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UPTET
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम के स्थानांतरण' (Transfer of Learning) के संदर्भ में, मनोवैज्ञानिक सी.डब्ल्यू. वैन टोरन (C.W. Van Tören) या पारंपरिक रूप से 'अधिगम स्थानांतरण के द्विपक्षीय या क्रॉस एजुकेशनल थ्योरी' (Cross-Educational Transfer) के अंतर्गत, जब शरीर के एक अंग द्वारा सीखे गए कौशल का प्रशिक्षण दूसरे सममित (Symmetric) अंग को स्वतः स्थानांतरित हो जाता है (जैसे दाहिने हाथ से लिखने का कौशल बाएं हाथ में आ जाना), तो इस प्रकार के स्थानांतरण को निम्नलिखित में से किस विशिष्ट नाम से जाना जाता है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
अधिगम के स्थानांतरण के विभिन्न रूपों में 'पार्श्वीय स्थानांतरण' या 'द्विपक्षीय स्थानांतरण' (Bilateral Transfer / Cross-Educational Transfer) वह प्रक्रिया है जिसमें शरीर के एक अंग (जैसे दायां हाथ या पैर) द्वारा प्राप्त प्रशिक्षण या सीखे गए कौशल का लाभ या प्रभाव शरीर के दूसरे सममित (Symmetric) अंग (जैसे बायां हाथ या पैर) को स्वतः प्राप्त हो जाता है। इसका कारण हमारे तंत्रिका तंत्र (Nervous System) और मस्तिष्क के दोनों गोलार्धों (Hemispheres) के बीच का समन्वय है। यह प्रश्न UPTET परीक्षा के बाल विकास एवं शिक्षण विधि के अंतर्गत 'अधिगम के स्थानांतरण के प्रकार' से संबंधित है।
Related Questions
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उत्तर प्रदेश के भौगोलिक एवं ऐतिहासिक संदर्भ में प्राचीन 'महाजनपद काल' और वर्तमान प्रशासनिक भूगोल के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बौद्ध ग्रंथ 'अंगुत्तर निकाय' और जैन ग्रंथ 'भगवती सूत्र' में उल्लिखित 16 महाजनपदों में से 'चेदि महाजनपद' वर्तमान उत्तर प्रदेश के बांदा, चित्रकूट और हमीरपुर जैसे बुंदेलखंडीय जिलों के क्षेत्रों में विस्तृत था और इसकी राजधानी 'शक्तिमती' थी।
2. प्राचीन 'कोशल महाजनपद' को दो भागों में विभाजित करने वाली मुख्य नदी 'सयू (घाघरा)' थी, तथा इसकी उत्तरी शाखा की राजधानी 'श्रावस्ती' एवं दक्षिणी शाखा की राजधानी 'साकेत (अयोध्या)' थी।
3. प्राचीन 'मल्ल महाजनपद' की दो राजधानियाँ थीं- 'कुशीनगर' (जहाँ भगवान बुद्ध का महापरिनिर्वाण हुआ) और 'पावा' (जहाँ महावीर स्वामी को निर्वाण प्राप्त हुआ था)।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
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उत्तर प्रदेश के भौगोलिक प्रदेशों और भूगर्भिक संरचना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उत्तर प्रदेश का भौगोलिक क्षेत्र मुख्य रूप से प्राचीन गोंडवाना लैंड (Gondwana Land) के प्रायद्वीपीय पठार का उत्तर-पूर्वी विस्तार है, जिसका अधिकांश भाग गंगा के मैदान के रूप में जाना जाता है।
2. उत्तर प्रदेश के दक्षिण में स्थित पठारी क्षेत्र (बुंदेलखंड और बघेलखंड का पठार) विंध्यन क्रम की चट्टानों से बना है, जहाँ प्रचुर मात्रा में चूना पत्थर, बॉक्साइट और डायमंड (हीरा) पाए जाते हैं।
3. उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के पास शिवालिक पहाड़ियों की तलहटी में 'भाबर' क्षेत्र का विस्तार पाया जाता है, जहाँ नदियाँ कंकड़-पत्थरों और मोटे अवसादों के नीचे विलुप्त हो जाती हैं और धरातल पर नहीं दिखती हैं।
4. उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र में पुरानी जलोढ़ मिट्टी (बांगर) पाई जाती है, जो प्रतिवर्ष बाढ़ के पानी से नवीनकृत होती रहती है और इस कारण यह क्षेत्र कृषि की दृष्टि से सबसे कम उपजाऊ माना जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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बुधवार और गुरुवार के बीच कौन सा दिन आता है?
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उत्तर प्रदेश के भौगोलिक एवं भू-गर्भीय विभाजन के अंतर्गत 'विंध्यन पर्वतीय क्षेत्र' (Vindhyan Region) और उसके भौतिक स्वरूप के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उत्तर प्रदेश के दक्षिण-पूर्वी और दक्षिणी हिस्से में स्थित यह क्षेत्र मुख्य रूप से विंध्यन क्रम की प्राचीन बलुआ पत्थर, चूना पत्थर और शेल (Shale) जैसी अवसादी चट्टानों से निर्मित है, जो सोनभद्र और मिर्जापुर जिलों तक विस्तृत हैं।
2. इस क्षेत्र की प्रमुख नदियाँ जैसे बेलन, कनहर और रिहंद उत्तर प्रदेश के पठारी भाग से बहती हुई सोन नदी में मिलती हैं, और इन नदियों की घाटियों में प्राचीन पाषाण युगीन (Prehistoric) सभ्यता के महत्वपूर्ण अवशेष प्राप्त हुए हैं।
3. विंध्यन क्षेत्र की जलवायु अर्ध-शुष्क होने के कारण यहाँ वनों का विस्तार बहुत कम पाया जाता है और कृषि योग्य भूमि का प्रतिशत उत्तर प्रदेश के मैदानी भागों की तुलना में काफी अधिक है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र' के अंतर्गत 'अधिगम के सिद्धांत' (Theories of Learning) के संदर्भ में, एडवर्ड थॉर्नडाइक (Edward Thorndike) द्वारा प्रतिपादित 'प्रयास एवं त्रुटि का सिद्धांत' (Trial and Error Theory) के अंतर्गत सीखने के तीन प्रमुख प्राथमिक नियमों—अर्थात 'तत्परता का नियम' (Law of Readiness), 'अभ्यास का नियम' (Law of Use and Disuse), और 'प्रभाव का नियम' (Law of Effect)—तथा उनके साथ प्रतिपादित पाँच गौरण (द्वितीयक) नियमों के मनोवैज्ञानिक, शैक्षिक एवं व्यावहारिक अनुप्रयोगों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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