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Indian Polity
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राष्ट्रीय आपातकाल लगाने के मुख्य आधार क्या हैं?

Detailed Explanation

अनुच्छेद 352 के अनुसार राष्ट्रीय आपातकाल युद्ध, बाहरी आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह के आधार पर लगाया जा सकता है।
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→ भारतीय संविधान के अंतर्गत उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 69 के अनुसार प्रत्येक उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति या उसके द्वारा इस प्रयोजन के लिए नियुक्त किसी व्यक्ति के समक्ष शपथ या प्रतिज्ञान लेगा और उस पर हस्ताक्षर करेगा, तथा उपराष्ट्रपति का निर्वाचन संसद के दोनों सदनों के सभी सदस्यों से मिलकर बनने वाले निर्वाचकगण के सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा होता है, जिसमें राज्य विधानसभाओं के निर्वाचित और मनोनीत सदस्य भाग नहीं लेते हैं। 2. अनुच्छेद 75(3) के प्रावधानों के अनुसार मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है, और इस सामूहिक उत्तरदायित्व के सिद्धांत का अर्थ यह है कि लोकसभा में प्रधानमंत्री या किसी अन्य मंत्री के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पारित होने पर संपूर्ण मंत्रिपरिषद को त्यागपत्र देना होता है, तथा कोई भी मंत्री व्यक्तिगत रूप से राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत अपने पद पर रहता है। 3. अनुच्छेद 78 के अंतर्गत प्रधानमंत्री का यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वह संघ के प्रशासन से संबंधित मंत्रिपरिषद के सभी विनिश्चय राष्ट्रपति को संसूचित करे तथा राष्ट्रपति द्वारा माँगी गई प्रशासनिक और विधायी मामलों की सूचनाएँ प्रदान करे, किंतु यदि राष्ट्रपति किसी ऐसे विषय पर मंत्रिपरिषद के विचारार्थ प्रस्तुत करने को कहे जिस पर किसी मंत्री ने विनिश्चय कर लिया है किन्तु मंत्रिपरिषद ने विचार नहीं किया है, तो प्रधानमंत्री ऐसा करने के लिए बाध्य नहीं है। → भारतीय संविधान के अंतर्गत राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद के संवैधानिक प्रावधानों, शक्तियों तथा उत्तरदायित्वों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 67(क) के अनुसार उपराष्ट्रपति अपने पद ग्रहण करने की तारीख से पाँच वर्ष की अवधि तक पद धारण करता है, किंतु वह राष्ट्रपति को संबोधित अपने हस्ताक्षर सहित लेख द्वारा अपने पद से त्यागपत्र दे सकता है, या उसे राज्यसभा के तत्कालीन समस्त सदस्यों के बहुमत द्वारा पारित संकल्प और लोकसभा द्वारा सहमत प्रस्ताव द्वारा पद से हटाया जा सकता है, जिसके लिए राष्ट्रपति के महाभियोग जैसी औपचारिक प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं होती है, बशर्ते इस आशय का प्रस्ताव लाने से कम से कम चौदह दिन पूर्व लिखित सूचना दी गई हो। 2. अनुच्छेद 74(1) के प्रावधान के अनुसार राष्ट्रपति को सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद होगी जिसका प्रधान प्रधानमंत्री होगा, और राष्ट्रपति अपने कृत्यों का प्रयोग करने में ऐसी सलाह के अनुसार कार्य करेगा, किंतु 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा यह जोड़ा गया कि राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद से ऐसी सलाह पर "एक बार" पुनर्विचार करने की अपेक्षा कर सकता है और राष्ट्रपति पुनर्विचार के पश्चात दी गई सलाह के अनुसार ही कार्य करेगा। 3. अनुच्छेद 75(5) के अनुसार कोई भी मंत्री जो निरंतर छह मास की किसी अवधि तक संसद के किसी सदन का सदस्य नहीं है, उस अवधि की समाप्ति पर मंत्री नहीं रहेगा, और यदि प्रधानमंत्री स्वयं संसद के किसी भी सदन का सदस्य नहीं है, तो वह छह महीने के भीतर संसद के किसी भी सदन की सदस्यता प्राप्त किए बिना अपने पद पर बने रहने का संवैधानिक अधिकार रखता है, बशर्ते उसे लोकसभा में बहुमत का विश्वास प्राप्त हो। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्य विधानमंडल—विधानसभा और विधान परिषद—की संरचना, गठन और विधायी शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 169 के अंतर्गत संसद किसी राज्य में विधान परिषद के सृजन या उत्सादन के लिए कानून बना सकती है, बशर्ते संबंधित राज्य की विधानसभा ने उस राज्य के कुल सदस्यों के बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से इस आशय का एक संकल्प पारित कर दिया हो, और ऐसा संकल्प पारित होने पर संसद के लिए उस राज्य में विधान परिषद का गठन करना संवैधानिक रूप से अनिवार्य हो जाता है। 2. विधान परिषद की कुल सदस्य संख्या उस राज्य की विधानसभा के कुल सदस्यों की संख्या के एक-तिहाई से अधिक नहीं हो सकती है, किंतु किसी भी परिस्थिति में विधान परिषद के सदस्यों की कुल संख्या चालीस से कम नहीं होनी चाहिए (अपवादस्वरूप जम्मू-कश्मीर के समय स्थिति भिन्न थी)। 3. विधान परिषद के सदस्यों के निर्वाचन और मनोनयन के संबंध में, इसके कुल सदस्यों का 1/12 भाग ऐसे स्नातकों द्वारा चुना जाता है जो उस राज्य के भीतर कम से कम तीन वर्ष पूर्व ग्रेजुएट हो चुके हैं, तथा 1/6 भाग राज्यपाल द्वारा साहित्य, विज्ञान, कला, सहकारिता आंदोलन और समाज सेवा के क्षेत्र में विशेष ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव रखने वाले व्यक्तियों में से मनोनीत किया जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय संविधान के अंतर्गत महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधनों (जैसे 42वें और 44वें संशोधन) तथा राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352) के प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा राष्ट्रपति को यह बाध्यकारी बना दिया गया कि वह मंत्रिपरिषद की सलाह के अनुसार ही कार्य करेगा, तथा राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा संपूर्ण देश के साथ-साथ देश के किसी विशिष्ट भाग तक सीमित रखने का अधिकार भी इसी संशोधन द्वारा जोड़ा गया था। 2. 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा 'आंतरिक अशांति' (Internal Disturbance) शब्द को राष्ट्रीय आपातकाल के आधार के रूप में संविधान से हटाकर उसके स्थान पर 'सशस्त्र विद्रोह' (Armed Rebellion) शब्द को प्रतिस्थापित किया गया, तथा यह भी अनिवार्य किया गया कि मंत्रिमंडल का ऐसा निर्णय प्रधानमंत्री सहित सभी मंत्रियों द्वारा लिखित रूप में राष्ट्रपति को संसूचित किया जाना चाहिए। 3. राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान अनुच्छेद 358 के अंतर्गत अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकार स्वतः निलंबित हो जाते हैं, किंतु 44वें संशोधन के पश्चात अब अनुच्छेद 20 और अनुच्छेद 21 द्वारा प्रदत्त अधिकारों को किसी भी परिस्थिति में, यहां तक कि राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान भी, निलंबित नहीं किया जा सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → राज्य की कार्यपालिका के संदर्भ में, राज्यपाल की शक्तियों, अध्यादेश निर्माण और मुख्यमंत्री की नियुक्ति से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 213 के तहत राज्यपाल को राज्य विधानमंडल के विश्रान्ति काल में अध्यादेश प्रख्यापित करने की शक्ति प्राप्त है, और राज्यपाल द्वारा प्रख्यापित अध्यादेश का वही बल और प्रभाव होता है जो राज्य विधानमंडल द्वारा पारित किसी अधिनियम का होता है, किंतु राज्यपाल राष्ट्रपति के निर्देशों के बिना किसी ऐसे अध्यादेश को प्रख्यापित नहीं कर सकता यदि उस विषय से संबंधित विधेयक को राज्य विधानसभा में प्रस्तुत करने के लिए राष्ट्रपति की पूर्व संस्वीकृति आवश्यक होती। 2. अनुच्छेद 164 के अनुसार मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा मुख्यमंत्री की सलाह पर की जाती है, तथा संविधान में यह स्पष्ट रूप से उपबंधित है कि मुख्यमंत्री सहित मंत्रिपरिषद के सदस्यों की कुल संख्या संबंधित राज्य की विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी और न ही 12 मंत्रियों से कम होगी (छोटे राज्यों को छोड़कर)। 3. अनुच्छेद 167 के अनुसार राज्य के प्रशासन से संबंधित और विधानविषयक प्रस्तावों से संबंधित मंत्रिपरिषद के सभी विनिश्चय राज्यपाल को संसूचित करना मुख्यमंत्री का संवैधानिक कर्तव्य है, तथा राज्यपाल के यह पूछने पर ऐसी सूचना प्रदान करना भी अनिवार्य है, किंतु राज्यपाल अपनी स्वविवेककीय शक्तियों के प्रयोग में मंत्रिपरिषद की सलाह मानने के लिए हमेशा बाध्य होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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