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Civil services
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भारत में लोक सेवा आयोग (Public Service Commission) के विकास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. वर्ष 1924 में स्थापित 'ली आयोग' (Lee Commission) की संस्तुति पर पहली बार वर्ष 1926 में एक संघीय लोक सेवा आयोग की स्थापना की गई थी।
- 2. भारत सरकार अधिनियम, 1935 के तहत प्रांतीय स्तर पर 'संघीय लोक सेवा आयोग' के साथ-साथ 'प्रांतीय लोक सेवा आयोग' और दो या अधिक प्रांतों के लिए 'संयुक्त लोक सेवा आयोग' के गठन का प्रावधान किया गया था।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: ब्रिटिश भारत में लोक सेवा आयोग के गठन के लिए लॉर्ड ली की अध्यक्षता में 1924 में 'सुपीरियर सिविल सर्विसेज इन इंडिया' (ली आयोग) का गठन किया गया था। इसकी संस्तुतियों के आधार पर अक्टूबर 1926 में पहली बार एक लोक सेवा आयोग (Public Service Commission) की स्थापना की गई थी। कथन 2 भी सही है: भारत सरकार अधिनियम, 1935 (Government of India Act, 1935) के द्वारा न केवल एक संघीय लोक सेवा आयोग (Federal Public Service Commission) बल्कि प्रत्येक प्रांत के लिए 'प्रांतीय लोक सेवा आयोग' और दो या अधिक राज्यों/प्रांतों के लिए 'संयुक्त लोक सेवा आयोग' (Joint Public Service Commission) की स्थापना का प्रावधान किया गया था।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IV-क' (मूल कर्तव्य - अनुच्छेद 51A) और उससे संबंधित प्रावधानों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मूल कर्तव्यों को स्वर्ण सिंह समिति (Swaran Singh Committee) की सिफारिशों के आधार पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान में जोड़ा गया था, और वर्तमान में संविधान में कुल 11 मूल कर्तव्य हैं, जिनमें से 11वां मूल कर्तव्य 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा जोड़ा गया था।
2. संविधान के अनुच्छेद 51A(g) के अंतर्गत प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य है कि वह वनों, झीलों, नदियों और वन्यजीवों सहित प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा करे और उसका संवर्द्धन करे तथा प्राणीमात्र के प्रति दयाभाव रखे, और यह प्रावधान केवल नागरिकों तक सीमित न होकर राज्य के विरुद्ध भी एक न्यायोचित (Justiciable) दायित्व के रूप में सीधे न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय है।
3. यद्यपि मूल कर्तव्य प्रकृति में गैर-न्यायोचित (Non-justiciable) हैं, तथापि सर्वोच्च न्यायालय ने विभिन्न निर्णयों में यह स्पष्ट किया है कि विधियों की संवैधानिक वैधता की न्यायसंगतता का निर्धारण करते समय अदालतें इस बात को ध्यान में रख सकती हैं कि क्या वह विधि किसी मूल कर्तव्य को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से बनाई गई है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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