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Indian Polity
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मौलिक कर्तव्य (Fundamental Duties) संविधान के किस भाग में वर्णित हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
मौलिक कर्तव्य संविधान के भाग IVA के अनुच्छेद 51A के अंतर्गत वर्णित हैं।
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भारतीय संविधान के अंतर्गत राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद के संवैधानिक प्रावधानों, शक्तियों तथा उत्तरदायित्वों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 67(क) के अनुसार उपराष्ट्रपति अपने पद ग्रहण करने की तारीख से पाँच वर्ष की अवधि तक पद धारण करता है, किंतु वह राष्ट्रपति को संबोधित अपने हस्ताक्षर सहित लेख द्वारा अपने पद से त्यागपत्र दे सकता है, या उसे राज्यसभा के तत्कालीन समस्त सदस्यों के बहुमत द्वारा पारित संकल्प और लोकसभा द्वारा सहमत प्रस्ताव द्वारा पद से हटाया जा सकता है, जिसके लिए राष्ट्रपति के महाभियोग जैसी औपचारिक प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं होती है, बशर्ते इस आशय का प्रस्ताव लाने से कम से कम चौदह दिन पूर्व लिखित सूचना दी गई हो।
2. अनुच्छेद 74(1) के प्रावधान के अनुसार राष्ट्रपति को सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद होगी जिसका प्रधान प्रधानमंत्री होगा, और राष्ट्रपति अपने कृत्यों का प्रयोग करने में ऐसी सलाह के अनुसार कार्य करेगा, किंतु 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा यह जोड़ा गया कि राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद से ऐसी सलाह पर "एक बार" पुनर्विचार करने की अपेक्षा कर सकता है और राष्ट्रपति पुनर्विचार के पश्चात दी गई सलाह के अनुसार ही कार्य करेगा।
3. अनुच्छेद 75(5) के अनुसार कोई भी मंत्री जो निरंतर छह मास की किसी अवधि तक संसद के किसी सदन का सदस्य नहीं है, उस अवधि की समाप्ति पर मंत्री नहीं रहेगा, और यदि प्रधानमंत्री स्वयं संसद के किसी भी सदन का सदस्य नहीं है, तो वह छह महीने के भीतर संसद के किसी भी सदन की सदस्यता प्राप्त किए बिना अपने पद पर बने रहने का संवैधानिक अधिकार रखता है, बशर्ते उसे लोकसभा में बहुमत का विश्वास प्राप्त हो।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) और अधीनस्थ न्यायालयों (Subordinate Courts) की शक्तियों, क्षेत्राधिकार तथा उनकी कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 226 के अंतर्गत किसी उच्च न्यायालय की रिट (Writ) अधिकारिता, उच्चतम न्यायालय की अनुच्छेद 32 के अंतर्गत रिट अधिकारिता की तुलना में अधिक विस्तृत और व्यापक है, क्योंकि उच्च न्यायालय मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के अतिरिक्त किसी 'अन्य प्रयोजन' (जैसे सामान्य कानूनी अधिकारों के हनन पर) के लिए भी रिट जारी कर सकता है।
2. संविधान के अनुच्छेद 233 के अनुसार किसी राज्य में जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति, पोस्टिंग और पदोन्नति संबंधित राज्य के उच्च न्यायालय के परामर्श से राज्यपाल द्वारा की जाती है, और जिला न्यायाधीश के रूप में नियुक्त होने के लिए यह अनिवार्य है कि व्यक्ति कम से कम सात वर्ष तक अधिवक्ता या प्लीडर रहा हो तथा संघ या राज्य की सेवा में कोई अन्य सरकारी अधिकारी न हो।
3. जिला न्यायालयों से भिन्न अन्य अधीनस्थ न्यायालयों (जैसे मुंसिफ न्यायालय आदि) की नियुक्ति संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा राज्य लोक सेवा आयोग और उच्च न्यायालय से परामर्श करके नियमों के तहत की जाती है, तथा राज्यों के न्यायिक सेवा पर नियंत्रण (जिसमें पोस्टिंग और पदोन्नति शामिल है) संविधान के अनुच्छेद 235 के तहत पूर्ण रूप से संबंधित राज्य के उच्च न्यायालय में निहित होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत राष्ट्रपति की क्षमादान शक्तियों (Pardoning Powers) और वीटो शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 72 के तहत राष्ट्रपति को सैन्य न्यायालय (Court Martial) द्वारा दिए गए दंड के मामले में तथा सभी मामलों में जहाँ दंड या दंडादेश मृत्युदंड (Death Sentence) होता है, क्षमादान देने की पूर्ण शक्ति प्राप्त है, और इस शक्ति का प्रयोग करते समय राष्ट्रपति के लिए केंद्रीय मंत्रिपरिषद की सलाह मानना पूरी तरह अनिवार्य होता है, सिवाय उस स्थिति के जहाँ दया याचिका खारिज कर दी गई हो।
2. राष्ट्रपति की क्षमादान शक्तियों में 'परिहार' (Remission) का अर्थ दंड की प्रकृति को बदले बिना उसकी अवधि को कम करना है, जबकि 'विराम' (Respiration/Remission नहीं अपितु Reprieve/Remission) का अर्थ किसी विशेष परिस्थिति, जैसे कि अपराधी की शारीरिक अपंगता या महिला अपराधी के गर्भवती होने के कारण मूल दंड के स्थान पर कम कठोर दंड देना है।
3. अनुच्छेद 111 के अंतर्गत जब कोई साधारण विधेयक संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित होने के पश्चात राष्ट्रपति के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है, तो राष्ट्रपति उस पर अपनी अनुमति रोक सकता है और अपनी 'जेब वीटो' (Pocket Veto) शक्ति का प्रयोग करते अनिश्चित काल के लिए विधेयक को अपने पास रख सकता है, क्योंकि संविधान में ऐसी स्थिति के लिए राष्ट्रपति द्वारा विधेयक पर निर्णय लेने हेतु किसी भी समय-सीमा (Time Limit) का निर्धारण नहीं किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के 74वें संशोधन अधिनियम, 1992 और शहरी स्थानीय शासन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 243-Q के अनुसार, प्रत्येक राज्य में सभी शहरी क्षेत्रों के लिए संक्रमणकालीन क्षेत्र के वास्ते नगर पंचायत, छोटे नगरीय क्षेत्र के वास्ते नगर पालिका परिषद और बड़े नगरीय क्षेत्र के वास्ते नगर निगम का गठन किया जाना अनिवार्य है, किंतु राज्यपाल को यह शक्ति प्राप्त है कि वह किसी औद्योगिक नगरी (Industrial Township) के लिए नगरपालिका समिति का गठन करने के बजाय एक औद्योगिक अधिकरण की स्थापना कर सकता है।
2. 74वें संविधान संशोधन द्वारा संविधान में नौवीं अनुसूची (Schedule IX) जोड़ी गई, जिसमें नगरपालिकाओं की विधायी शक्तियों और उत्तरदायित्वों से संबंधित 18 कार्यकारी विषयों का उल्लेख किया गया है, जिन्हें अनुच्छेद 243-W के तहत समेकित किया गया है।
3. प्रत्येक नगरपालिका के लिए पांच वर्ष की निश्चित अवधि का प्रावधान है, और यदि किसी नगरपालिका का विघटन समय से पूर्व हो जाता है, तो विघटन की तारीख से छह माह की अवधि के भीतर चुनाव कराना अनिवार्य होता है, तथा विघटन के पश्चात गठित नई नगरपालिका अपने पूर्ववर्ती निकाय के शेष कार्यकाल के लिए ही पद धारण करती है, न कि पूरे पाँच वर्षों के लिए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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