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राज्य सूची के विषय पर राष्ट्रीय हित में कानून बनाने की शक्ति संसद को किस अनुच्छेद के तहत मिलती है?

Detailed Explanation

अनुच्छेद 249 के तहत राज्यसभा के प्रस्ताव पर संसद राज्य सूची के विषय पर कानून बना सकती है।
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→ भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 161' के अंतर्गत राज्यपाल की 'क्षमादान की शक्ति' और इसकी सीमाओं तथा राष्ट्रपति की शक्तियों के साथ तुलना के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 161 के अनुसार, किसी राज्य के राज्यपाल को उस राज्य की कार्यकारी शक्ति के विस्तार वाले विषयों से संबंधित किसी विधि के विरुद्ध किसी अपराध के लिए दोषी ठहराए गए किसी व्यक्ति के दंड को क्षमा, प्रविराम, विराम या परिहार करने की अथवा दंडादेश के निलंबन, परिहार या लघुकरण की शक्ति प्राप्त है। 2. राष्ट्रपति के विपरीत, राज्यपाल को किसी भी मामले में मृत्युदंड (Death Sentence) को पूरी तरह से माफ करने या क्षमा करने की शक्ति प्राप्त नहीं है, भले ही वह मामला राज्य सूची के किसी विषय से संबंधित क्यों न हो। 3. राज्यपाल को सैन्य न्यायालय (Court Martial) द्वारा दिए गए किसी भी दंडादेश या सज़ा के विरुद्ध क्षमादान देने की शक्ति प्राप्त है, क्योंकि सैन्य न्यायालय भी राज्य के भौगोलिक क्षेत्र के अंतर्गत ही कार्य करते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय पर्यावरण कानून और 'राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड' (National Board for Wildlife - NBWL) तथा 'वन संरक्षण अधिनियम, 1980' के विधिक एवं संस्थागत ढांचे के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड' (NBWL) एक सांविधिक निकाय (Statutory Body) है जिसका गठन वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के प्रावधानों के तहत किया गया है, और इसकी अध्यक्षता स्वयं देश के प्रधानमंत्री करते हैं। 2. वन्यजीव अभ्यारण्यों और राष्ट्रीय उद्यानों की सीमाओं के भीतर किसी भी प्रकार के गैर-वानिकी गतिविधियों या वाणिज्यिक उपयोग की अनुमति देने के लिए 'स्थाई समिति' (Standing Committee) के अनुमोदन की आवश्यकता होती है, और इस स्थाई समिति की अध्यक्षता केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री द्वारा की जाती है। 3. 'वन संरक्षण अधिनियम, 1980' के तहत किसी भी आरक्षित वन (Reserved Forest) या गैर-वन भूमि को गैर-वानिकी उद्देश्यों के लिए उपयोग करने हेतु केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति अनिवार्य है, और इस अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करने पर राज्यों को यह शक्ति प्राप्त है कि वे बिना केंद्र की अनुमति के वन भूमि का डायवर्जन कर सकते हैं यदि मामला लोक कल्याण से जुड़ा हो। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'एल नीनो-दक्षिणी दोलन' (ENSO - El Niño-Southern Oscillation) और भारतीय मानसून पर इसके प्रभावों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. एल नीनो के दौरान, उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर के पूर्वी और मध्य भाग में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है, जिससे पेरू और इक्वाडोर के तटों पर ठंडे पानी के अपवेलिंग (Upwelling) की प्रक्रिया तीव्र हो जाती है। 2. 'दक्षिणी दोलन सूचकांक' (Southern Oscillation Index - SOI) ताहिती (दक्षिण प्रशांत महासागर) और डार्विन (उत्तरी ऑस्ट्रेलिया) के बीच वायु दाब के अंतर को मापता है, और एक नकारात्मक SOI मान आमतौर पर कमजोर मानसून और भारत में सूखे की स्थिति का संकेत देता है। 3. 'इंडियन ओपेन डिपोल' (IOD - Indian Ocean Dipole) कभी-कभी एल नीनो के नकारात्मक प्रभावों को संतुलित या संशोधित कर सकता है, जिसमें सकारात्मक IOD (Positive IOD) पश्चिमी हिंद महासागर में गर्म तापमान और भारत में बेहतर मानसूनी वर्षा को बढ़ावा देता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → सामान्य विज्ञान और पर्यावरण के संदर्भ में, 'ओजोन परत क्षरण' (Ozone Layer Depletion) और 'मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल' (Montreal Protocol) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल एक अंतरराष्ट्रीय संधि है जिसे ओजोन परत को नुकसान पहुँचाने वाले पदार्थों, विशेष रूप से क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs), हैलॉन और कार्बन टेट्राक्लोराइड के उत्पादन और खपत को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने के लिए अपनाया गया था। 2. 'किगाली संशोधन (Kigali Amendment)' के माध्यम से मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के दायरे का विस्तार किया गया है, जिसके तहत हाइड्रोफ्लोरोकार्बन (HFCs) को भी नियंत्रित पदार्थों की सूची में शामिल किया गया है, भले ही HFCs ओजोन परत को सीधे नुकसान नहीं पहुँचाते हैं, किंतु वे अत्यधिक शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैसें हैं। 3. अंटार्कटिका के ऊपर ओजोन छिद्र (Ozone Hole) के निर्माण के पीछे केवल मानव-निर्मित रसायन ही एकमात्र कारक हैं, और इसमें प्राकृतिक प्रक्रियाएं जैसे ध्रुवीय स्ट्रेटोस्फेरिक बादल (Polar Stratospheric Clouds) या सूर्य के प्रकाश की कोई भूमिका नहीं होती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XVII' के अंतर्गत 'राजभाषा' (Official Language) और उससे संबंधित संवैधानिक प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 343 के अनुसार संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी होगी, तथा संघ के राजकीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग होने वाले अंकों का रूप भारतीय अंकों का अंतरराष्ट्रीय रूप (1, 2, 3, आदि) होगा, और राष्ट्रपति किसी भी समय इस बात की अनुमति दे सकता है कि हिंदी के अतिरिक्त अंग्रेजी भाषा या अंकों के देवनागरी रूप का भी राजकीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग किया जा सकता है। 2. संविधान के अनुच्छेद 348 के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय और प्रत्येक उच्च न्यायालय में सभी कार्रवाइयाँ अंग्रेजी भाषा में ही होंगी, जब तक कि संसद विधि द्वारा अन्यथा उपबंध न करे, तथापि किसी राज्य का राज्यपाल, राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से, राज्य के उच्च न्यायालय की कार्रवाइयों में हिंदी भाषा या उस राज्य के राजकीय प्रयोजनों के लिए प्रयुक्त होने वाली किसी अन्य भाषा के प्रयोग को अधिकृत कर सकता है। 3. संविधान के अनुच्छेद 351 के तहत संघ का यह कर्तव्य होगा कि वह हिंदी भाषा का प्रसार बढ़ाए, उसका विकास करे ताकि वह भारत की सामासिक संस्कृति के सभी तत्वों की अभिव्यक्ति का माध्यम बन सके, और इसके लिए उसे केवल संस्कृत भाषा से ही अपनी शब्दावली के अधिकांश शब्दों को ग्रहण करने का निर्देश दिया गया है, अन्य भाषाओं से नहीं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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