BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

UPTET
1 views

उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'सृजनात्मकता (Creativity)' के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, ग्राहम वालेस (Graham Wallas) द्वारा प्रतिपादित 'सृजनात्मक चिंतन के चार चरण' (1. तैयारी / Preparation, 2. उद्भवन / Incubation, 3. प्रदीप्ति या आहा! अनुभव / Illumination, और 4. सत्यापन / Verification) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'डिफ़ॉल्ट मोड नेटवर्क' (Default Mode Network - DMN), 'एंटिरियर सिंग्युलेट कॉर्टेक्स' (Anterior Cingulate Cortex - ACC), और 'डोसोलैटरल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (DLPFC) के बीच अचेतन सूचना पुनर्गठन (Unconscious Information Reorganization), संज्ञानात्मक नियंत्रण विश्राम, और नए विचारों के मूल्यांकन की सक्रियण गतिकी, तथा जोइ गिलफोर्ड (Joy Paul Guilford) के 'अपसारी चिंतन' के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'न्यूरो-क्रिएटिविटी ऑप्टिमाइज्ड पेडागोजी' (Neuro-Creativity Optimized Pedagogy) और विद्यार्थियों में समस्या-समाधान की मौलिकता, लीक से हटकर सोचने की क्षमता व समग्र संज्ञानात्मक लचीलेपन के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?

Detailed Explanation

व्याख्या: ग्राहम वालेस (Graham Wallas) द्वारा प्रतिपादित सृजनात्मक चिंतन के चार चरणों (तैयारी, उद्भवन, प्रदीप्ति, और सत्यापन) का गहरा न्यूरो-संज्ञानात्मक आधार है। जब विद्यार्थी किसी समस्या की 'तैयारी' के बाद 'उद्भवन' (Incubation) अवस्था में जाते हैं, तो मस्तिष्क का 'डिफ़ॉल्ट मोड नेटवर्क' (Default Mode Network - DMN) सक्रिय होता है, जो अचेतन रूप से विभिन्न स्मृतियों और सूचनाओं को जोड़ता है। इसके बाद, जब अचानक समाधान या 'आहा! अनुभव' यानी 'प्रदीप्ति' (Illumination) होती है, तब 'एंटीरियर सिंग्युलेट कॉर्टेक्स' (ACC) और 'डोसोलैटरल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (DLPFC) उस नए विचार को चेतना में लाते हैं और उसका मूल्यांकन करते हैं। यह न्यूरो-बायोलॉजिकल गतिकी प्राथमिक समावेशी कक्षाओं में बच्चों की मौलिकता, अपसारी चिंतन और संज्ञानात्मक लचीलेपन के विकास के लिए 'न्यूरो-क्रिएटिविटी ऑप्टिमाइज्ड पेडागोजी' को प्रभावी बनाती है। अतः विकल्प (A) सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है।
Share:

Related Questions

उत्तर प्रदेश के भौगोलिक स्वरूप और अपवाह तंत्र (Drainage System) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. उत्तर प्रदेश के मैदानी भाग में प्रवाहित होने वाली अधिकांश नियाँ (जैसे- गंगा, यमुना, गोमती और घाघरा) हिमालयी या मैदानी उद्गम वाली हैं, जिनमें गोमती नदी का उद्गम पीलीभीत जिले की फुलहर झील (माधोटाट) से होता है और यह एकमात्र ऐसी नदी है जो मैदानी तल से निकलती है। 2. बुंदेलखंड के पठारी क्षेत्र से बहने वाली नदियाँ (जैसे- चंबल, बेतवा, केन और टोंस) दक्षिण से उत्तर की ओर प्रवाहित होती हैं और यमुना या सीधे गंगा नदी में मिलती हैं, तथा इन नदियों द्वारा क्षेत्र में 'बीहड़' (Ravines) का निर्माण किया गया है। 3. सोन नदी उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर और सोनभद्र जिलों से होकर बहने वाली एक प्रमुख नदी है, जो गंगा की एक सीधी सहायक नदी है और यह अपने मार्ग में रिहन्द बाँध जैसी बहुउद्देशीय परियोजनाओं का जल पोषण करती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं? उत्तर प्रदेश के भौगोलिक स्वरूप और जलवायु के संदर्भ में, राज्य में ग्रीष्मकाल के दौरान चलने वाली अत्यधिक गर्म, शुष्क और धूलभरी हवाओं (लू) के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन भौगोलिक एवं मौसमी दृष्टिकोण से सर्वाधिक उपयुक्त और तार्किक है? उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अभिप्रेरणा और अधिगम' (Motivation and Learning) के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, अब्राहम मैस्लो (Abraham Maslow) द्वारा प्रतिपादित 'आवश्यकता पदानुक्रम सिद्धांत' (Hierarchy of Needs: शारीरिक सुरक्षा से लेकर आत्म-सिद्धि तक) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'वेंट्रलग्रुप स्ट्रेटम' (Ventral Striatum), 'न्यूक्लियस एकुम्बेंस' (Nucleus Accumbens), 'डॉपाजेर्जिक रिवार्ड पाथवे' (Dopaminergic Reward Pathway), और 'प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (Prefrontal Cortex) के बीच आंतरिक व बाह्य अभिप्रेरणा, होमियोस्टैटिक संतुलन और लक्ष्य-निर्देशित व्यवहार की सक्रियण गतिकी, तथा एडवर्ड डेसी और रिचर्ड रायन के 'आत्म-निर्धारण सिद्धांत' (Self-Determination Theory) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'न्यूरो-मोटिवेशन ऑप्टिमाइज्ड पेडागोजी' (Neuro-Motivation Optimized Pedagogy) और विद्यार्थियों में स्वायत्तता (Autonomy), सार्थकता (Relatedness) व समग्र संवेगात्मक-संज्ञानात्मक दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है? उत्तर प्रदेश के भौगोलिक एवं भूगर्भीय संरचना के संदर्भ में, 'बुंदेलखंड के पठारी क्षेत्र' की विशेषताओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बुंदेलखंड का पठार उत्तर प्रदेश के दक्षिण में स्थित है, जिसका निर्माण प्राचीनतम प्री-कैंब्रियन युग के नाइस (Gneiss), ग्रेनाइट (Granite) और शिस्ट (Schist) चट्टानों से हुआ है। 2. इस क्षेत्र में सामान्यतः लाल और भूरे रंग की हल्की मृदा पाई जाती है, जिसे स्थानीय भाषा में 'परवा', 'मार', 'काबर' और 'रास' के नाम से जाना जाता है, जो कृषि की दृष्टि से कम उपजाऊ होने के कारण मुख्य रूप से वर्षा पर निर्भर होती है। 3. उत्तर प्रदेश का यह पठारी क्षेत्र खनिज संपदा के दृष्टिकोण से अत्यंत समृद्ध है, जहाँ देश के सबसे बड़े ग्रेफाइट, कोयला और पेट्रोलियम के भंडार पाए जाते हैं, जिसके कारण यहाँ भारी उद्योगों का जाल बिछा हुआ है। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं? उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'हिंदी भाषा एवं व्याकरण' के अंतर्गत 'कारक और उनके विभक्ति चिह्नों' के सूक्ष्म व्याकरणिक विश्लेषण के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा वाक्य 'अपादान कारक' (जहाँ अलगाव, डर, तुलना, सीखने या लजाने का भाव हो) और 'करण कारक' (जहाँ साधन या माध्यम का बोध हो) के बीच के अंतर को सर्वोत्तम और व्याकरणिक दृष्टि से पूर्णतः शुद्ध रूप में स्पष्ट करता है?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.