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History of India
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प्राचीन भारतीय इतिहास के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा/से अभिलेखीय साक्ष्य हुण आक्रमणकारी 'तोरमान' या 'मिहिरकुल' से संबंधित है/हैं?

  1. 1. एरन वराह शिलालेख (मातृविष्णु के शासनकाल से संबंधित)
  2. 2. ग्वालियर प्रशस्ति (मिहिरकुल के समय)
  3. 3. भीतरी स्तंभ लेख (स्कंदगुप्त के समय)
  4. 4. कोसम्बी स्तंभ लेख नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

Detailed Explanation

एरन वराह शिलालेख (मध्य प्रदेश) तोरमान के शासनकाल से संबंधित है, जिसमें उसकी शक्ति और साम्राज्य विस्तार का उल्लेख है। ग्वालियर प्रशस्ति मिहिरकुल के समय की है, जिसमें उसके शासन और गुणों का वर्णन मिलता है। इसके विपरीत, भीतरी स्तंभ लेख गुप्त सम्राट स्कंदगुप्त के शासनकाल से संबंधित है, जिसमें हूणों पर उसकी विजय का उल्लेख है (न कि हूण राजाओं का अपना अभिलेख)। अतः कथन 1 और 2 सही हैं, जबकि कथन 3 गलत है।
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Related Questions

→ मुगलकालीन प्रशासनिक व्यवस्था, मनसबदारी प्रणाली और उसकी विभिन्न विशेषताओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अकबर द्वारा प्रारंभ की गई मनसबदारी प्रणाली में 'जात' और 'सवार' पद यह निर्धारित करते थे कि अधिकारी का व्यक्तिगत दर्जा क्या है और उसे अपने सैन्य दस्ते में कितने घुड़सवार रखने होंगे, जिसमें 'दुस्पासिह-सिंहस्पा' प्रणाली को बाद में शाहजहां द्वारा जोड़ा गया था। 2. जहाँगीर के शासनकाल में 'मदद-इ-माश' (या सयूरगल) के अंतर्गत विद्वानों और धार्मिक व्यक्तियों को दी जाने वाली कर-मुक्त भूमि की जाँच करने और उसे जब्त करने के लिए 'सद्र-उस-सुदूर' विभाग का विशेष पुनर्गठन किया गया था। 3. शाहजहां के शासनकाल में भू-राजस्व निर्धारण के लिए 'दहशाल' (या ज़ब्ती) पद्धति को पूरे साम्राज्य में और अधिक कठोरता से लागू किया गया, तथा फसल के नुकसान के आकलन के लिए पारंपरिक 'नस्क' या 'बटाई' प्रणाली को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया था। 4. औरंगजेब के शासनकाल में 'फतावा-ए-आलमगिरी' का संकलन कराया गया, जो हनफी विधि (Islamic jurisprudence) पर आधारित एक व्यापक इस्लामी कानून का ग्रंथ था, और इसी काल में उसने हिंदू मंदिरों के विध्वंस के साथ-साथ पुनः 'जिजिया' कर लगाया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → महात्मा गांधी के भारत के शुरुआती सत्याग्रहों—विशेष रूप से चंपारण (1917) और खेड़ा (1918)—तथा असहयोग आंदोलन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. चंपारण सत्याग्रह के दौरान राजकुमार शुक्ल के अनुरोध पर गांधीजी ने बिहार के चंपारण का दौरा किया था, जहाँ यूरोपीय नील बागान मालिकों द्वारा किसानों पर थोपी गई 'तीनकठिया' प्रथा (जिसके तहत किसानों को अपनी कुल भूमि के 3/20 भाग पर नील की खेती करना अनिवार्य था) के विरुद्ध सफल संघर्ष किया गया। 2. वर्ष 1918 के खेड़ा सत्याग्रह में गांधीजी ने फसल खराब होने के बावजूद ब्रिटिश प्रशासन द्वारा भू-राजस्व वसूले जाने के विरोध में किसानों का नेतृत्व किया, और इस आंदोलन के दौरान सरदार वल्लभभाई पटेल पहली बार गांधीजी के संपर्क में आए तथा उनके एक प्रमुख सहयोगी के रूप में उभरे। 3. फरवरी 1922 में घटित 'चौरी-चौरा' की हिंसक घटना से आहत होकर महात्मा गांधी ने नागपुर में आयोजित कांग्रेस की बैठक में एकतरफा रूप से असहयोग आंदोलन को तत्काल प्रभाव से वापस लेने की घोषणा कर दी थी, जिससे उस समय के अधिकांश युवा राष्ट्रवादी नेता अत्यधिक संतुष्ट और प्रसन्न थे। 4. असहयोग आंदोलन के दौरान ही पहली बार भारतीय राजनीति में व्यापक स्तर पर ग्रामीण किसानों, महिलाओं और मध्यम वर्ग की सहभागिता सुनिश्चित हुई, जिसने ब्रिटिश शासन को पहली बार एक राष्ट्रव्यापी चुनौती दी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → पानीपत का प्रथम युद्ध कब हुआ? → छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रशासनिक व्यवस्था के संदर्भ में 'अष्टप्रधान' (Ashtapradhan) मंत्रिपरिषद के निम्नलिखित अधिकारियों और उनके विभागों में से कौन-सा एक सुमेलित नहीं है? → 1857 के महान विद्रोह के दौरान झांसी की रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे के सैन्य अभियानों तथा उनके संघर्ष के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मार्च 1858 में सर ह्यूरोज के नेतृत्व में ब्रिटिश सेना द्वारा झांसी के किले को घेर लिए जाने के बाद, रानी लक्ष्मीबाई ने अत्यंत साहस के साथ वीरतापूर्वक रक्षा की और कालपी की ओर प्रस्थान किया, जहाँ वे तात्या टोपे की सेना के साथ मिल गईं। 2. कालपी के पतन के बाद रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे ने ग्वालियर की ओर कूच किया तथा वहाँ के सिंधिया शासक (जयाजीराव सिंधिया) को पराजित कर ग्वालियर के किले पर अधिकार कर लिया, जहाँ नाना साहब के नाम से रानी को पेशवा घोषित किया गया। 3. ग्वालियर के पतन की खबर मिलते ही ब्रिटिश जनरल ह्यूरोज ने तत्काल ग्वालियर की ओर प्रहार किया, और 18 जून 1858 को कोटा की सराय के पास लड़ते हुए रानी लक्ष्मीबाई वीरगति को प्राप्त हुईं। 4. रानी की मृत्यु के पश्चात तात्या टोपे नेपाल की तराई में चले गए, जहाँ ब्रिटिश सेना द्वारा उन्हें कभी पकड़ा नहीं जा सका और उन्होंने जीवनभर अज्ञातवास में ही स्वतंत्रता संग्राम की अलख जगाए रखी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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