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UPTET
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'सृजनात्मकता और अपसारी चिंतन' (Creativity and Divergent Thinking) के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, जिलफोर्ड और टॉरेंस (E.P. Torrance) द्वारा प्रतिपादित 'अपसारी चिंतन के घटकों' (मौलिकता, प्रवाह, लचीलापन और विस्तार) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'डिफ़ॉल्ट मोड नेटवर्क' (Default Mode Network - DMN), 'कंट्रोल नेटवर्क' (Central Executive Network) और 'सेलिएंस नेटवर्क' (Salience Network) के बीच लचीले विचार स्विचिंग, नवीन साहचर्य और अमूर्त कल्पना की सक्रियण गतिकी, तथा ग्राहम वालेस (Graham Wallas) द्वारा प्रतिपादित 'सृजनात्मक चिंतन के चार चरण' (तैयारी, उद्भवन, प्रकटीकरण और सत्यापन) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, मस्तिष्क-मंथन (Brainstorming) और खोजपूर्ण शिक्षाशास्त्र (Exploratory Pedagogy) और विद्यार्थियों में मौलिक समस्या-समाधान, संज्ञानात्मक लचीलेपन व समग्र सृजनात्मक अभिव्यक्ति के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?

Detailed Explanation

यह प्रश्न सृजनात्मकता और अपसारी चिंतन के न्यूरो-संज्ञानात्मक सिद्धांतों और ग्राहम वालेस के चरणों के बीच के अंतर्संबंधों का गहराई से विश्लेषण करता है। विकल्प (b) पूर्णतः सत्य है क्योंकि आधुनिक न्यूरो-इमेजिंग अध्ययनों से यह सिद्ध हुआ है कि सृजनात्मक चिंतन (Divergent Thinking) के समय मस्तिष्क का डिफ़ॉल्ट मोड नेटवर्क (कल्पना और मौलिक विचारों के लिए) और केंद्रीय कार्यकारी नेटवर्क (विचारों के मूल्यांकन और सत्यापन के लिए) सहयोगात्मक रूप से कार्य करते हैं, जो वालेस के 'उद्द्भवन' और 'सत्यापन' चरणों के अनुकूल है।
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