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General Science
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मानव शरीर में 'कोशिका चक्र' (Cell Cycle) के 'जी-शून्य (G0) प्रावस्था' (G0 Phase / Quiescent stage) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. यह प्रावस्था उन कोशिकाओं द्वारा अपनाई जाती है जो विभाजन बंद कर देती हैं लेकिन चयापचय रूप से सक्रिय बनी रहती हैं, जैसे कि वयस्क मनुष्यों में अधिकांश तंत्रिका कोशिकाएं (Neurons)।
- 2. जी-शून्य प्रावस्था में प्रवेश करने वाली कोशिकाएं स्थाई रूप से कोशिका चक्र से बाहर हो जाती हैं और कभी भी पुनः विभाजित होने की क्षमता प्राप्त नहीं कर सकतीं।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: 'जी-शून्य (G0) प्रावस्था' या शांत अवस्था (Quiescent stage) में कोशिकाएं सक्रिय रूप से चयापचय (Metabolically active) रहती हैं, लेकिन जीव की आवश्यकता के अनुसार आगे विभाजित नहीं होती हैं। उदाहरण के लिए, तंत्रिका कोशिकाएं और हृदय की मांसपेशियां आमतौर पर इस प्रावस्था में प्रवेश करती हैं।
कथन 2 गलत है: जी-शून्य प्रावस्था में जाने वाली कोशिकाएं स्थाई रूप से विभाजित होने की क्षमता नहीं खोतीं। अधिकांश कोशिकाएं आवश्यकता पड़ने पर (जैसे चोट या क्षति की स्थिति में) मिटोसिस (Mitosis) या कोशिका चक्र में वापस लौट सकती हैं और पुनः विभाजित हो सकती हैं।
Related Questions
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कार्बनिक रसायन में हाइड्रोकार्बन और ईंधन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संतृप्त हाइड्रोकार्बन (ऐल्केन) में कार्बन परमाणु आपस में एकल बंध द्वारा जुड़े होते हैं और इनका सामान्य सूत्र $C_n{H_{2n+2}}$ होता है, जो प्रतिस्थापन अभिक्रियाओं (Substitution reactions) में आसानी से भाग लेते हैं।
2. जब पेट्रोलियम का आंशिक आसवन (Fractional Distillation) किया जाता है, तो उच्च क्वथनांक वाले अंश सबसे पहले वाष्पित होकर ऊपर उठते हैं, जबकि निम्न क्वथनांक वाले भारी अंश (जैसे डामर या बिटुमिन) सबसे नीचे अवशेष के रूप में प्राप्त होते हैं।
3. ऐल्काइन्स (Alkynes) असंतृप्त हाइड्रोकार्बन होते हैं जिनमें कम से कम एक त्रिक बंध (Triple bond) पाया जाता है, और इनका सामान्य सूत्र $C_n{H_{2n-2}}$ होता है, तथा ये योगात्मक (Addition) और अम्लीय प्रकृति प्रदर्शित करते हैं।
4. गैसोलीन की गुणवत्ता का निर्धारण 'ऑक्टेन संख्या' (Octane Number) द्वारा किया जाता है, जिसमें उच्च ऑक्टेन रेटिंग के लिए 'n-हेप्टेन' को सर्वोत्तम मानक माना जाता है जबकि 'आइसो-ऑक्टेन' को निकृष्ट ईंधन माना जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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विलयन के अणुसंख्यक गुणों (Colligative properties) और उत्प्रेरण (Catalysis) की क्रियाविधि के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी विलायक में अवाष्पशील विलेय मिलाने पर विलयन के वाष्प दाब में होने वाला आपेक्षिक अवनमन (Relative lowering of vapour pressure) विलेय के मोल अंश के बराबर होता है, और यह एक अणुसंख्यक गुण है जो विलेय कणों की संख्या पर निर्भर करता है, न कि उनकी प्रकृति पर।
2. 'वांट हॉफ गुणांक' ($i$) का मान यदि किसी वैद्युत अपघट्य के जलीय विलयन में संगुणन (Association) होता है, तो 1 से कम होता है, जबकि पूर्ण वियोजन की स्थिति में यह उत्पन्न होने वाले कुल आयनों की संख्या के बराबर होता है।
3. एन्जाइम उत्प्रेरण (Enzyme catalysis) में प्रयुक्त होने वाले जैव-उत्प्रेरक अत्यधिक विशिष्ट होते हैं और वे रासायनिक अभिक्रिया की सक्रियण ऊर्जा (Activation energy) को बढ़ा देते हैं, जिससे अभिक्रिया की दर तीव्र हो जाती है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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कौन सी गैस ओजोन परत को सर्वाधिक नुकसान पहुँचाती है?
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आवर्त सारणी के तत्वों के आवर्ती गुणों और उनकी विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर परमाणु त्रिज्या घटती है और प्रभावी नाभिकीय आवेश ($Z_{eff}$) में वृद्धि होती है, जिसके कारण प्रथम आयनन एन्थैल्पी का मान सामान्यतः बढ़ता है, हालांकि नाइट्रोजन ($N$) की प्रथम आयनन एन्थैल्पी अपने ठीक बाद आने वाले ऑक्सीजन ($O$) तत्व से अधिक होती है, जिसका मुख्य कारण नाइट्रोजन के अर्ध-पूरित (Half-filled) $2p$ कक्षकों का अतिरिक्त स्थायित्व है।
2. 'इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी' (Electron Gain Enthalpy) का मान हमेशा ऋणात्मक होता है, और किसी भी उदासीन गैसीय परमाणु द्वारा एक अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने पर हमेशा ऊर्जा का उत्सर्जन ही होता है, चाहे परमाणु का आकार या इलेक्ट्रॉनिक विन्यास कुछ भी हो।
3. हैлोजेन समूह में फ्लोरीन ($F$) की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का ऋणात्मक मान अपने ही समूह के अगले तत्व क्लोरीन ($Cl$) की तुलना में अधिक होता है, क्योंकि फ्लोरीन का आकार बहुत छोटा होता है, जिसके कारण अंतःइलेक्ट्रॉनी प्रतिकर्षक (Interelectronic repulsion) बल का मान बढ़ जाता है।
4. लैंथानाइड संकुचन (Lanthanoid contraction) के कारण $5d$ श्रेणी के संक्रमण तत्वों (जैसे Hafnium, $Hf$) की परमाणु और आयनिक त्रिज्याएँ अपने ठीक ऊपर स्थित $4d$ श्रेणी के तत्वों (जैसे Zirconium, $Zr$) के लगभग बराबर हो जाती हैं।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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धातुओं, अधातुओं और उनके यौगिकों के रासायनिक गुणों तथा निष्कर्षण प्रक्रियाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. एल्युमिनियम के निष्कर्षण के लिए हॉल-हెరॉल्ट प्रक्रम (Hall-Héroult process) में शुद्ध एलुमिना ($Al_2O_3$) का गलनांक बहुत अधिक होने के कारण इसे पिघले हुए क्रायोलाइट ($Na_3AlF_6$) और फ्लूऑर्स्पर ($CaF_2$) के मिश्रण में घोला जाता है, जो विलायक के रूप में कार्य करते हुए मिश्रण की विद्युत चालकता को भी बढ़ाते हैं।
2. 'सफेद फॉस्फोरस' (White Phosphorus) अत्यधिक प्रतिक्रियाशील, विषैला और दीप्तिशील (Phosphorescent) ठोस होता है, जिसकी आणविक संरचना साधारणतः चतुष्फलकीय ($P_4$) होती है, और हवा में स्वतः जलने से रोकने के लिए इसे जल के नीचे रखा जाता है।
3. संक्रमण धातुओं के यौगिकों द्वारा रंग प्रदर्शित करने का प्रमुख कारण उनके आयनों में 'd-d संक्रमण' (d-d transition) या 'चार्ज ट्रांसफर स्पेक्ट्रा' का होना है, जिसमें अपूर्ण रूप से भरे d-कक्षकों के बीच इलेक्ट्रॉनों का उत्तेजन दृश्य प्रकाश क्षेत्र के अवशोषण से होता है।
4. सोडियम कार्बोनेट (वाशिंग सोडा) का बड़े पैमाने पर उत्पादन 'सॉलवे प्रक्रम' (Solvay process) द्वारा किया जाता है, जिसमें अमोनिया और कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग होता है, तथा इस प्रक्रम की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि अमोनिया को पुनर्प्राप्त करने के लिए बुझे हुए चूने ($Ca(OH)_2$) के साथ अमोनियम क्लोराइड की अभिक्रिया कराई जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
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