/से सही सुमेलित है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XV' के अंतर्गत 'निर्वाचन आयोग' (Election Commission) और 'अनुच्छेद 324' के प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 324 के अनुसार, निर्वाचन आयोग में मुख्य निर्वाचन आयुक्त और उतने ही अन्य निर्वाचन आयुक्तों, यदि कोई हों, से मिलकर बनेगा, जिनकी संख्या समय-समय पर राष्ट्रपति द्वारा निश्चित की जाती है, और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा मुख्य निर्वाचन आयुक्त की अनिवार्य पूर्व सहमति (Mandatory prior concurrence) के पश्चात ही की जाती है।
2. मुख्य निर्वाचन आयुक्त को उसके पद से उसी रीति से और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जिस रीति से और जिन आधारों पर उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है, किंतु अन्य निर्वाचन आयुक्तों को मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सिफारिश के बिना राष्ट्रपति द्वारा किसी भी समय उनके पद से हटाया जा सकता है।
3. निर्वाचन आयोग को संसद और राज्य विधानमंडलों के चुनावों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण की शक्ति प्राप्त है, किंतु संविधान में यह स्पष्ट किया गया है कि निर्वाचन आयोग एक स्थायी निकाय नहीं है, बल्कि यह आम चुनावों की अधिसूचना जारी होने के ठीक पहले अस्थायी रूप से गठित किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IVक' (मूल कर्तव्य - अनुच्छेद 51क) के अंतर्गत समाविष्ट 'मूल कर्तव्यों' (Fundamental Duties) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मूल कर्तव्यों को स्वर्ण सिंह समिति (1976) की सिफारिशों के आधार पर '42वें संविधान संशोधन अधिनियम' के माध्यम से संविधान में जोड़ा गया था, तथा मूल रूप से संविधान में 10 मूल कर्तव्य शामिल किए गए थे, जबकि 11वां मूल कर्तव्य '86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002' द्वारा जोड़ा गया।
2. संविधान के अनुच्छेद 51क के अंतर्गत ये सभी कर्तव्य केवल भारत के नागरिकों पर ही लागू होते हैं, और इनमें से कुछ कर्तव्य प्रकृति में नैतिक (Moral) हैं जबकि कुछ कर्तव्य नागरिक (Civic) प्रकृति के हैं।
3. यद्यपि मूल कर्तव्य स्वंय में न्यायोचित (Justiciable) नहीं हैं, अर्थात इनके उल्लंघन पर सीधे न्यायालय द्वारा दंडित नहीं किया जा सकता है, किंतु संसद को यह सांविधिक शक्ति प्राप्त है कि वह विधि बनाकर इनमें से किसी भी कर्तव्य के प्रवर्तन के लिए उचित दंड या शास्ति (Penalty) का उपबंध कर सकती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संसद की विधाई प्रक्रिया और 'धन विधेयक' (Money Bills - Article 110) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 110 के अनुसार, किसी विधेयक को धन विधेयक तभी माना जाएगा जब उसमें केवल करों के अधिरोपण, उत्सादन, परिहार, परिवर्तन या विनियमन, अथवा भारत की संचित निधि से धन के विनियोजन जैसे विषय शामिल हों, और यदि किसी धन विधेयक में कोई अन्य सामान्य विधाई मामला भी मिला दिया जाता है, तो भी वह धन विधेयक ही बना रहेगा।
2. धन विधेयक केवल लोकसभा में ही पुनःस्थापित किया जा सकता है, राज्यसभा में नहीं, तथा इसे पुनःस्थापित करने के लिए राष्ट्रपति की पूर्व सिफ़ारिश (Prior Recommendation) की आवश्यकता होती है।
3. राज्यसभा किसी धन विधेयक को अस्वीकार नहीं कर सकती है और न ही उसमें संशोधन कर सकती है, वह उसे अधिकतम 14 दिनों की अवधि के लिए रोक सकती है, और यदि इस अवधि के भीतर राज्यसभा विधेयक को वापस नहीं करती है, तो उस अवधि की समाप्ति पर वह विधेयक दोनों सदनों द्वारा उसी रूप में पारित मान लिया जाता है जिस रूप में उसे लोकसभा ने पारित किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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