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UPTET
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम अक्षमताओं और विकासात्मक विकारों के न्यूरो-मनोवैज्ञानिक आकलन' के संदर्भ में, 'डिस्ग्राफिया' (Dysgraphia) और 'डिस्कैलकुलिया' (Dyscalculia) के न्यूरो-संज्ञानात्मक स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'बाएं गोलार्ध के सुपीरियर पैराइटल लोब' (Superior Parietal Lobe) और 'एंगुलर गायरस' (Angular Gyrus) की स्थानिक-संख्यात्मक एकीकरण तथा दृश्य-मोटर समन्वय विफलता की प्रक्रिया, तथा स्टेनिसलास डियाहेन (Stanislas Dehaene) द्वारा प्रतिपादित 'संख्यात्मक प्रसंकरण के ट्रिपल-कोड मॉडल' (Triple-Code Model of Numerical Processing) के अंतर्गत 'विजुअल नंबर फॉर्म', 'वर्बल ऑडिटरी वर्ड-फ्रेम', और 'एनालॉग मेन्टाल नंबर लाइन' के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, उपचारात्मक गणितीय शिक्षण और विद्यार्थियों में संख्यात्मक बोध तथा ग्राफमोटर दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?

Detailed Explanation

स्टेनिसलास डियाहेन (Stanislas Dehaene) का 'ट्रिपल-कोड मॉडल' संख्यात्मक प्रसंकरण (Numerical Processing) को समझाने वाला एक प्रमुख न्यूरो-मनोवैज्ञानिक सिद्धांत है। इसके अनुसार, संख्याएं मस्तिष्क में तीन रूपों—दृश्य (Visual number form), मौखिक (Verbal auditory word-frame), और एनालॉग परिमाण (Analog magnitude/Mental number line)—में संसाधित होती हैं। 'एंगुलर गायरस' (Angular Gyrus) और 'सुपीरियर पैराइटल लोब' (Superior Parietal Lobe) मानसिक संख्या रेखा और स्थानिक-संख्यात्मक एकीकरण के लिए उत्तरदायी प्रमुख मस्तिष्क क्षेत्र हैं। जब इन क्षेत्रों में विकासात्मक विफलता होती है, तो 'डिस्कैलकुलिया' (गणितीय अक्षमता) उत्पन्न होती है। समावेशी कक्षाओं में, इस प्रकार की अक्षमताओं के निवारण के लिए 'विभेदित अनुदेशन' (Differentiated Instruction) और बहुसंवेदी शिक्षण रणनीतियों (Multisensory Teaching Approaches) का उपयोग किया जाता है।
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