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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'बुद्धि के संरचनात्मक मॉडलों' के संदर्भ में, जे.पी. गिलफोर्ड (J.P. Guilford) द्वारा प्रतिपादित 'बुद्धि की संरचना का सिद्धांत' (Structure of Intellect - SOI Model) के अंतर्गत संक्रियाएँ (Operations), विषय-वस्तु (Contents), और उत्पाद (Products) के त्रि-आयामी वर्गीकरण के वैज्ञानिक स्वरूप तथा उनके कुल कारकों (पहले 120, तत्पश्चात 150 और 180) की विकासात्मक संरचना, तथा लुईस थर्स्टन (Louis Thurstone) द्वारा प्रतिपादित 'प्राथमिक मानसिक योग्यताओं का सिद्धांत' (Primary Mental Abilities) के अंतर्गत प्रदत्त सात स्वतंत्र कारकों (जैसे- वर्बल कॉम्प्रिहेंशन, वर्ड फ्लूएंसी, न्यूमेरिकल एबिलिटी आदि) के पारस्परिक अंतर्संबंधों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?

Detailed Explanation

जे.पी. गिलफोर्ड (J.P. Guilford) ने बुद्धि की संरचना का त्रि-आयामी मॉडल (Structure of Intellect - SOI Model) प्रस्तुत किया, जिसमें बुद्धि को तीन आयामों—संक्रियाएँ (Operations: 5 प्रकार), विषय-वस्तु (Contents: 5 या 4 प्रकार), और उत्पाद (Products: 6 प्रकार)—के रूप में वर्गीकृत किया गया है (शुरुआत में 5 × 5 × 6 = 120 कारक, बाद में बढ़कर 150 और 180 हुए)। दूसरी ओर, लुईस थर्स्टन (Louis Thurstone) ने 'समूह कारक सिद्धांत' या 'प्राथमिक मानसिक योग्यताओं का सिद्धांत' (Primary Mental Abilities) प्रतिपादित किया, जिसमें उन्होंने स्पीयरमैन के एकल 'g' कारक को अस्वीकार करते हुए 7 प्राथमिक मानसिक योग्यताओं (जैसे- वर्बल कॉम्प्रिहेंशन, स्पेस फैक्टर, न्यूमेरिकल एबिलिटी, वर्ड फ्लूएंसी आदि) को बुद्धि का आधार बताया। अत: विकल्प (A) इन दोनों सिद्धांतों के वैज्ञानिक और संदर्भात्मक स्वरूप का सबसे सटीक वर्णन करता है।
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'बुद्धि के त्रि-आयामी सिद्धांत' (Structure of Intellect Model) के संदर्भ में, अमेरिकी मनोवैज्ञानिक जे.पी. गिलफोर्ड (J.P. Guilford) द्वारा प्रतिपादित मॉडल के अंतर्गत बौद्धिक योग्यताओं के तीन आयामों—'संक्रियाएँ' (Operations), 'विषय-वस्तु' (Contents), और 'उत्पाद' (Products)—के वैज्ञानिक वर्गीकरण और उनके कुल स्वतंत्र कारकों की संख्या के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है? उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'बाल विकास के सिद्धांत और अवस्थाएँ' (Principles and Stages of Child Development) के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, जीन पियाजे (Jean Piaget) द्वारा प्रतिपादित 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' की पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था (Preoperational Stage: अहंकेन्द्रवाद, जीववाद और अनुत्क्रमणीयता) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'इन्फीरियर फ्रंटल गाइरस', 'एंटिओर इंसुला', और 'हिप्पोकैम्पस' के बीच प्रतीकात्मक विचलन, परिप्रेक्ष्य लेने (Perspective-taking) की अक्षमता, और मानसिक अनुकरण (Mental Simulation) के अभाव की सक्रियण गतिकी, तथा लेव वाइगोत्स्की (Lev Vygotsky) के 'सामाजिक-सांस्कृतिक विकास सिद्धांत' के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'न्यूरो-डेवलपमेंटल ऑप्टिमाइज्ड पेडागोजी' (Neuro-Developmental Optimized Pedagogy) और विद्यार्थियों में विकेंद्रीकरण (Decentration), स्व-नियमन (Self-Regulation) व समग्र संज्ञानात्मक-संवेगात्मक दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है? उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम अक्षमता' (Learning Disabilities) के विशिष्ट प्रकार 'डिस्ग्राफिया' (Dysgraphia - लेखन और मोटर-ग्राफिक प्रसंस्करण अक्षमता) के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, मस्तिष्क के 'बाएँ गोलार्ध के एक्सरूरियल मोटर कॉर्टेक्स' (Exrorial Motor Cortex / Motor Strip - हाथ की सूक्ष्म मांसपेशियों का नियंत्रण), 'बेसल गैन्ग्लिया' (Basal Ganglia - मोटर कौशल का क्रमांकन और स्वचालित लेखन), तथा 'सेरिबैलम' (Cerebellum - हस्त-नेत्र समन्वय और लेखन लयबद्धता) के बीच न्यूरो-मस्कुलर समन्वय विफलता, दृश्य-स्थानिक और गतिज एकीकरण (Visuo-Motor Integration) में बाधा की सक्रियण गतिकी, तथा अलेक्जेंडर लुरिया के 'कार्यात्मक मस्तिष्क इकाइयों' (Functional Units of Brain) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'न्यूरो-डिस्ग्राफिया ऑप्टिमाइज्ड मल्टीसेंसरी काइनेस्थेटिक पेडागोजी' (Neuro-Dysgraphia Optimized Multisensory Kinesthetic Pedagogy) और विद्यार्थियों में ग्राफिक प्रतीक निर्माण, सूक्ष्म पेशीय समन्वय व समग्र संवेगात्मक-संज्ञानात्मक दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है? बच्चों के सामाजिक-सांस्कृतिक विकास (Socio-Cultural Development) और लेव वायगोत्स्की के सिद्धांतों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. लेव वायगोत्स्की के अनुसार, बच्चे का विकास उसकी सांस्कृतिक और सामाजिक अंतःक्रियाओं (Social Interactions) से अलग होकर नहीं हो सकता, और भाषा संज्ञानात्मक विकास को आकार देने में सबसे महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक उपकरण (Psychological Tool) है। 2. 'समीपस्थ विकास का क्षेत्र' (Zone of Proximal Development - ZPD) उस अंतर को दर्शाता है जो बच्चा अकेले किसी समस्या को हल करने में सक्षम होता है और उस स्तर के बीच होता है जिसे वह किसी वयस्क या अधिक ज्ञानी अन्य (More Knowledgeable Other - MKO) के मार्गदर्शन में प्राप्त कर सकता है। 3. वायगोत्स्की द्वारा प्रतिपादित 'पास्पाड़' (Scaffolding) की अवधारणा का तात्पर्य स्थायी सहायता से है, जिसे बच्चा एक बार सीख जाने के बाद जीवनभर के लिए अपने मानसिक स्कीमा में बिना किसी बाहरी हस्तक्षेप के स्वतः स्थापित कर लेता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं? समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) की अवधारणा के संदर्भ में, भारतीय शिक्षा प्रणाली और निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act, 2009) के प्रावधानों के तहत निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं वैज्ञानिक दृष्टि से सत्य है?
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