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UPTET
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'समावेशी शिक्षा और विशिष्ट बालकों के शिक्षण' (Inclusive Education) के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, 'ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर' (ASD - Autism Spectrum Disorder) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'मिरर न्यूरॉन सिस्टम' (Mirror Neuron System - MNS), 'सुपीरियर टेम्पोरल सल्kus' (STS), और 'वेंट्रोमेडियल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (vmPFC) के बीच सामाजिक-संज्ञानात्मक विसंगति, 'थ्योरी ऑफ़ माइंड' (Theory of Mind - ToM) deficits, और भावनाओं की अनुभूतियों के प्रसंस्करण में अक्षमता की सक्रियण गतिकी, तथा साइमन बैरन-कोहेन (Simon Baron-Cohen) के 'एम्पैथाइजिंग-सिस्टमेटाइजिंग (E-S) सिद्धांत' के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'न्यूरो-ऑटिज्म ऑप्टिमाइज्ड पेडागोजी' (Neuro-Autism Optimized Pedagogy) और विद्यार्थियों में सामाजिक संचार हस्तक्षेप (Social Communication Intervention), सह-नियमन (Co-regulation) व समग्र संवेगात्मक-संज्ञानात्मक दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) एक न्यूरो-डेवलपमेंटल विकार है जो मुख्य रूप से सामाजिक संचार और पारस्परिक अंतःक्रिया को प्रभावित करता है। न्यूरो-संज्ञानात्मक शोध के अनुसार, 'मिरर न्यूरॉन सिस्टम' (MNS) और 'सुपीरियर टेम्पोरल सल्कुस' (STS) जो दूसरों के हाव-भाव और इरादों को समझने में मदद करते हैं, ASD से ग्रसित बच्चों में कम सक्रिय होते हैं। इससे 'थ्योरी ऑफ़ माइंड' (ToM - दूसरों के दृष्टिकोण को समझने की क्षमता) में कमी आती है। साइमन बैरन-कोहेन के 'एम्पैथाइजिंग-सिस्टमेटाइजिंग (E-S) सिद्धांत' के अनुसार, ऑटिज्म से पीड़ित व्यक्तियों में 'एम्पैथाइजिंग' (सहानुभूतिपूर्ण समझ) की तुलना में 'सिस्टमेटाइजिंग' (पैटर्न या प्रणालियों को समझने की प्रवृत्ति) प्रबल या भिन्न हो सकती है। 'न्यूरो-ऑटिज्म ऑप्टिमाइज्ड पेडागोजी' और बहुसंवेदी सामाजिक संचार हस्तक्षेप के माध्यम से इन तंत्रिका मार्गों को उत्तेजित करके समावेशी कक्षाओं में उनके संज्ञानात्मक और संवेगात्मक विकास को सुगम बनाया जा सकता है।
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अभिप्रेरणा (Motivation)' के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, अब्राहम मैस्लो (Abraham Maslow) द्वारा प्रतिपादित 'आवश्यकता पदानुक्रम सिद्धांत' (Hierarchy of Needs: शारीरिक, सुरक्षा, सामाजिक, सम्मान, और आत्म-सिद्धि की आवश्यकताएं) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'लिम्बिक सिस्टम' (Limbic System), 'वेंट्रल टेग्मेंटल एरिया' (VTA), और 'प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (Prefrontal Cortex) के बीच होमियोस्टैटिक नियमन (Homeostatic Regulation), आंतरिक-बाहरी प्रेरणा एकीकरण (Intrinsic-Extrinsic Motivation Integration), और लक्ष्य-निर्देशित व्यवहार की सक्रियण गतिकी, तथा डेविड मैक्लेलैंड (David McClelland) के 'आवश्यकता सिद्धांत' (Achievement, Affiliation, and Power Needs) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'मोटिवेशनल-ड्रिवेन एंगेजमेंट पेडागोजी' (Motivational-Driven Engagement Pedagogy) और विद्यार्थियों में उच्च-स्तरीय अधिगम आकांक्षा, भावनात्मक सुरक्षा व समग्र मनोवैज्ञानिक कल्याण के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम अक्षमता और डिस्केलकुलिया (Dyscalculia - गणितीय वैकल्य)' के न्यूरो-संज्ञानात्मक सिद्धांतों के संदर्भ में, ब्रायन बटरवर्थ (Brian Butterworth) द्वारा प्रतिपादित 'कोर नंबर सेंस हाइपोथेसिस' (Core Number Sense Hypothesis) के अंतर्गत मस्तिष्क के 'इंट्रापैरिएटल सर्कस' (Intraparietal Sulcus - IPS) और 'विजुअल वर्ड फॉर्म एरिया' के बीच संख्यात्मक परिमाण प्रसंस्करण (Numerical Magnitude Processing), स्थानिक-अंकीय संगणना और ऑर्थोग्राफिक-संख्यात्मक एकीकरण की सक्रियण विसंगति, तथा स्टैनिस्लास डीहेन (Stanislas Dehaene) के 'ट्रिपल कोड मॉडल' (Triple Code Model: विजुअल अरेबिक नंबर फॉर्म, ऑडिटो-वर्बल वर्ड फॉर्म, और एनालॉग मैग्नीट्यूड रिप्रेजेंटेशन) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, मोंटेसरी और संख्या-आधारित मूर्त शिक्षाशास्त्र (Math-Manipulative Pedagogy) और विद्यार्थियों में स्थानिक तार्किकता, संख्या पहचान व गणितीय समस्या-समाधान प्रवाह के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली और वैदिक काल के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वैदिक कालीन शिक्षा व्यवस्था में 'उपनयन संस्कार' छात्र के ब्रह्मचर्य आश्रम में प्रवेश और औपचारिक शिक्षा के प्रारंभ का सूचक था, जो आमतौर पर विभिन्न वर्णों (ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य) के लिए अलग-अलग आयु में संपन्न किया जाता था।
2. प्राचीन तक्षशिला विश्वविद्यालय में प्रवेश के लिए न्यूनतम आयु सीमा 16 वर्ष निर्धारित थी, और यहाँ छात्रों को वेदों, उपनिषदों के साथ-साथ चिकित्सा (आयुर्वेद), धनुर्विद्या और 18 विभिन्न शिल्पों की उच्च शिक्षा दी जाती थी, जहाँ कोई केंद्रीय प्रशासनिक नियंत्रण या परीक्षा प्रणाली नहीं थी।
3. उत्तर-वैदिक काल और सूत्र काल तक आते-आते महिलाओं की स्थिति में गिरावट के कारण उनका उपनयन संस्कार पूरी तरह से बंद कर दिया गया था, और उन्हें वेदों के अध्ययन या शिक्षा प्राप्त करने का कोई भी अधिकार शेष नहीं बचा था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध लोकगीतों और उनकी गायन विधाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा युग्म सही सुमेलित नहीं है?
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उत्तर प्रदेश के औद्योगिकीकरण और विशेष आर्थिक क्षेत्रों (SEZs) के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा औद्योगिक पार्क और उससे संबंधित जिले का युग्म सही सुमेलित नहीं है?
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