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Indian Polity
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संविधान का कौन सा भाग 'नागरिकता' (Citizenship) से संबंधित है?

Detailed Explanation

संविधान के भाग 2 (अनुच्छेद 5 से 11) में नागरिकता का उल्लेख किया गया है।
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→ लोक लेखा समिति का कार्यकाल कितना होता है? → भारतीय संविधान के भाग-IV के अंतर्गत वर्णित राज्य के नीति निर्देशक तत्वों (DPSP) और उनके न्यायिक प्रवर्तन तथा विशिष्ट अनुच्छेदों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 37 के अनुसार नीति निर्देशक तत्व देश के शासन में मूलभूत हैं और विधि बनाने में इन तत्वों को लागू करना राज्य का कर्तव्य होगा, किंतु ये तत्व किसी भी न्यायालय द्वारा न्यायोचित (Justiciable) नहीं हैं, अर्थात इनके उल्लंघन या क्रियान्वयन न होने पर किसी भी न्यायालय में वाद दायर नहीं किया जा सकता है। 2. अनुच्छेद 39A के तहत राज्य का यह कर्तव्य निर्धारित किया गया है कि वह समान अवसर के आधार पर न्याय को सुलभ बनाए और विशेष रूप से आर्थिक या किसी अन्य अयोग्यता के कारण कोई भी नागरिक न्याय के अवसरों से वंचित न रहे, जिसके लिए राज्य द्वारा मुफ्त कानूनी सहायता (Free Legal Aid) का प्रावधान किया गया है। 3. अनुच्छेद 44 के अंतर्गत 'समान नागरिक संहिता' (Uniform Civil Code) को लागू करने का निर्देश दिया गया है, जो कि केवल व्यक्तिगत कानूनों (Personal Laws) तक सीमित है और इसके दायरे में सार्वजनिक कानूनों, आपराधिक कानूनों तथा प्रक्रियात्मक विधियों को भी पूर्णतः शामिल किया गया है जो पूरे देश में एकरूपता से लागू होते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारत के राष्ट्रपति की शक्तियों और उनके संवैधानिक क्रियान्वयन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 72 के अंतर्गत राष्ट्रपति को क्षमादान की जो शक्ति प्रदान की गई है, उसके तहत मृत्युदंड के मामले में केवल राष्ट्रपति को ही पूर्ण क्षमा (Pardon) देने की अनन्य शक्ति प्राप्त है, और राज्यपाल को राज्य सूची के विषयों पर भी मृत्युदंड के मामले में क्षमादान देने की कोई संवैधानिक शक्ति प्राप्त नहीं है। 2. राष्ट्रपति की अध्यादेश निर्माण की शक्ति (अनुच्छेद 123) संसद की विधि बनाने की शक्ति के सह-विस्तारित है, और राष्ट्रपति द्वारा प्रख्यापित प्रत्येक अध्यादेश को संसद के पुनः समवेत होने पर दोनों सदनों के समक्ष रखना अनिवार्य होता है, तथा यदि संसद उस अध्यादेश को बिना अनुमोदन के अस्वीकृत करने वाला संकल्प पारित कर देती है, तो वह संसद के पुनः समवेत होने के ठीक छह सप्ताह बाद स्वतः निष्प्रभावी हो जाता है। 3. 'कीहर सिंह बनाम भारत संघ वाद' और 'शत्रुघ्न चौहान बनाम भारत संघ वाद' में उच्चतम न्यायालय ने यह निर्धारित किया है कि राष्ट्रपति द्वारा अनुच्छेद 72 के अंतर्गत दया याचिकाओं पर लिए गए निर्णयों की न्यायिक समीक्षा पूरी तरह से वर्जित है और इसके किसी भी आदेश को किसी भी आधार पर न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती है। 4. संविधान के अनुच्छेद 143 के तहत राष्ट्रपति को उच्चतम न्यायालय से परामर्श करने की शक्ति प्राप्त है, और यदि विधि या तथ्य का कोई ऐसा सार्वजनिक महत्व का प्रश्न उत्पन्न होता है जिस पर राष्ट्रपति राय मांगता है, तो उच्चतम न्यायालय के लिए राष्ट्रपति को अपनी राय देना अनिवार्य होता है, तथा राष्ट्रपति उस राय को मानने के लिए भी पूर्णतः बाध्य होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय संविधान के अंतर्गत उपराष्ट्रपति के निर्वाचन, उनकी पदावधि, हटाने की प्रक्रिया तथा प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद से संबंधित संवैधानिक प्रावधानों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 66 के अनुसार उपराष्ट्रपति का निर्वाचन संसद के दोनों सदनों (निर्वाचित एवं मनोनीत दोनों सदस्यों) के सदस्यों से मिलकर बनने वाले निर्वाचक गण के सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा होता है, और राज्य विधानमंडल के सदस्य इस निर्वाचन में भाग नहीं लेते हैं। 2. उपराष्ट्रपति को उसके पद से हटाने के लिए राज्य सभा द्वारा अपने तत्कालीन समस्त सदस्यों के बहुमत से पारित एक संकल्प द्वारा जिसे लोकसभा सहमत हो, हटाया जा सकता है, किंतु इस प्रकार का संकल्प तब तक प्रस्तावित नहीं किया जा सकता जब तक कि उस आशय की कम से कम चौदह दिन की लिखित सूचना न दी गई हो। 3. अनुच्छेद 75 के अंतर्गत प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह पर करता है, तथा मंत्रिपरिषद में प्रधानमंत्री सहित मंत्रियों की कुल संख्या लोकसभा के सदस्यों की कुल संख्या के पंद्रह प्रतिशत से अधिक नहीं होगी, और यह प्रतिबंध केवल केंद्र सरकार की मंत्रिपरिषद पर लागू होता है, राज्यों की मंत्रिपरिषद पर नहीं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय संविधान के अनुच्छेद 263 के अंतर्गत अंतर-राज्यीय परिषद् (Inter-State Council) की स्थापना और कार्यप्रणाली के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 263 के अनुसार राष्ट्रपति को यह शक्ति प्राप्त है कि यदि वह लोक हित में आवश्यक समझे, तो राज्यों के बीच उत्पन्न होने वाले विवादों की जांच करने, उनके सामान्य हितों पर चर्चा करने या समन्वय स्थापित करने के लिए अंतर-राज्यीय परिषद् की स्थापना कर सकता है, और इस परिषद् द्वारा दिए जाने वाले निर्णय प्रकृति से सभी संबंधित राज्यों तथा केंद्र सरकार पर पूर्णतः बाध्यकारी (Binding) होते हैं। 2. वर्ष 1990 में सरकारी आयोग (Sarkaria Commission) की संस्तुतियों के आधार पर राष्ट्रपति के आदेश द्वारा एक स्थायी अंतर-राज्यीय परिषद् का गठन किया गया, जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं और इसके सदस्यों में सभी राज्यों के मुख्यमंत्री तथा संघ राज्य क्षेत्रों के प्रशासक व मुख्यमंत्री शामिल होते हैं। 3. अनुच्छेद 263 के अंतर्गत गठित अंतर-राज्यीय परिषद् मुख्य रूप से एक विचार-मंच (Deliberative Body) के रूप में कार्य करती है, और यह नदी जल विवाद अधिनियम, 1956 के अंतर्गत आने वाले विशिष्ट नदी जल विवादों (River Water Disputes) पर निर्णय देने की अंतिम न्यायिक अधिकारिता रखती है, जिसके आगे उच्चतम न्यायालय की मूल अधिकारिता समाप्त हो जाती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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