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UPTET
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम के संज्ञानात्मक सिद्धांतों' के संदर्भ में, एडवर्ड टॉलमैन (Edward Tolman) द्वारा प्रतिपादित 'चिह्न-Gestalt अधिगम सिद्धांत' (Sign-Gestalt Learning Theory) के अंतर्गत 'अव्यक्त अधिगम' (Latent Learning), 'संज्ञानात्मक मानचित्र' (Cognitive Maps), और 'अपेक्षाओं के सिद्धांत' (Expectancy Theory) के वैज्ञानिक स्वरूप, तथा वुल्फगांग कोहलर के 'सूझ के सिद्धांत' के साथ उनके तुलनात्मक अंतर्संबंधों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?

Detailed Explanation

एडवर्ड सी. टॉलमैन (Edward C. Tolman) का 'चिह्न-Gestalt अधिगम सिद्धांत' (Sign-Gestalt Learning Theory या Purposive Behaviorism) व्यवहारवाद और गेस्टाल्ट मनोविज्ञान का एक अनूठा संयोजन है। टॉलमैन के अनुसार, प्राणी अपने पर्यावरण में संकेतों (Signs) और लक्ष्यों के बीच संबंधों का एक मानसिक खाका तैयार करता है, जिसे 'संज्ञानात्मक मानचित्र' (Cognitive Maps) कहते हैं। उनके प्रसिद्ध 'चूहे और भूलभुलैया' के प्रयोगों ने 'अव्यक्त अधिगम' (Latent Learning) की अवधारणा को जन्म दिया, जिसके अनुसार अधिगम बिना किसी तुरंत पुरस्कार या पुनर्बलन के भी हो सकता है (अर्थात आंतरिक रूप से होता रहता है), परंतु जब तक उचित अभिप्रेरणा या पुरस्कार न मिले, उसका निष्पादन (Performance) प्रकट नहीं होता। अतः विकल्प (b) इस सिद्धांत के वैज्ञानिक स्वरूप और अंतर्संबंधों को पूर्ण रूप से सटीक और सत्य रूप में परिभाषित करता है।
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