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UPTET
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम के पठार' (Plateaus of Learning) के मनोवैज्ञानिक संदर्भ में, गेस्केल (Gaskell) तथा अन्य मनोवैज्ञानिकों के अनुसार सीखने की प्रक्रिया में उत्पन्न होने वाले 'पठार' के निर्माण का मुख्य कारण निम्नलिखित में से किसे माना जाता है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के अंतर्गत बाल विकास और शिक्षण विधि में 'अधिगम के पठार' (Plateaus of Learning) एक महत्वपूर्ण टॉपिक है। जब सीखने की प्रक्रिया में कुछ समय के लिए उन्नति होना बंद हो जाती है और ग्राफ एक सीधी रेखा (पठार) बना लेता है, तो इसे अधिगम का पठार कहते हैं। गेस्केल (Gaskell), रॉस (Ross) और अन्य मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, पठार बनने के प्रमुख कारणों में रुचि या प्रेरणा का अभाव, शारीरिक व मानसिक थकान, कार्य की जटिलता, पुरानी आदत का नई आदत से हस्तक्षेप (Negative Transfer), और अनुचित शिक्षण विधियां शामिल हैं। अतः विकल्प (a) इस संदर्भ में सबसे सटीक कारण है।
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'सृजनात्मकता (Creativity) और अपसारी चिंतन (Divergent Thinking) के न्यूरो-संज्ञानात्मक सिद्धांतों' के संदर्भ में, जे.पी. गिलफोर्ड (J.P. Guilford) द्वारा प्रतिपादित 'बुद्धि की संरचना मॉडल' (Structure of Intellect Model) के अंतर्गत 'अपसारी उत्पादन' (Divergent Production) के घटकों—'धाराप्रवाहता' (Fluency), 'लचीलापन' (Flexibility), 'मौलिकता' (Originality), और 'विस्तारीकरण' (Elaboration)—के न्यूरो-संज्ञानात्मक स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'डिफ़ॉल्ट मोड नेटवर्क' (Default Mode Network - DMN) और 'एक्जीक्यूटिव कंट्रोल नेटवर्क' (Executive Control Network) के बीच रचनात्मक विचार सृजन और आलोचनात्मक मूल्यांकन की सक्रियण गतिकी, तथा एडवर्ड डी बोनो (Edward de Bono) द्वारा प्रतिपादित 'पार्श्व चिंतन' (Lateral Thinking) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, समस्या-समाधान के अभिनव उपागमों और विद्यार्थियों में सृजनात्मक क्षमता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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उत्तर प्रदेश की ऊर्जा अवसंरचना, प्रमुख बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाओं और विद्युत उत्पादन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उत्तर प्रदेश की सबसे पुरानी नहर प्रणाली 'पूर्वी यमुना नहर' (Eastern Yamuna Canal) है, जिसका निर्माण वर्ष 1830 में अंग्रेजों के शासनकाल में यमुना नदी के बाएं तट से फैजपुर (सहारनपुर) के पास से निकाला गया था, और यह प्रणाली मुख्य रूप से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों में सिंचाई सुविधा प्रदान करती है।
2. रिहंद बांध परियोजना (जो गोविंद बल्लभ पंत सागर के नाम से जानी जाती है) सोन नदी की प्रमुख सहायक नदी रिहंद पर सोनभद्र जिले के पिपरी नामक स्थान पर स्थित है, और इसके साथ जुड़ा हुआ तापीय और जलविद्युत परिसर राज्य के औद्योगिक विकास में केंद्रीय भूमिका निभाता है।
3. उत्तर प्रदेश के हर्रैया (अमरोहा) जिले में राज्य का पहला परमाणु ऊर्जा संयंत्र स्थापित किया जा रहा है, जिसकी कुल नियोजित क्षमता 2800 मेगावाट है और यह देश के स्वदेशी प्रेसurized Heavy Water Reactors (PHWR) तकनीकी पर आधारित है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
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उत्तर प्रदेश के भौगोलिक एवं जलवायु परिदृश्य के संदर्भ में, राज्य के किस क्षेत्र में 'उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वन' (Tropical Deciduous Forests) के अंतर्गत 'साल' (Shorea robusta) के वृक्षों का सबसे अधिक घनत्व पाया जाता है और इस क्षेत्र की प्रमुख जलवायु विशेषता क्या है?
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उत्तर प्रदेश के भौगोलिक स्वरूप, चट्टानी संरचनाओं और खनिज संसाधनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उत्तर प्रदेश के दक्षिणी पठारी क्षेत्र (बुंदेलखंड और बघेलखंड का भाग) में प्राचीन काल की विंध्यन और आर्कियन क्रम की चट्टानें पाई जाती हैं, जहाँ ग्रेनाइट, संगमरमर, डायमंड और ऐंडालुसाइट जैसे खनिज प्रचुर मात्रा में मिलते हैं।
2. 'सोनभद्र' जिला उत्तर प्रदेश का एकमात्र ऐसा जिला है जहाँ चूना पत्थर (Limestone), कोयला (Coal), और डोलोमाइट (Dolomite) जैसे खनिज बड़े पैमाने पर पाए जाते हैं, और यहीं पर उत्तर प्रदेश का एकमात्र सीमेंट कारखाना भी स्थित है।
3. उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर और सोनभद्र जिलों में पाई जाने वाली नॉन-प्लास्टिक फायर क्ले (Fire Clay) का उपयोग मुख्य रूप से उच्च तापमान सहन करने वाली ईंटों और refractories के निर्माण में किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) और बाल-केन्द्रित शिक्षा के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. समावेशी शिक्षा का मुख्य उद्देश्य केवल विशेष आवश्यकता वाले बालकों (CWSN) को सामान्य विद्यालयों में प्रवेश देना है, और इसके लिए सामान्य पाठ्यचर्या या शिक्षण विधियों में किसी भी प्रकार के लचीलेपन या अनुकूलन की आवश्यकता नहीं होती है।
2. 'सार्वभौमिक डिजाइन फॉर लर्निंग' (Universal Design for Learning - UDL) का सिद्धांत समावेशी कक्षाओं में अधिगम की बाधाओं को दूर करने के लिए बहुविध प्रस्तुतिकरण (Multiple Means of Representation), बहुविध अभिव्यक्ति (Multiple Means of Expression) और बहुविध सहभागिता (Multiple Means of Engagement) के प्रावधान पर बल देता है।
3. शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (RTE Act 2009) और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) दोनों ही दिव्यांग और सामाजिक-सांस्कृतिक रूप से वंचित बच्चों की मुख्यधारा की शिक्षा के लिए 'समान अवसर' और 'विशेष सहायता' दोनों की वकालत करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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