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UPTET
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम के गेस्टाल्टवादी सिद्धांत (Gestalt Theory of Learning)' के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, मैक्स वर्थहाइमर (Max Wertheimer), कोहलर (Wolfgang Köhler), और कोफ्का (Kurt Koffka) द्वारा प्रतिपादित 'सूझ या अंतर्दृष्टि द्वारा अधिगम' (Insight Learning) तथा 'प्रत्यक्षीकरण के नियम' (Gestalt Laws of Perceptual Organization - निकटता, समानता, निरंतरता, और पूर्णता) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'ऑक्सीपिटो-टेम्पोरल कॉर्टेक्स' (Occipito-temporal Cortex), 'हिप्पोकैम्पस' (Hippocampus), और 'पूर्व-ललाट पालि' (Prefrontal Cortex) के बीच समग्र मैपिंग (Holistic Mapping), रीऑर्गेनाइजेशनल गेस्टाल्ट शिफ्ट (Reorganizational Gestalt Shift), और अचानक संज्ञानात्मक पुनर्गठन (Aha! Moment Neural Synchronization) की सक्रियण गतिकी, तथा कर्ट लेविन के 'क्षेत्र सिद्धांत' के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, गेस्टाल्ट-बेस्ड प्रॉब्लम-सॉल्विंग पेडागोजी (Gestalt-Based Problem-Solving Pedagogy) और विद्यार्थियों में समग्र बोध, समस्या समाधान की क्षमता व समग्र मानसिक अंतर्दृष्टि के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?

Detailed Explanation

व्याख्या: गेस्टाल्ट मनोविज्ञान (मैक्स वर्थहाइमर, कोहलर और कोफ्का) के अनुसार अधिगम किसी समस्या के आंशिक या यांत्रिक प्रयासों से नहीं, बल्कि परिस्थितियों को एक समग्र रूप (Whole) में देखने और अचानक सूझ (Insight) प्राप्त करने से होता है। न्यूरो-संज्ञानात्मक दृष्टिकोण से, जब कोई शिक्षार्थी किसी समस्या का अचानक समाधान खोजता है, तो मस्तिष्क के 'ऑक्सीपिटो-टेम्पोरल कॉर्टेक्स' (प्रत्यक्षीकरण) और 'प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (कार्यकारी कार्यकरण व निर्णय) के बीच एक तीव्र समन्वित तंत्रिका सिंक्रनाइज़ेशन होता है, जिसे 'Aha! क्षण' या पुनर्गठनात्मक गेस्टाल्ट शिफ्ट कहा जाता है। यह समावेशी शिक्षा में विद्यार्थियों को रटन विद्या के बजाय तार्किक, समग्र और अर्थपूर्ण ज्ञान प्राप्त करने के लिए प्रेरित करता है। अतः विकल्प (b) सर्वाधिक उपयुक्त और वैज्ञानिक रूप से सत्य है।
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