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UPTET
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में बाल विकास एवं शिक्षण विधि के अंतर्गत, लॉरेंस कोहलवर्ग (Lawrence Kohlberg) के नैतिक विकास के सिद्धांत की किस अवस्था में व्यक्ति पारंपरिक नैतिकता से उत्तर-पारंपरिक नैतिकता की ओर संक्रमण करता है, जहाँ वह समाज के नियमों को निरपेक्ष मानने के बजाय सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकारों को अधिक प्राथमिकता देता है?

Detailed Explanation

लॉरेंस कोहलवर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत में 'उत्तर-पारंपरिक नैतिकता' (Post-conventional morality) के स्तर पर दो अवस्थाएँ आती हैं - अवस्था 5 (सामाजिक अनुबंध अभिविन्यास) और अवस्था 6 (सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत अभिविन्यास)। अवस्था 4 (अधिकार और सामाजिक व्यवस्था) पारंपरिक स्तर की अंतिम अवस्था है। जब व्यक्ति यह समझने लगता है कि कानून और नियम अटूट नहीं हैं, बल्कि वे समाज के कल्याण के लिए आपसी समझौते (Social Contract) का परिणाम हैं, तो वह अवस्था 5 में प्रवेश करता है, जो पारंपरिक से उत्तर-पारंपरिक नैतिकता की ओर मुख्य संक्रमण काल है।
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