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UPTET
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम के संज्ञानात्मक-व्यवहारवादी सिद्धांतों और स्व-नियामक शिक्षण' के संदर्भ में, अल्बर्ट बंडूरा (Albert Bandura) द्वारा प्रतिपादित 'सामाजिक संज्ञानात्मक सिद्धांत' (Social Cognitive Theory) के अंतर्गत 'अवलोकन आधिगम' (Observational Learning) के चार प्रमुख प्रक्रियाओं—'अवधान' (Attention), 'धारण' (Retention), 'उत्पादन' (Reproduction), और 'अभिप्रेरणा' (Motivation)—के न्यूरो-संज्ञानात्मक स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'मिरर न्यूरॉन सिस्टम' (Mirror Neuron System - MNS) और 'प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' की अनुकरण एवं तदनुकूल क्रियात्मक सक्रियण गतिकी, तथा बैरी जिमरमैन (Barry Zimmerman) द्वारा प्रतिपादित 'स्व-नियमन अधिगम चक्र' (Self-Regulated Learning Cycle) के अंतर्गत 'पूर्वानुमान चरण' (Forethought Phase), 'निष्पादन चरण' (Performance Phase), और 'आत्म-चिंतन चरण' (Self-Reflection Phase) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, मेटाकॉग्निटिव रणनीतियों और विद्यार्थियों में स्वायत्त अधिगम दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?

Detailed Explanation

अल्बर्ट बंडूरा का 'सामाजिक संज्ञानात्मक सिद्धांत' अवलोकन अधिगम पर जोर देता है जिसमें 'मिरर न्यूरॉन सिस्टम' (MNS) महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जब कोई बालक किसी मॉडल को देखता है, तो MNS और प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स की अंतःक्रिया से वह उस व्यवहार को मानसिक रूप से कोड और पुनरुत्पादित करता है। बैरी जिमरमैन का 'स्व-नियमन अधिगम चक्र' (पूर्वानुमान, निष्पादन, और आत्म-चिंतन) छात्रों को अपने सीखने की प्रक्रिया को खुद प्रबंधित करने, लक्ष्य निर्धारित करने और मूल्यांकन करने में सक्षम बनाता है। जब इन दोनों सिद्धांतों को मिलाया जाता है, तो यह आधुनिक समावेशी कक्षाओं में विद्यार्थियों को उच्च-स्तरीय संज्ञानात्मक स्वायत्तता, मेटाकॉग्निशन (अधिगम का संज्ञान) और स्व-निर्देशित प्रभावी अधिगम रणनीतियों को विकसित करने में सहायता करता है। अतः विकल्प (b) सर्वाधिक उपयुक्त एवं वैज्ञानिक रूप से सत्य है।
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