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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'सामाजिक अधिगम और अवलोकन संबंधी विकास (Social Learning and Observational Development) के न्यूरो-संज्ञानात्मक सिद्धांतों' के संदर्भ में, अल्बर्ट बंडूरा (Albert Bandura) द्वारा प्रतिपादित 'सामाजिक अधिगम सिद्धांत' (Social Learning Theory) के अंतर्गत 'अवलोकन, प्रतिधारण, पुनरुत्पादन और अभिप्रेरणा' के न्यूरो-संज्ञानात्मक स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'मिरर न्यूरॉन सिस्टम' (Mirror Neuron System - MNS, विशेषकर इन्फीरियर फ्रंटल गाइरस और लोअर पैराइटल लोब) और 'लिम्विक सिस्टम' (Limbic System) के बीच अनुकरण (Imitation), सहानुभूतिपूर्ण अनुक्रिया और vicarious reinforcement की सक्रियण गतिकी, तथा जूलियन रोटर (Julian Rotter) द्वारा प्रतिपादित 'नियंत्रण का स्थान' (Locus of Control) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, रोल-मॉडल आधारित शिक्षाशास्त्र (Role-model based Pedagogy) और विद्यार्थियों में स्व-प्रभावकारिता (Self-Efficacy), सामाजिक उत्तरदायित्व और सकारात्मक व्यवहारिक मॉड्यूलेशन के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
अल्बर्ट बंडूरा का सामाजिक अधिगम सिद्धांत इस बात पर जोर देता है कि बच्चे दूसरों के व्यवहार को देखकर (अवलोकन), उसे याद रखकर, पुनरुत्पादित करके और उचित अभिप्रेरणा पाकर सीखते हैं। न्यूरोसाइंस में 'मिरर न्यूरॉन सिस्टम' (MNS) यही वह तंत्र है जो किसी अन्य व्यक्ति को कोई क्रिया करते हुए देखने और स्वयं उस क्रिया को करने या सीखने के दौरान सक्रिय होता है। इसके साथ ही, 'vicarious reinforcement' (परोक्ष सुदृढ़ीकरण) और 'self-efficacy' (स्व-प्रभावकारिता) जैसी अवधारणाएँ आधुनिक समावेशी कक्षाओं में शिक्षकों को सकारात्मक रोल-मॉडल पेश करने और विद्यार्थियों में सामाजिक-संवेगात्मक विकास को बढ़ावा देने के लिए एक सशक्त वैज्ञानिक आधार प्रदान करती हैं।
Related Questions
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बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र के संदर्भ में लॉरेंस कोहलवर्ग (Lawrence Kohlberg) के 'नैतिक विकास के सिद्धांत' (Moral Development Theory) और इसके 'उत्तर-रूढ़िगत स्तर' (Post-Conventional Morality Level) के अंतर्गत आने वाले दोनों चरणों (चरण 5 और चरण 6) की प्रमुख विशेषताओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस स्तर के पाँचवें चरण ('सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकार' - Social Contract and Individual Rights) में व्यक्ति यह मानता है कि नियम और कानून समाज के आपसी समझौते का परिणाम हैं, इसलिए यदि कोई कानून मानवाधिकारों या समाज के बहुसंख्यक कल्याण की रक्षा करने में असफल रहता है, तो उसमें विवेकपूर्ण तरीके से बदलाव किया जा सकता है।
2. छठे चरण ('सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत' - Universal Ethical Principles) में व्यक्ति किसी बाहरी सामाजिक दबाव या कानूनी दंड के भय से नहीं, बल्कि अपने स्वयं के चुने हुए उन अंतरात्मा के सार्वभौमिक सिद्धांतों (जैसे न्याय, मानवाधिकार, और मानव जीवन की गरिमा) के आधार पर नैतिक निर्णय लेता है, भले ही वे नियम मौजूदा कानूनों के विरुद्ध क्यों न हों।
3. कोहलवर्ग के अनुसार नैतिक विकास के इस सर्वोच्च उत्तर-रूढ़िगत स्तर पर अधिकांश किशोर और वयस्क अपने जीवन के व्यावहारिक अनुभवों के कारण स्वतः पहुँच जाते हैं, और इस अवस्था की मुख्य विशेषता यह होती है कि इसमें नैतिक तर्क पूरी तरह से पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था और अधिकार बनाए रखने पर केंद्रित हो जाते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम के सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत' (Sociocultural Theory of Learning) के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, लेव वायगोत्स्की (Lev Vygotsky) द्वारा प्रतिपादित 'समीपस्थ विकास का क्षेत्र' (Zone of Proximal Development - ZPD) और 'चान्स्कैफोल्डिंग' (Scaffolding) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'डorsolateral Prefrontal Cortex' (DLPFC - कार्यकारी नियंत्रण और योजना), 'Mirror Neuron System' (MNS - अवलोकन और अनुकरण के माध्यम से सीखना), और 'Anterior Cingulate Cortex' (ACC - सामाजिक संज्ञान और त्रुटि निगरानी) के बीच अंतःक्रियात्मक सक्रियण गतिकी, तथा जेरोम ब्रूनर और वायगोत्स्की के विचारों के अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'न्यूरो-सोसियोकल्चरल ऑप्टिमाइज्ड पेडागोजी' (Neuro-Sociocultural Optimized Pedagogy) और विद्यार्थियों में सामाजिक मध्यस्थता (Social Mediation), सहयोगात्मक समस्या-समाधान व समग्र संवेगात्मक-संज्ञानात्मक दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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उत्तर प्रदेश के भौगोलिक एवं जलवायु विभाजन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उत्तर प्रदेश को मुख्य रूप से तीन प्रमुख प्राकृतिक प्रदेशों में विभाजित किया गया है - भावर एवं तराई क्षेत्र, गंगा-यमुना का विशाल मैदान, और दक्षिण का पठारी क्षेत्र।
2. राज्य के दक्षिण का पठारी क्षेत्र प्रायद्वीपीय पठार का ही उत्तर-पूर्वी विस्तार है, जिसके अंतर्गत झाँसी, ललितपुर, महोबा, बांदा और सोनभद्र जैसे जिले आते हैं, और यहाँ की मुख्य नदियाँ बेतवा, केन तथा सोन हैं।
3. 'भावर' क्षेत्र महीन कणों वाली उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी का मैदान है, जहाँ नदियाँ सतह पर बहती हैं और कृषि के लिए यह क्षेत्र सर्वाधिक उपयुक्त माना जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत और लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत के अंतर्संबंधों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पियाजे के अनुसार, जब बालक अपनी मौजूदा मानसिक संरचना (Schema) में बिना किसी बड़े बदलाव के नए अनुभव को व्यवस्थित कर लेता है, तो इस प्रक्रिया को 'समावेशन' (Assimilation) कहा जाता है, जबकि कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत में 'पारंपरिक नैतिकता का स्तर' (Conventional Morality) इस बात पर केंद्रित है कि बालक समाज के नियमों, सामाजिक व्यवस्था और दूसरों की स्वीकृति को बनाए रखने के लिए नैतिक निर्णय लेता है।
2. पियाजे की 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage) में बालक के भीतर निगमनात्मक तर्क (Deductive Reasoning) और अमूर्त चिंतन की क्षमता पूरी तरह विकसित हो जाती है, जो कोहलबर्ग के नैतिक विकास के 'उत्तर-रूढ़िगत स्तर' (Post-conventional Morality) के अंतर्गत आने वाले 'सार्वभौमिक नैतिक विवेक अभिविन्यास' (Universal Ethical Principle Orientation) को समझने के लिए एक आवश्यक संज्ञानात्मक आधार प्रदान करती है।
3. कोहलबर्ग के अनुसार, नैतिक विकास की अवस्थाएँ अपरिवर्तनीय और सार्वभौमिक होती हैं, और उनका क्रम हमेशा पूर्व-रूढ़िगत से रूढ़िगत तथा अंततः उत्तर-रूढ़िगत स्तर की ओर ही आगे बढ़ता है, जिसे पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के चरणों की तरह पीछे की अवस्था में नहीं लौटाया जा सकता।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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जीन पियाजे (Jean Piaget) के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'मूर्त संक्रियात्मक अवस्था' (Concrete Operational Stage) के दौरान बच्चे संरक्षण (Conservation), वर्गीकरण (Classification) और उत्क्रमणीयता (Reversibility) जैसी तार्किक योग्यताओं को विकसित कर लेते हैं, लेकिन उनका चिंतन केवल उन्हीं वस्तुओं और परिस्थितियों तक सीमित रहता है जो प्रत्यक्ष रूप से उनके सामने मौजूद होती हैं।
2. 'पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था' (Pre-operational Stage) में बच्चों के भीतर 'संरक्षण' (Conservation) की क्षमता पूरी तरह से विकसित हो चुकी होती है, जिसके कारण वे किसी वस्तु के आकार या आयतन में परिवर्तन होने पर भी उसके मूल परिमाण को स्थिर समझ लेते हैं।
3. 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage) में किशोरों का चिंतन अमूर्त (Abstract) और परिकल्पनात्मक-निगमनात्मक (Hypothetico-deductive reasoning) हो जाता है, जिससे वे वैज्ञानिक समस्याओं का समाधान करने और संभावित परिणामों का विश्लेषण करने में सक्षम हो जाते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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