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UPTET
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम के पठार' (Plateaus of Learning) के मनोवैज्ञानिक संदर्भ में, गेस्केल (Gaskell) तथा अन्य मनोवैज्ञानिकों के अनुसार सीखने की प्रक्रिया में उत्पन्न होने वाले 'पठार' के निर्माण का मुख्य कारण निम्नलिखित में से किसे माना जाता है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के अंतर्गत बाल विकास और शिक्षण विधि में 'अधिगम के पठार' (Plateaus of Learning) एक महत्वपूर्ण टॉपिक है। जब सीखने की प्रक्रिया में कुछ समय के लिए उन्नति होना बंद हो जाती है और ग्राफ एक सीधी रेखा (पठार) बना लेता है, तो इसे अधिगम का पठार कहते हैं। गेस्केल (Gaskell), रॉस (Ross) और अन्य मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, पठार बनने के प्रमुख कारणों में रुचि या प्रेरणा का अभाव, शारीरिक व मानसिक थकान, कार्य की जटिलता, पुरानी आदत का नई आदत से हस्तक्षेप (Negative Transfer), और अनुचित शिक्षण विधियां शामिल हैं। अतः विकल्प (a) इस संदर्भ में सबसे सटीक कारण है।
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'सामाजिक अधिगम और अवलोकन संबंधी विकास' के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, अल्बर्ट बंडूरा (Albert Bandura) द्वारा प्रतिपादित 'सामाजिक अधिगम सिद्धांत' (Social Learning Theory) के अंतर्गत 'अवलोकन, प्रतिधारण, पुनरुत्पादन और अभिप्रेरणा' के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'मिरर न्यूरॉन सिस्टम' (MNS - विशेष रूप से इन्फीरियर फ्रंटल गाइरस और इन्फीरियर पैरिएटल लोब), 'लिम्बिक सिस्टम' और 'प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' के बीच दूसरों के व्यवहार की नकल, सहानुभूतिपूर्ण अनुकरण और vicarious reinforcement (प्रत्यक्ष रहित सुदृढ़ीकरण) की सक्रियण गतिकी, तथा जूलियन रोटर (Julian Rotter) द्वारा प्रतिपादित 'नियंत्रण का स्थान' (Locus of Control) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, रोल-मॉडल आधारित प्रेक्षणात्मक शिक्षाशास्त्र (Observational Role-Model Pedagogy) और विद्यार्थियों में सामाजिक-संवेगात्मक दक्षता, स्व-प्रभावकारिता (Self-Efficacy) व समग्र नैतिक व्यवहार के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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