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UPTET
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में बाल विकास एवं शिक्षण विधि के अंतर्गत, लॉरेंस कोहलवर्ग (Lawrence Kohlberg) के नैतिक विकास के सिद्धांत की किस अवस्था में व्यक्ति पारंपरिक नैतिकता से उत्तर-पारंपरिक नैतिकता की ओर संक्रमण करता है, जहाँ वह समाज के नियमों को निरपेक्ष मानने के बजाय सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकारों को अधिक प्राथमिकता देता है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
लॉरेंस कोहलवर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत में 'उत्तर-पारंपरिक नैतिकता' (Post-conventional morality) के स्तर पर दो अवस्थाएँ आती हैं - अवस्था 5 (सामाजिक अनुबंध अभिविन्यास) और अवस्था 6 (सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत अभिविन्यास)। अवस्था 4 (अधिकार और सामाजिक व्यवस्था) पारंपरिक स्तर की अंतिम अवस्था है। जब व्यक्ति यह समझने लगता है कि कानून और नियम अटूट नहीं हैं, बल्कि वे समाज के कल्याण के लिए आपसी समझौते (Social Contract) का परिणाम हैं, तो वह अवस्था 5 में प्रवेश करता है, जो पारंपरिक से उत्तर-पारंपरिक नैतिकता की ओर मुख्य संक्रमण काल है।
Related Questions
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हिंदी भाषा और व्याकरण के अंतर्गत 'वाक्य भेद', 'वाच्य' और 'पदबंध' के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. रचना या बनावट के आधार पर वाक्य के तीन प्रमुख भेद होते हैं - सरल वाक्य, मिश्र वाक्य और संयुक्त वाक्य; जबकि अर्थ के आधार पर वाक्य के कुल आठ भेद माने जाते हैं (जैसे विधानवाचक, निषेधवाचक, आज्ञावाचक आदि)।
2. 'कर्मवाच्य' (Passive Voice) का प्रयोग केवल अकर्मक क्रियाओं के साथ ही संभव है, क्योंकि इसमें कर्ता की प्रधानता होती है और कर्म का होना अनिवार्य नहीं होता है, जबकि 'कृतृवाच्य' में क्रिया का संबंध सीधे कर्म से होता है।
3. 'पदबंध' (Phrase) एक से अधिक पदों (शब्दों) का वह समूह है जो मिलकर एक ही पद (इकाई) का कार्य करता है और इसके प्रमुख पाँच भेद होते हैं - संज्ञा पदबंध, सर्वनाम पदबंध, विशेषण पदबंध, क्रिया पदबंध और क्रिया-विशेषण पदबंध।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम अक्षमता' (Learning Disabilities) के विशिष्ट प्रकार 'डिस्लेक्सिया' (Dyslexia - पठन और वर्ण-ध्वनि प्रसंस्करण अक्षमता) के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, मस्तिष्क के 'बाएँ गोलार्ध के विजुअल वर्ड फॉर्म एरिया' (Visual Word Form Area - VWFA), 'ब्रोका क्षेत्र' (Broca's Area - वाक् और श्रवण-ध्वनि संलेखन), और 'सुपीरियर टेम्पोरल गाइरस' (Superior Temporal Gyrus - फॉनोलॉजिकल प्रोसेसिंग) के बीच दृश्य-श्रव्य एकीकरण विफलता, फोनोलॉजिकल डेफिसिट, तथा न्यूरोनल कनेक्टिविटी में बाधा की सक्रियण गतिकी, तथा ऐतिहासिक न्यूरोलॉजिकल प्रत्ययों और आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'न्यूरो-डिस्लेक्सिया ऑप्टिमाइज्ड मल्टीसेंसरी पेडागोजी' (Orton-Gillingham Approach based Neuro-Multisensory Pedagogy) और विद्यार्थियों में ध्वनि-प्रतीक साहचर्य, दृश्य-श्रव्य समन्वय व समग्र संवेगात्मक-संज्ञानात्मक दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'हिंदी भाषा एवं व्याकरण' के अंतर्गत 'संधि और उनके प्रकार' के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा विकल्प 'व्यंजन संधि' (Consonant Sandi) के नियमों—विशेष रूप से 'वर्गीय व्यंजनों के प्रथम वर्ण का तृतीय वर्ण में परिवर्तन' (जैसे क, च, ट, त, प् का ग, ज, ड, द, ब में बदलना) तथा 'प्रथम वर्ण का पंचम वर्ण में परिवर्तन'—के व्याकरणिक विश्लेषण और उनके सबसे सटीक व मानकीकृत उदाहरणों (जैसे 'दिग्गज', 'जगदीश', 'वाग्जाल', 'उन्नयन', और 'चिन्मय') के वैधानिक एवं तार्किक स्वरूप को प्रदर्शित करता है?
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उत्तर प्रदेश के भौगोलिक विभाजन, मृदा प्रकार और कृषि जलवायु प्रदेशों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उत्तर प्रदेश को कृषि जलवायु क्षेत्रों (Agro-Climatic Zones) के आधार पर कुल 9 प्रमुख जोनों में विभाजित किया गया है, जो राज्य की मृदा, वर्षा और तापमान की भिन्नता को दर्शाते हैं।
2. उत्तर प्रदेश में पाई जाने वाली 'भूड़' (Bhoor) मृदा मुख्य रूप से गंगा-यमुना दोआब के ऊंचे मैदानी भागों में मिलने वाली एक प्रकार की हल्की और बलूची-दोमट मिट्टी है, जिसमें बालू की अधिकता होती है और जलधारण क्षमता कम होती है।
3. बुंदेलखंड क्षेत्र में पाई जाने वाली 'मार' (Maar) और 'काबर' (Kabar) मृदाएँ चिकनी और उपजाऊ मिट्टी के प्रकार हैं, जिन्हें स्थानीय भाषा में 'कपास मृदा' या भारी काली मिट्टी के समान गुणों वाला माना जाता है, जो सूखने पर कड़ी हो जाती हैं।
4. उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र में उत्तर से दक्षिण की ओर बढ़ने पर समानांतर रूप से विस्तृत 'भाबर' (Bhabhar) पेटी पाई जाती है, जो महीन जलोढ़ और उपजाऊ मिट्टी से निर्मित होने के कारण धान और गन्ने की सघन कृषि के लिए सर्वाधिक उपयुक्त मानी जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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उत्तर प्रदेश के लोकगीतों और उनकी गायन शैलियों के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. कजरी - मिर्जापुर और वाराणसी - यह मुख्य रूप से वर्षा ऋतु (सावन के महीने) में गाया जाने वाला एक पारंपरिक लोकगीत है, जिसमें राधा-कृष्ण के प्रेम प्रसंगों और प्रकृति के सौंदर्य का वर्णन होता है।
2. आल्हा - बुंदेलखंड क्षेत्र - यह वीर रस से भरपूर एक प्रसिद्ध लोकगाथा गीत है, जो आल्हा और ऊदल नामक दो महान योद्धाओं की वीरता और लड़ाइयों का वर्णन करता है, और इसे मुख्य रूप से वर्षा ऋतु में गाया जाता है।
3. रसिया - ब्रज क्षेत्र - यह होली और फाल्गुन के महीनों में भगवान कृष्ण और गोपियों की लीलाओं के आधार पर गाया जाने वाला लोकगीत है, जो मुख्य रूप से मयूर नृत्य और चरकुला नृत्य के साथ प्रस्तुत किया जाता है।
4. चैती - गोरखपुर और देवरिया - यह चैत्र मास में गाया जाने वाला एक प्रेम प्रधान लोकगीत है, जिसे मुख्य रूप से विवाह समारोहों के दौरान दुल्हे की विदाई और स्वागत के समय गाया जाता है।
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से सही सुमेलित हैं?
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