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History of India
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प्राचीन भारतीय इतिहास के संदर्भ में, जैन धर्म के 'त्रिरत्न' (सम्यक् दर्शन, सम्यक् ज्ञान, सम्यक् चरित्र) के अतिरिक्त निम्नलिखित में से किस दार्शनिक अवधारणा या सिद्धांत पर जैन दर्शन में सर्वाधिक बल दिया गया है?

Detailed Explanation

जैन धर्म एक अनश्वरवादी और अनीश्वरवादी दर्शन है जो ईश्वर की सत्ता को स्वीकार नहीं करता है। यह वेदों की प्रमाणिकता को भी नहीं मानता। जैन दर्शन के अनुसार कर्म फल के बंधन से मुक्ति पाने के लिए त्रिरत्न के पालन के साथ-साथ घोर तपस्या, कायाक्लेश और संसार को अनेक दृष्टिकोनों से देखने के सिद्धांत यानी 'स्याद्वाद' (सप्तभंगी नय) तथा 'अनेकांतवाद' पर सर्वाधिक बल दिया गया है।
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→ मौर्य साम्राज्य की केंद्रीय और प्रांतीय प्रशासनिक व्यवस्था के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. कौटिल्य के 'अर्थशास्त्र' में राज्य के सात अंगों (सप्तांग सिद्धांत) का वर्णन है, जिसमें 'स्वामी' (राजा) को सर्वोच्च स्थान दिया गया है और केंद्रीय सचिवालय के प्रशासनिक अधिकारियों को 'तीर्थ' या 'महामात्र' कहा जाता था जिनकी कुल संख्या अठारह थी। 2. अशोक के शासनकाल में प्रांतीय प्रशासन की इकाइयों को 'चक्र' कहा जाता था, जो प्रायः राजकुमारों (कुमार या आर्यपुत्र) के अधीन होते थे, जबकि सबसे छोटी प्रशासनिक इकाई 'ग्राम' थी जिसका मुखिया 'ग्रामिक' कहलाता था जो पूर्णतः शाही अधिकारियों के नियंत्रण से मुक्त और स्वतंत्र इकाई था। 3. मौर्य काल में व्यापार और वाणिज्य के नियमन के लिए राज्य द्वारा कड़े नियंत्रण रखे जाते थे, जिसके तहत माप-तौल के अध्यक्ष को 'पोतवाध्यक्ष' और वैश्य वर्ग से एकत्रित किए जाने वाले करों के अतिरिक्त बंदरगाहों एवं समुद्री व्यापार के नियंत्रण के लिए 'पतनध्यक्ष' नामक अधिकारी नियुक्त होता था। 4. अशोक के लघु शिलालेखों और स्तंभ लेखों में न्याय व्यवस्था का विस्तृत उल्लेख मिलता है, जिसके अनुसार साम्राज्य में 'धर्मस्थीय' (दीवानी) और 'कंटकशोधन' (फौजदारी) नामक दो प्रकार के न्यायालयों का प्रचलन था, और न्यायाधीशों को 'रज्जुक' कहा जाता था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → 1776 ई. में कलकत्ता काउंसिल और मराठों के बीच कौन सी संधि हुई जिसने "सूरत की संधि" को रद्द कर दिया था? → बिहार में 1857 के महान विद्रोह के दौरान वीर कुंवर सिंह और उनके भाई अमर सिंह के नेतृत्व, सैन्य रणनीतियों तथा संघर्ष के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वीर कुंवर सिंह ने आरा पर अधिकार करने के पश्चात अंग्रेजी सेना के विरुद्ध परंपरागत युद्धशैली का त्याग कर छापामार (गोरिल्ला) युद्ध प्रणाली को अपनाया और गंगा नदी पार करते समय ब्रिटिश सेनापति डगलस की गोलियों का सामना करते हुए अपने बाएं हाथ को काटकर गंगा में अर्पित कर दिया था। 2. अमर सिंह ने वीर कुंवर सिंह की मृत्यु के उपरांत जगदीशपुर के जंगलों, कैमूर की पहाड़ियों और रोहतास के क्षेत्रों से ब्रिटिश सेना के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष का नेतृत्व जारी रखा और ब्रिटिश सत्ता को चुनौती देते हुए अपनी स्वतंत्र सरकार स्थापित कर ली थी। 3. अमर सिंह द्वारा संचालित इस समानांतर प्रशासन और सैन्य अभियानों का दमन करने के लिए ब्रिटिश सरकार ने मेजर जनरल डगलस और विंसेंट आयर को विशेष रूप से नियुक्त किया था, जिन्होंने कैमूर की पहाड़ियों में कड़े संघर्ष के बाद इस विद्रोह को पूरी तरह कुचला। 4. वर्ष 1858 के अंत में नेपाल के तराई क्षेत्रों में ब्रिटिश सेना के साथ हुई एक अंतिम झड़प में अमर सिंह वीरगति को प्राप्त हुए थे, जिसके साथ ही बिहार में 1857 के विद्रोह की अंतिम संगठित ज्वाला समाप्त हो गई थी. उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → वर्ष 1857 के विद्रोह के संबंध में विभिन्न इतिहासकारों और विचारकों के प्रसिद्ध कथनों/मतों के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: 1. "यह तथाकथित प्रथम राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम न तो प्रथम, न ही राष्ट्रीय और न ही स्वतंत्रता संग्राम था।" — आर.सी. मजूमदार 2. "यह स्वतंत्रता के लिए एक सुनियोजित राष्ट्रीय युद्ध था, जिसे राष्ट्रीय स्वतंत्रता का प्रथम युद्ध कहा जा सकता है।" — वी.डी. सावरकर 3. "यह केवल एक सिपाही विद्रोह था, जो चर्बी वाले कारतूसों की अफवाह से उपजा एक आकस्मिक और असंगठित सैन्य असंतोष मात्र था।" — सर जॉन सीले 4. "यह धर्म का युद्ध था, जो बर्बरता और सभ्यता के बीच या क्रूरता और स्वतंत्रता के बीच संघर्ष था।" — टी.आर. होम्स उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं? → सिंधु घाटी सभ्यता की सामाजिक, आर्थिक एवं धार्मिक विशेषताओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. सिंधु घाटी सभ्यता एक मात्रकात्मक समाज थी, जिसका प्रमाण खुदाई में बड़ी संख्या में मिली मृण्मूर्तियों (नारी मृण्मूर्तियां) से मिलता है, तथा यहाँ के समाजों में युद्ध हथियारों का अत्यधिक विकास होने के कारण यह स्पष्ट है कि यह एक प्रबल सैन्यवादी (Militaristic) साम्राज्य था। 2. लोथल और चान्हूदरो से मनके बनाने के कारखाने (Bead-making factories) मिले हैं, जहाँ से कार्नेलियन, जैस्पर, शंख और तांबे के मनके तैयार किए जाते थे, और मेसोपोटामिया के अभिलेखों में सिंधु क्षेत्र के लिए 'मेलुहा' (Meluhha) शब्द का प्रयोग व्यापारिक संदर्भ में किया गया है। 3. मोहनजोदड़ो से प्राप्त प्रसिद्ध 'पशुपति मुहर' (Proto-Shiva seal) में एक त्रिमुख देवता को योगमुद्रा में बैठा हुआ दिखाया गया है, जिसके चारों ओर हाथी, बाघ, गैंडा और भैंसा तथा नीचे दो हिरण विराजमान हैं, जो यह दर्शाता है कि सिंधुवासी प्रकृति और पशुओं की पूजा करते थे। 4. हड़प्पा सभ्यता के लोग लोहे से पूरी तरह परिचित थे और उन्होंने अपने कृषि उपकरणों तथा महलों के निर्माण में बड़े पैमाने पर लोहे की कुल्हाड़ियों और तलवारों का प्रयोग किया था, जो उनकी तकनीकी उन्नतता का परिचायक था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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