BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

Civil services
21 views

लॉर्ड डलहौजी की हड़प नीति के तहत विलय हुए राज्यों का सही कालानुक्रम क्या है?

Detailed Explanation

सही क्रम: सतारा (1848), संबलपुर (1849), झाँसी (1853), नागपुर (1854)।
Share:

Related Questions

→ भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XX' के अंतर्गत संविधान संशोधन की प्रक्रिया (Amendment of the Constitution) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत संसद को संविधान के किसी भी उपबंध में संशोधन करने की शक्ति प्राप्त है, और इस प्रक्रिया का आरंभ केवल संसद के किसी भी सदन में इस प्रयोजन के लिए विधेयक प्रस्तुत करके किया जा सकता है, जिसके लिए राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति (Prior Permission) अनिवार्य होती है। 2. संविधान के कुछ विशिष्ट प्रावधानों, जैसे राष्ट्रपति के निर्वाचन की प्रक्रिया, केंद्र और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों का वितरण, या संसद में राज्यों का प्रतिनिधित्व, में संशोधन के लिए न केवल संसद के दोनों सदनों द्वारा विशेष बहुमत से पारित होना आवश्यक है, बल्कि कम से कम आधे राज्यों के विधानमंडलों द्वारा साधारण बहुमत से उसका अनुसमर्थन (Ratification) किया जाना भी अनिवार्य है। 3. केशवानंद भारती वाद (1973) के पश्चात सर्वोच्च न्यायालय ने यह प्रतिपादित किया है कि संसद अनुच्छेद 368 के तहत अपनी संशोधन शक्ति का प्रयोग करते हुए संविधान के मूल ढाँचे (Basic Structure) को संशोधित या नष्ट नहीं कर सकती है, तथा न्यायपालिका द्वारा संविधान के मूल ढाँचे के अंतर्गत न्यायिक समीक्षा, स्वतंत्र न्यायपालिका और लोकतंत्र जैसी अवधारणाओं को शामिल किया गया है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम के संदर्भ में, वर्ष 1920-1922 के 'असहयोग आंदोलन' (Non-Cooperation Movement) और इसके दौरान हुई महत्वपूर्ण घटनाओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. नागपुर अधिवेशन (दिसंबर 1920) में कांग्रेस के असहयोग कार्यक्रम को औपचारिक रूप से अनुमोदित किया गया, तथा इसी अधिवेशन में कांग्रेस के संगठन में क्रांतिकारी परिवर्तन करते हुए प्रादेशिक कांग्रेस समितियों का गठन भाषाई आधार पर (Linguistic basis) करने का निर्णय लिया गया। 2. असहयोग आंदोलन के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों में किसानों और मजदूरों के आंदोलन भी राष्ट्रीय धारा के साथ जुड़ गए, जिसके तहत उत्तर प्रदेश के अवध क्षेत्र में 'एका आंदोलन' (Eka Movement) और असम में चाय बागान के मजदूरों की प्रसिद्ध 'हड़ताल' जैसी घटनाएं मुख्य रूप से इसी अवधि में सामने आईं। 3. महात्मा गांधी ने फरवरी 1922 में चौरी-चौरा (गोरखपुर) में हुई हिंसक घटना के कारण असहयोग आंदोलन को अचानक वापस ले लिया, जिसके तुरंत बाद देश की गिरती लोकप्रियता को देखते हुए खिलाफत आंदोलन के नेताओं (अली बंधुओं) ने गांधी जी का पूर्ण समर्थन करने से इंकार करते हुए कांग्रेस से स्थायी रूप से नाता तोड़ लिया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XVIII' के अंतर्गत 'आपात उपबंध' (Emergency Provisions - Articles 352-360) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा संपूर्ण भारत या उसके किसी भाग के लिए युद्ध, बाह्य आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह के आधार पर की जा सकती है, तथा मूल संविधान में 'सश सशस्त्र विद्रोह' शब्द के स्थान पर 'आंतरिक अशांति' (Internal Disturbance) शब्द का प्रयोग किया गया था जिसे 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा बदला गया था। 2. अनुच्छेद 356 के अंतर्गत राष्ट्रपति शासन (President's Rule) की उद्घोषणा किसी राज्य में इस आधार पर की जा सकती है कि उस राज्य की सरकार संविधान के उपबंधों के अनुसार नहीं चल रही है, और ऐसी उद्घोषणा को संसद के दोनों सदनों द्वारा इसके जारी होने की तारीख से दो महीने के भीतर अनुमोदित किया जाना अनिवार्य होता है, जिसे विशेष बहुमत (Special Majority) द्वारा ही पारित किया जाना आवश्यक है। 3. अनुच्छेद 360 के अधीन वित्तीय आपातकाल (Financial Emergency) की घोषणा राष्ट्रपति द्वारा तब की जा सकती है जब उन्हें यह संतुष्टि हो जाए कि ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है जिससे भारत या उसके किसी क्षेत्र की वित्तीय स्थिरता या साख को खतरा है, और वित्तीय आपातकाल की यह उद्घोषणा संसद के अनुमोदन के बिना एक बार लागू होने के बाद अनिश्चितकाल तक स्वतः प्रवृत्त रहती है जब तक कि राष्ट्रपति इसे वापस न ले लें। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XVIII' के अंतर्गत 'आपात उपबंध' (Emergency Provisions - अनुच्छेद 352 से 360) तथा '44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978' के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 352 के अनुसार राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा संपूर्ण भारत या उसके किसी भाग के लिए युद्ध, बाह्य आक्रमण या 'सशस्त्र विद्रोह' (Armed Rebellion) के आधार पर की जा सकती है, और मूल संविधान में 'सशस्त्र विद्रोह' शब्द के स्थान पर 'आंतरिक अशांति' (Internal Disturbance) शब्द का प्रयोग किया गया था जिसे 44वें संशोधन द्वारा बदला गया। 2. राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा या उसके निरंतरता को अनुमोदित करने वाले प्रत्येक संकल्प को संसद के प्रत्येक सदन द्वारा अपनी कुल सदस्य संख्या के बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत द्वारा एक मास (30 दिन) के भीतर पारित किया जाना अनिवार्य किया गया है, और यह प्रावधान भी मूल संविधान में 2 माह के स्थान पर 44वें संशोधन द्वारा कड़ा किया गया था। 3. सर्वोच्च न्यायालय ने 'मिनर्वा मिल्स वाद (1980)' में यह स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा को इस आधार पर न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) के दायरे से बाहर रखा गया है कि यह राष्ट्रपति का विशेषाधिकार है, और आपातकाल लगाने के पीछे के राजनीतिक या तथ्यात्मक कारणों की जाँच अदालतें नहीं कर सकती हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 72' के अंतर्गत राष्ट्रपति की 'क्षमादान की शक्ति' (Pardoning Power) और इसके न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) के दायरे के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 72 के अनुसार, राष्ट्रपति को उन सभी मामलों में जहाँ दंड या दंडादेश सेना न्यायालय (Court Martial) द्वारा दिया गया है, किसी अपराध के लिए दोषी ठहराए गए किसी भी व्यक्ति के दंडादेश को क्षमा, प्रविराम, विराम या परिहार करने की अथवा उसका निलंबन, परिहार या लघुकरण करने की शक्ति प्राप्त है। 2. राष्ट्रपति की क्षमादान की शक्ति कार्यपालिका की एक स्वतंत्र शक्ति है, और 'ईपुरा रामुलू बनाम आंध्र प्रदेश राज्य' या अन्य निर्णयों में उच्चतम न्यायालय द्वारा यह व्यवस्था दी गई है कि राष्ट्रपति की इस शक्ति की न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) किसी भी परिस्थिति में नहीं की जा सकती है, भले ही यह निर्णय दुर्भावनापूर्ण, मनमाना या भेदभावपूर्ण हो। 3. दया याचिका (Mercy Petition) पर निर्णय लेने में राष्ट्रपति के समक्ष केंद्रीय गृह मंत्रालय की सलाह संवैधानिक रूप से पूरी तरह बाध्यकारी होती है, और यदि मंत्रिपरिषद या गृह मंत्रालय दया याचिका को अस्वीकार करने की सलाह देता है, तो राष्ट्रपति उस सलाह के विरुद्ध जाकर दोषी को क्षमादान नहीं दे सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.